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गंडीकोटा: भारत का ग्रैंड कैन्योन

15 फरवरी 2019 जिस समय हम्पी का विजयनगर साम्राज्य अपने पूरे वैभव पर था, उसी समय हम्पी से कुछ ही दूर एक छोटा-सा साम्राज्य बना हुआ था, जिसकी राजधानी गंडीकोटा थी। फिर दिल्ली सल्तनत ने जब दक्कन पर आक्रमण करने शुरू किए तो न हम्पी टिक पाया और न ही गंडीकोटा। हाँ, इस सल्तनत के खिलाफ लड़ने को हम्पी और गंडीकोटा एक जरूर हुए, लेकिन खुद को नहीं बचा पाए। आज हम्पी भी खंडहर हो गया है और गंडीकोटा भी। गंडीकोटा आंध्र प्रदेश में है। लेकिन यह उन खंडहरों और किले के लिए उतना नहीं जाना जाता, जितना अपने अद्‍भुत प्राकृतिक नजारे के लिए। यहाँ पेना नदी बहुत गहरी बहती है - सीधी खड़ी चट्टानों के बीच। इसलिए इसे भारत का ग्रैंड कैन्योन भी कहा जाता है। नदी के दोनों किनारे 100-100 मीटर तक एकदम खड़े हैं। असल में ग्रांड कैन्योल अमरीका में है। वहाँ कोलोराडो नदी इसी तरह का कटान करती है और काफी प्रसिद्ध हो गई है। अब हम उतनी आसानी से अमरीका तो नहीं जा सकते, तो क्या हुआ? हमारे पास भी अपना ग्रांड कैन्योन है। दक्कन का पठार मुख्यतः मैदानी ही है, लेकिन कहीं-कहीं छोटी-छोटी पहाड़ियाँ भी हैं। यहाँ भी एक पहाड़ी श्रंखला...

मालशेज घाट - पश्चिमी घाट की असली खूबसूरती

17 सितंबर 2018 पश्चिमी घाट के पर्वत कहाँ से शुरू होते हैं, यह तो नक्शे में देखना पड़ेगा; लेकिन कन्याकुमारी में समाप्त होते हैं, यह नहीं देखना पड़ेगा। और महाराष्ट्र में ये पूरे वैभव के साथ विराजमान हैं, यह मैंने किताबों में भी पढ़ा था और नक्शे में भी देखा था। दो-तीन बार रेल से भी देखने का मौका मिला, जब मुंबई से भुसावल की यात्रा की, जब मडगाँव से हुबली की यात्रा की और जब हासन से मंगलूरू की यात्रा की। बस... इसके अलावा कभी भी पश्चिमी घाट में जाने का मौका नहीं मिला। हम अपनी मोटरसाइकिल से कल्याण से मुरबाड की ओर बढ़ रहे थे। रास्ता अच्छा था। शहर की भीड़ पीछे छूट चुकी थी। हर दस-दस मिनट में अहमदनगर से कल्याण की बसें जाती मिल रही थीं। ज्यादातर बसों पर अहमदनगर की बजाय ‘नगर’ लिखा था। अहमदनगर को नगर भी कहते हैं। बसों की इतनी संख्या से पता चल रहा था कि यह सड़क अहमदनगर को मुंबई से जोड़ने वाली मुख्य सड़क है। लेकिन इन बसों के अलावा कोई ट्रैफिक नहीं था। दोपहर बाद हो चुकी थी। तेज गर्मी थी। मुरबाड में पानी की एक बोतल लेनी पड़ी - केवल ठंडी होने के कारण। पहले गला तर किया, फिर सिर पर उड़ेल लिया। बड़ी राहत मिली। धीरे-धीर...