Skip to main content

कच्छ यात्रा का कुल खर्च

इस यात्रा का वृत्तान्त पढने के लिये यहां क्लिक करें
12 जनवरी 2015 की सुबह दिल्ली से निकल पडा था। पहले दिन बाइक में 700 रुपये का पेट्रोल भरवाया। घर से खाकर चला था, दोपहर को नीमराना अशोक भाई के यहां खा लिया और शाम को पहुंच गया विधान के यहां। इस तरह इस दिन कोई खर्च नहीं हुआ। अब चर्चा करते हैं इस यात्रा के कुल खर्च की:

12 जनवरी:
पेट्रोल (दिल्ली) 700 रुपये

13 जनवरी:
पेट्रोल (दूदू) 500 रुपये
आलू के परांठे (नसीराबाद) 50 रुपये
चाय (विजयनगर) 10 रुपये
आलू के परांठे (सांवरियाजी) 70 रुपये
कमरा (उदयपुर) 500 रुपये
डिनर (उदयपुर) 50 रुपये

14 जनवरी:
पेट्रोल (टीबी) 500 रुपये
चाय-बिस्कुट (ऋषभदेव) 15 रुपये
रात को अहमदाबाद में अमित गौडा के यहां रुका।

15 जनवरी:
पेट्रोल (ध्रांगध्रा) 390 रुपये
आलू के परांठे (ध्रांगध्रा) 40 रुपये
कमरा (भुज) 300 रुपये
आज लंच भचाऊ में प्रभु आहिर के यहां किया।

16 जनवरी:
आलू पूरी (भुज) 25 रुपये
आईना महल प्रवेश शुल्क (भुज) 20 रुपये
आईना महल कैमरा शुल्क (भुज) 50 रुपये
प्रागमहल प्रवेश शुल्क (भुज) 20 रुपये
प्रागमहल कैमरा शुल्क (भुज) 50 रुपये
चाय समोसे (भिरंडीयाला) 30 रुपये
केले (भिरंडीयाला) 40 रुपये
सफेद रन का परमिट (भिरंडीयाला) 125 रुपये (इसमें 100 रुपये प्रवेश शुल्क है और 25 रुपये बाइक का शुल्क)
कमरा (काला डोंगर) 100 रुपये (वैसे तो कमरा 300 रुपये का था लेकिन इन्दौर के गिरधर और सुमित मिल गये। तीनों ने कमरा शेयर कर लिया।

17 जनवरी:
दाबेली (खावडा) 84 रुपये (पता नहीं दाबेली कितने की थी लेकिन मैंने तीनों के पैसे दिये। बाद में कहीं उन्होंने खर्च कर दिये जिसे मैंने अपने खर्च में शामिल नहीं किया।)
पेट्रोल (खावडा) 450 रुपये
रात लखपत गुरुद्वारे में रुके।

18 जनवरी:
गुरुद्वारा (लखपत) 200 रुपये
टॉफी (पिंगलेश्वर) 15 रुपये
पेट्रोल (माण्डवी) 490 रुपये
रात भचाऊ में प्रभु आहिर के यहां रुका।

19 जनवरी:
खाना (धोलावीरा) 50 रुपये
कमरा (रापर) 300 रुपये
डिनर (रापर) 50 रुपये

20 जनवरी:
पेट्रोल (अदेसर) 380 रुपये
आलू के परांठे (अदेसर) 45 रुपये
आलू के परांठे (करोटी) 66 रुपये
कमरा (पाली) 300 रुपये
डिनर (पाली) 150 रुपये

21 जनवरी:
चाय (पाली) 10 रुपये
पेट्रोल (ब्यावर) 600 रुपये
चाय (अजमेर) 12 रुपये
लंच (बगरू) 75 रुपये

इतना खर्च हुआ जी। इसमें 4010 रुपये का पेट्रोल डला और बाकी अन्य खर्च हुआ 2852 रुपये। इस तरह दिल्ली से दिल्ली तक इस यात्रा में कुल 6862 रुपये खर्च हुए।
नोट: यह पोस्ट यह दिखाने के लिये नहीं है कि मैंने कम खर्च किया या ज्यादा खर्च। यह केवल इसलिये है कि आप अगर कच्छ जाना चाहते हैं तो खर्च का आइडिया हो जाये।


कच्छ मोटरसाइकिल यात्रा
1. कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा
2. कच्छ यात्रा- जयपुर से अहमदाबाद
3. कच्छ की ओर- अहमदाबाद से भुज
4. भुज शहर के दर्शनीय स्थल
5. सफेद रन
6. काला डोंगर
7. इण्डिया ब्रिज, कच्छ
8. फॉसिल पार्क, कच्छ
9. थान मठ, कच्छ
10. लखपत में सूर्यास्त और गुरुद्वारा
11. लखपत-2
12. कोटेश्वर महादेव और नारायण सरोवर
13. पिंगलेश्वर महादेव और समुद्र तट
14. माण्डवी बीच पर सूर्यास्त
15. धोलावीरा- सिन्धु घाटी सभ्यता का एक नगर
16. धोलावीरा-2
17. कच्छ से दिल्ली वापस
18. कच्छ यात्रा का कुल खर्च




Comments

  1. bhai kahrcha to tikh thakh hai per day
    ka 686 ke hisab hu aa jayej kharch hai

    ReplyDelete
  2. Bhut bhadya jankari, neeraj bhai

    ReplyDelete
  3. भाई इस से बहुत हेल्प मिलती है हम लोगो को

    ReplyDelete
  4. कच्छ यात्रा के बारे में और व्यय भार देखकर लगता है इससे कम खर्च में इतना सुहावना सफर और कहाँ मिलेगा .. लेकिन भाई आप तो बाइक से निकल लेते हैं..यहाँ तो हमें घर-दफ्तर से ही फुर्सत नहीं मिलती .....
    मन में उत्सुकता जाग जाती हैं ऐसे सुन्दर प्राकृतिक देखकर ..लेकिन देख-पढ़ कर संतोष करना पड़ता है .. ..
    आलू के पराठे बहुत खाने को मिले ..है न ...

    ReplyDelete
  5. नीरज जी, 4010 में पेट्रोल कितनें लीटर आया और दिल्ली से दिल्ली बाइक कितने किलोमीटर चली। कहने का मतलब है ऑवर आल बाइक का एवरेज क्या रहा। धन्यवाद!

    ReplyDelete
  6. बहुत अच्छी जानकारी मिली है

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मेरी कुछ प्रमुख ऊँचाईयाँ

बहुत दिनों से इच्छा थी एक लिस्ट बनाने की कि मैं हिमालय में कितनी ऊँचाई तक कितनी बार गया हूँ। वैसे तो इस लिस्ट को जितना चाहे उतना बढ़ा सकते हैं, एक-एक गाँव को एक-एक स्थान को इसमें जोड़ा जा सकता है, लेकिन मैंने इसमें केवल चुनिंदा स्थान ही जोड़े हैं; जैसे कि दर्रे, झील, मंदिर और कुछ अन्य प्रमुख स्थान। 

ट्रेन में बाइक कैसे बुक करें?

अक्सर हमें ट्रेनों में बाइक की बुकिंग करने की आवश्यकता पड़ती है। इस बार मुझे भी पड़ी तो कुछ जानकारियाँ इंटरनेट के माध्यम से जुटायीं। पता चला कि टंकी एकदम खाली होनी चाहिये और बाइक पैक होनी चाहिये - अंग्रेजी में ‘गनी बैग’ कहते हैं और हिंदी में टाट। तो तमाम तरह की परेशानियों के बाद आज आख़िरकार मैं भी अपनी बाइक ट्रेन में बुक करने में सफल रहा। अपना अनुभव और जानकारी आपको भी शेयर कर रहा हूँ। हमारे सामने मुख्य परेशानी यही होती है कि हमें चीजों की जानकारी नहीं होती। ट्रेनों में दो तरह से बाइक बुक की जा सकती है: लगेज के तौर पर और पार्सल के तौर पर। पहले बात करते हैं लगेज के तौर पर बाइक बुक करने का क्या प्रोसीजर है। इसमें आपके पास ट्रेन का आरक्षित टिकट होना चाहिये। यदि आपने रेलवे काउंटर से टिकट लिया है, तब तो वेटिंग टिकट भी चल जायेगा। और अगर आपके पास ऑनलाइन टिकट है, तब या तो कन्फर्म टिकट होना चाहिये या आर.ए.सी.। यानी जब आप स्वयं यात्रा कर रहे हों, और बाइक भी उसी ट्रेन में ले जाना चाहते हों, तो आरक्षित टिकट तो होना ही चाहिये। इसके अलावा बाइक की आर.सी. व आपका कोई पहचान-पत्र भी ज़रूरी है। मतलब

पुस्तक-चर्चा: चुटकी भर नमक, मीलों लंबी बागड़

पुस्तक मेले में घूमते हुए एक पुस्तक दिखायी पड़ी - चुटकी भर नमक, मीलों लंबी बागड़। कवर पेज पर भारत का पुराना-सा नक्शा भी छपा था, तो जिज्ञासावश उठाकर देखने लगा। और खरीद भी ली। ब्रिटिश राज में नमक पर कर लगा करता था। बंगाल रेजीडेंसी में यह सर्वाधिक था - साल में आम जनता की लगभग दो महीने की आमदनी के बराबर। तो बंबई रेजीडेंसी व राजपूताना की तरफ से इसकी तस्करी होने लगी। इस तस्करी को रोकने के लिये अंग्रेजों ने 1500 मील अर्थात 2400 किलोमीटर लंबी एक बाड़ बनवायी। यह बाड़ इतनी जबरदस्त थी कि कोई इंसान, जानवर इसे पार नहीं कर सकता था। यह बाड़ मिट्टी और कँटीली झाड़ियों की बनायी गयी। बीच-बीच में द्वार बने थे। केवल द्वारों से होकर ही इसे पार करना होता था - वो भी सघन तलाशी के बाद।