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गोवा में दो दिन - जंगल और पहाड़ों वाला गोवा

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25 सितंबर 2018
अक्सर हम सोचते हैं कि गोवा में केवल बीच ही हैं, केवल समुद्री एक्टिविटी ही हैं। ये बीच, वो बीच, ये एक्टिविटी, वो एक्टिविटी और गोवा खत्म। जबकि ऐसा नहीं है। यहाँ पश्चिमी घाट के बहुत ऊँचे-ऊँचे पर्वत हैं और ऊँचाई से गिरते जलप्रपात भी हैं। और इनसे भी ज्यादा... घने जंगल भी हैं।
तो आज हम दूधसागर जलप्रपात की ओर चल दिए। कई साल पहले जब मैं दूधसागर गया था, तो रेलवे लाइन के साथ-साथ चला गया था। तब इतनी सख्ताई नहीं थी। जबकि अब बहुत सख्ताई है। दूधसागर का सबसे शानदार नजारा केवल रेलवे लाइन से ही दिखता है। इस कारण रेलवे लाइन पर इतनी भीड़ जमा हो जाया करती थी कि रेल यातायात बाधित होता था। कई बार दुर्घटनाएँ भी हो जाया करती थीं। तो रेलवे ने अब रेलवे ट्रैक के साथ-साथ पैदल जाने पर रोक लगा दी है।
लेकिन यहाँ एक चक्कर और भी है। दूधसागर जलप्रपात भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंदर है। यहाँ जाने के लिए वन कानून लागू होता है। और शायद आपको पता हो कि ज्यादातर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सेंचुरी मानसून में पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं।
फिर भी हम दूधसागर की ओर चल दिए। इसके लिए हमें सबसे पहले पहुँचना था कुलेम। एयरपोर्ट से दूरी लगभग 50 किलोमीटर। शुरू में तो आबादी है, लेकिन जैसे-जैसे कुलेम की ओर बढ़ते जाते हैं, जंगल घना होता जाता है। एक समय ऐसा भी आता है, जब लगने लगता है कि पता नहीं किस मोड पर कौन-सा जानवर आपको खड़ा मिल जाए।






तो कुलेम पहुँचकर पता चला कि दूधसागर नहीं जा सकते। हालाँकि कुछ लोग ज्यादा पैसे लेकर गैर-कानूनी तरीकों से हमें वहाँ ले जाने को तैयार थे, लेकिन इसके लिए हम तैयार नहीं हुए। रेलवे स्टेशन पहुँचे, तो उधर जाने के लिए कोई ट्रेन भी नहीं थी। दीप्ति बड़ी निराश हुई। वापस लौटना पड़ा।

अब हम मुड़ गए नेत्रावती वाइल्डलाइफ सेंचुरी की ओर और सीधे जा पहुँचे बुडबुडया तालाब। यानी बबलिंग लेक। यानी जिसमें बुलबुले उठते रहते हैं। पूरा रास्ता घने जंगल का है और कोई भी सूचना-पट्ट आपको इस स्थान का नहीं मिलेगा। न नेट था और न ही नेटवर्क। फिर भी गूगल मैप ने हमें वहाँ पहुँचाकर ही दम लिया।
यहाँ एक मंदिर है और एक तालाब है। इसमें बुलबुले उठते रहते हैं। साथ ही बहुत सारी मछलियाँ भी हैं, जो आपके पैर डालकर बैठते ही पहले शर्माती हैं, फिर पैर की मृत त्वचा चट कर जाती हैं।

पर्वतीय और जंगली गोवा का यह रूप हमें बड़ा पसंद आया। ज्यादातर लोग गोवा जाकर और समुद्र देखकर लौट आते हैं, जबकि समुद्र के अलावा भी गोवा बहुत बड़ा है। आपको अगर कुछ नहीं पता, तो किराये पर मोटरसाइकिल या स्कूटी लेकर जंगल में घूमते रहिए, घूमते रहिए... और आप पाएँगे कि आपकी गोवा यात्रा सफल हो गई।

अब हमें फिर से समुद्र की याद आने लगी। उधर सनसेट देखना है। और हम पलोलेम की ओर चल दिए। रास्ता नेत्रावती वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंदर से होकर जाता है। सिंगल लेन की बेहद संकरी सड़क है और हमारी यह बाइक यात्रा यादगार बन जाती है।


बुडबुडया तालाब यानी बबलिंग लेक

इस तालाब में बुलबुले उठते रहते हैं...











गोवा के जंगलों में













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2. चलो कोंकण: इंदौर से नासिक
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6. भीमाशंकर से माणगाँव
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12. कास पठार... महाराष्ट्र में ‘फूलों की घाटी’
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14. गोवा में दो दिन - ओल्ड गोवा और कलंगूट, बागा बीच
15. गोवा में दो दिन - जंगल और पहाड़ों वाला गोवा
16. गोवा में दो दिन - पलोलम बीच




Comments

  1. आप शानदार यात्रा वृतांत लिख रहे हैं। आपकी गोवर्धन और नेपाल यात्रा से लेकर गोवा यात्रा तक लेखन भी निखर रहा है और फोटो भी।

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