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माण्डवी बीच पर सूर्यास्त

इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें
शाम साढे पांच बजे हम तीनों माण्डवी पहुंच गये। सुमित और गिरधर पहले ही काफी लेट हो चुके हैं, इसलिये उन्हें इन्दौर के लिये आज ही निकलना पडेगा जबकि मेरा इरादा आज यहीं माण्डवी में रुकने का है। कुछ देर बाद सूर्यास्त हो जायेगा, फिर अन्धेरा हो जायेगा, इसलिये माण्डवी मैं कल देखूंगा- ऐसा सोचा।
सीधे समुद्र तट पर पहुंच गये। शहर में काफी भीड थी, लेकिन समुद्र तट अच्छा लगा। भूख लगी हो, आप कच्छ में हों और दाबेली न खायें, तो बेकार है। लेकिन हमने स्वयं को बेकार नहीं होने दिया। दबा के दाबेली खाईं।

फिर सूर्यास्त होने लगा। यहां से सूर्यास्त का शानदार नजारा दिखता है। हम पिछले कई दिनों से अलग-अलग स्थानों पर सूर्यास्त देखते आ रहे हैं- पहले काला डोंगर में, कल लखपत में। कच्छ और थार में सूर्यास्त देखने का अलग ही आनन्द है। कच्छ में हालांकि थोडी सी पहाडियां भी हैं लेकिन फिर भी दूर तक समतल जमीन और उसमें धंसता सूर्य। लेकिन यहां माण्डवी में सूर्य जमीन में नहीं धंसता बल्कि समुद्र में डूबता है। सूर्यास्त के अलावा यहां ऊंट-घोडे थे, बोटिंग थी और खूब सारा कच्छी व गुजराती खाना भी।
अन्धेरा हो गया तो हम लौट चले। कुछ देर होटल ढूंढा। वैसे तो माण्डवी में होटलों की कोई कमी नहीं है लेकिन मेरा सारा ध्यान रात में बाइक व भीड पर था, इसलिये सब नजरों से बचते चले गये और हम माण्डवी से बाहर निकल गये। सात बजे थे। अब पहली बार मन ने गणना की। भचाऊ यहां से 100 किलोमीटर है। करीब तीन घण्टे लगेंगे। टंकी फुल कराई और प्रभु आहिर को फोन कर दिया कि दस बजे तक भचाऊ आ जाऊंगा।
गूगल मैप में रास्ता देखा तो माण्डवी से मुन्द्रा वाला रास्ता ठीक लगा। पूछताछ की तो सभी ने इस रास्ते पर जाने से मना कर दिया कि जंगल का रास्ता है। रात को उधर से कोई नहीं जाता और जंगली जानवर परेशानी पैदा कर सकते हैं खासकर नीलगाय। इसके अलावा थोडे लम्बे लेकिन सुविधाजनक रास्ते का ही सुझाव मिला।
माण्डवी से आठ-दस किलोमीटर भुज की तरफ चले, फिर दाहिने मुड गये। सडक दो लेन की है, लेकिन बीच में डिवाइडर नहीं है इसलिये रात में काफी परेशानी हुई। इससे भी ज्यादा परेशानी तो तब हुई जब मुन्द्रा से आने वाली सडक भी मिल गई। इसके चौडीकरण का काम चल रहा है। फिर मुन्द्रा पोर्ट के ट्रकों की भारी भीड और धूल। दस बजे अंजार पहुंच सके। प्रभु को बताया कि अंजार पहुंच गये हैं। जैसा माण्डवी में सोचा था, वैसा ही रास्ता मिलता तो कभी के भचाऊ पहुंच जाते। लेकिन अभी भी घण्टा भर और लगेगा। राहत तब मिली जब गांधीधाम से आने वाली सडक मिली। यह सडक छह लेन की है। ग्यारह बजे भचाऊ पहुंचे।
फ्लाईओवर के नीचे हम तीनों रुके। घुप्प अन्धेरा था। कई दिनों से हम साथ थे इसलिये बडा लगाव हो गया था। उनके पास समय होता तो वे भी कल धोलावीरा जाते। कुछ खर्चा था, जो हम तीनों ने समयानुकूल किया था। उसका हिसाब लगाया और जिसका जो भी लेन-देन बनता था, सब पूरा किया। ‘फिर मिलेंगे’ कहकर विदा ली। उन्हें कल ही इन्दौर पहुंचना है। इसलिये पूरी रात बाइक चलानी पडेगी। बाद में पता चला कि उन्होंने रात में तो बाइक चलाई ही, पूरे दिन भी चले और शाम चार बजे इन्दौर पहुंचे। अच्छा था कि उनके पास बुलेट थी और दोनों अच्छी तरह चलाना जानते थे। अन्यथा लगातार इतने लम्बे समय तक एक के बसकी बात नहीं थी।
उधर प्रभु आहिर भी जगे हुए, उनके बच्चे भी जगे हुए थे। जाते ही गर्म पानी मिला। थकान थी, नहाते ही सब दूर हो गई। खाना खाया और सुबह उठने की कोई समयसीमा तय न करते हुए सो गया।


















अगला भाग: धोलावीरा- सिन्धु घाटी सभ्यता का एक नगर


कच्छ मोटरसाइकिल यात्रा
1. कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा
2. कच्छ यात्रा- जयपुर से अहमदाबाद
3. कच्छ की ओर- अहमदाबाद से भुज
4. भुज शहर के दर्शनीय स्थल
5. सफेद रन
6. काला डोंगर
7. इण्डिया ब्रिज, कच्छ
8. फॉसिल पार्क, कच्छ
9. थान मठ, कच्छ
10. लखपत में सूर्यास्त और गुरुद्वारा
11. लखपत-2
12. कोटेश्वर महादेव और नारायण सरोवर
13. पिंगलेश्वर महादेव और समुद्र तट
14. माण्डवी बीच पर सूर्यास्त
15. धोलावीरा- सिन्धु घाटी सभ्यता का एक नगर
16. धोलावीरा-2
17. कच्छ से दिल्ली वापस
18. कच्छ यात्रा का कुल खर्च




Comments

  1. सूर्यास्त का शानदार नज़ारा /
    नीरज साहब जब सूर्यास्त पिक्चर में इतना शानदार दिख रहा है तब साक्षात कैसा लग रहा होगा।
    धन्यवाद!

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    1. हां जी, साक्षात भी बडा ही जोरदार दिख रहा था।

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  2. shandar photo bhai hamari jaankari
    to do

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    Replies
    1. आपकी जानकारी.... कौन सी जानकारी????

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  3. एक बार मै भी यहाँ गया हूँ बहुत ही उम्दा अनुभव रहा

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  4. sunset के फ़ोटो बहुत शानदार आये है।
    इंदौर के मित्रों के दर्शन नही कराया आपने नीरज भाई
    All the best for next.

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    Replies
    1. इन्दौर के मित्रों के फोटो पिछली पोस्टों में यदा-कदा आये हैं।

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  5. सूर्यास्त अति सुन्दर..ऐसे फोटो तो बस वॉलपेपर ही देखे थे

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  6. 'धोलावीरा' विवरण का इंतजार रहेगा .......... हडप्पा और मोंहेंजोदाडो स्थल पाकिस्तान मै जाने से (विभाजन के बाद )..... 'धोलावीरा' ------- ही सिंधु सभ्यता जानने की अच्छी कडी रही है ........

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    Replies
    1. हां, सर जी, बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। जल्द ही धोलावीरा का वृत्तान्त भी प्रकाशित होगा।

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  7. जाटराम जीन्दाबाद

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  8. सूर्यास्त का इतना शानदार नजारा बहुत कम देखने को मिलता है।

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  9. सूर्यास्त के नजारों की बेहतरीन चित्रकारी आपके द्वारा की गयी है इसके लिए बधाई....। आगे के लेखों और सुन्दर छाया चित्रों का इन्तजार रहेगा ।

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  10. बहुत ही सुंदर एवं सजीव वर्णन .......... पढ़कर लग रहा है मानों हम भी वहां हो आए हो। सुंदर फोटोग्राफी भी कमाल की है।

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