गंडीकोटा: भारत का ग्रैंड कैन्योन

February 25, 2019


15 फरवरी 2019

जिस समय हम्पी का विजयनगर साम्राज्य अपने पूरे वैभव पर था, उसी समय हम्पी से कुछ ही दूर एक छोटा-सा साम्राज्य बना हुआ था, जिसकी राजधानी गंडीकोटा थी। फिर दिल्ली सल्तनत ने जब दक्कन पर आक्रमण करने शुरू किए तो न हम्पी टिक पाया और न ही गंडीकोटा। हाँ, इस सल्तनत के खिलाफ लड़ने को हम्पी और गंडीकोटा एक जरूर हुए, लेकिन खुद को नहीं बचा पाए। आज हम्पी भी खंडहर हो गया है और गंडीकोटा भी।

गंडीकोटा आंध्र प्रदेश में है। लेकिन यह उन खंडहरों और किले के लिए उतना नहीं जाना जाता, जितना अपने अद्‍भुत प्राकृतिक नजारे के लिए। यहाँ पेना नदी बहुत गहरी बहती है - सीधी खड़ी चट्टानों के बीच। इसलिए इसे भारत का ग्रैंड कैन्योन भी कहा जाता है। नदी के दोनों किनारे 100-100 मीटर तक एकदम खड़े हैं। असल में ग्रांड कैन्योल अमरीका में है। वहाँ कोलोराडो नदी इसी तरह का कटान करती है और काफी प्रसिद्ध हो गई है। अब हम उतनी आसानी से अमरीका तो नहीं जा सकते, तो क्या हुआ? हमारे पास भी अपना ग्रांड कैन्योन है।

दक्कन का पठार मुख्यतः मैदानी ही है, लेकिन कहीं-कहीं छोटी-छोटी पहाड़ियाँ भी हैं। यहाँ भी एक पहाड़ी श्रंखला है, जो उत्तर से दक्षिण दिशा में है। पेना नदी पश्चिम से पूर्व में बहती है। इस पहाड़ी श्रंखला को पेना नदी ऐसे काटकर निकल जाती है, जैसे चाकू से पनीर काट देते हैं।


गंडीकोटा में वैसे तो कोई होटल नहीं है, लेकिन यहाँ कैम्पिंग होती है। और इन कैम्प का किराया बहुत ज्यादा होता है। एक छोटे-से टैंट का किराया 1500 रुपये। वो टैंट, जो हिमालय में ट्रैकिंग करने वाले ट्रैकर्स लेकर चलते हैं और जो खुद 1500 रुपये में नया आता है। इसके अलावा कुछ बड़े टैंट भी होते हैं, जो वातानुकूलित हैं। इनका किराया 2500 रुपये था, जो मोलभाव करने के बाद 1700 रुपये में तय हुआ। असल में हमें यहाँ रुकना ही था। तेज गर्मी पड़ती है, इसलिए छोटे ‘हिमालयी’ टैंटों में नहीं रुक सकते थे। इसलिए एसी वाला टैंट लेना पड़ा।

लेकिन यहाँ रुकना तब वसूल हो गया, जब हम इस कैन्योन के ऊपर एकदम किनारे पर बैठे और नीचे नदी तक भी उतरे।

गंडीकोटा हैदराबाद से 400 किमी है, विजयवाडा से भी 400 किमी, कडप्पा से 85 किमी, बंगलौर से 280 किमी है और नजदीकी रेलवे स्टेशन ताडीपत्री से 80, मुद्दानूर से 25 किमी, जम्मलमडुगु से 15 किमी है...
























गंडीकोटा किले के अंदर








आगे पढ़ें: लेपाक्षी मंदिर

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6 Comments

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February 25, 2019 at 6:35 PM delete

नीचे से दूसरा फ़ोटो... अतिगजब😊👍

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February 26, 2019 at 9:09 AM delete

जैसे चाकू से पनीर काट देते हैं :D
बहुतै गजब जगह और लाजवाब फोटो
भारत में क्या नहीं है !

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March 13, 2019 at 4:06 PM delete

आप ब्लॉगर छोड़कर, वर्डप्रेस पर वेबसाइट क्यों नहीं बनाते। बहुत सुन्दर साइट बनेगी।

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