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दारोजी भालू सेंचुरी में काले भालू के दर्शन


Daroji Bear Sanctuary Karnataka

15 फरवरी 2019
उस दिन जब हम विट्ठल मंदिर से पैदल हम्पी लौट रहे थे, तो अंधेरा हो गया। हम तुंगभद्रा के किनारे-किनारे धीरे-धीरे चलते आ रहे थे। एक विदेशी महिला अपने दो बच्चों के साथ हम्पी से विट्ठल मंदिर की ओर जा रही थी। रास्ते में एक सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें टोका - “मैडम, गो बैक टू हम्पी। नॉट एलाऊड हियर आफ्टर दा इवनिंग। बीयर एंड चीता कम्स हीयर।”
मेरे कान खड़े हो गए। चीते को तो मैंने सिरे से नकार दिया, क्योंकि भारत में चिड़ियाघरों के अलावा चीता है ही नहीं। हाँ, तेंदुआ हर जगह होता है। और बीयर?
“क्या यहाँ भालू हैं?” मैंने पूछा।
“हाँ जी, पास में बीयर सेंचुरी है, तो यहाँ तक भालू आ जाते हैं केले खाने।”

और अगले ही दिन हम उस भालू सेंचुरी के गेट पर थे। दोपहर का डेढ़ बजा था। पता चला कि दो बजे के बाद ही एंट्री कर सकते हैं। तो दो बजे के बाद हमने एंट्री कर ली। प्रति व्यक्ति शुल्क है 25 रुपये और बाइक का कोई शुल्क नहीं। कार के 500 रुपये। चार किलोमीटर अंदर जंगल में जाने के बाद एक वाच टावर है। वहाँ बैठ जाना है और भालू के दिखने की प्रतीक्षा करनी है।







तीन बजे भालू देखने कुछ लड़के आए। तीन बजकर दस मिनट तक भी उन्हें जब भालू नहीं दिखा, तो वे निराश होकर वापस चले गए। अब ये लोग गूगल मैप आदि पर इस जगह को 1-स्टार देंगे। यहाँ छह बजे तक बैठ सकते थे। हम छह बजे तक बैठने का इरादा लेकर ही आए थे। अभी तीन बजे तेज धूप थी और हमारे अलावा यहाँ कोई भी यात्री नहीं था। एक बेंच पर मैं लेट गया - “मैं सो रहा हूँ। भालू दिखे, तो बता देना।”

अभी अच्छी तरह आँख लगी भी नहीं थी कि दीप्ति की घबराई आवाज से उठना पड़ा।
“क्या हुआ?”
“बंदर।”
एक मरियल-सा बंदर मुंडेर पर बैठा था। हम चुप बैठे रहे। वह और पास आया। शरीफ था। तभी तो मेरे घुड़की देते ही चला गया।

यहाँ दो से छह बजे तक वन विभाग का एक कर्मचारी भी बैठा रहता है। उसने बताया कि वे लोग रोज दोपहर दो बजे भालुओं को फीडिंग कराते हैं। गुड़ में पाम ऑयल मिलाकर शहद जैसा बनाकर कुछ पत्थरों और चट्टानों पर डालकर आ जाते हैं। इससे भालुओं का हाजमा ठीक रहता है। असल में यह स्थान एक सूखा स्थान है। बारिश कम होती है। वन विभाग के कर्मचारी बोरवेल से कुछ जगहों पर पानी भरते हैं, ताकि जानवरों को पानी की तलाश में भटकना न पड़े।

यहाँ 100 से भी ज्यादा भालू हैं, लेकिन ज्यादातर भालू इस सेंचुरी से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में चले जाते हैं और वहाँ केले खाते हैं। भालू अक्सर मनुष्य को नुकसान नहीं पहुँचाते, लेकिन ये काले भालू हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक जानवरों में से एक होते हैं। ये शाकाहारी होते हैं, लेकिन कई बार एक्सीडेंटली इनका मनुष्य से आमना-सामना हो जाता है और घायल मनुष्य को होना पड़ता है।

और शहद चाटने भालू नहीं आएगा, तो कौन आएगा? सामने एक-एक करके तीन भालू आए और छह बजे तक उस चट्टान पर शहद ही चाटते रहे। इनकी देखादेखी बंदर भी जा पहुँचे और नेवले भी और मोर भी और बटेर भी और अन्य पक्षी भी।

कुल मिलाकर भालू सेंचुरी में जाना वसूल हो गया।


Birdwatching in Karnataka

Nightingale Sighting in Karnataka

How to go Daroji Bear Sanctuary

Webler Sighting in Karnataka

Daroji Sanctuary Entry Fees





Hampi to Daroji Bear Sanctuary
वाच टावर

Watchtower in Daroji Bear Sanctuary

Bears in Daroji Bear Sanctuary

Bear Counting in Daroji Bear Sanctuary

Best Time for Daroji Bear Sanctuary

Daroji Bear Sanctuary Bus Timing

Animals in Daroji Bear Sanctuary

Safari Charge in Daroji Bear Sanctuary

Hotels in Daroji Bear Sanctuary

Bangalore to Daroji Bear Sanctuary Distance

Guide Charge for Daroji Bear Sanctuary
सेंचुरी के बाहर मिर्च की खेती

Sunset View in Daroji Bear Sanctuary


VIDEO












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Comments

  1. ज़ोरदार, क्या बात है, मान गये।

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