Skip to main content

फोटो-यात्रा-12: एवरेस्ट बेस कैंप - डोले से फंगा

इस यात्रा के फोटो आरंभ से देखने के लिये यहाँ क्लिक करें।
22 मई 2016
“याकों के बारे में मैंने कहीं पढ़ा था कि ये आक्रामक होते हैं और इन्हें कभी भी पूरा पालतू नहीं बनाया जा सकता। बस, तभी से इनसे डर लगने लगा था। लेकिन ये याक भी हमारी ही तरह थे। शायद इन्होंने भी कहीं भूलचूक से पढ़ लिया होगा - “दो पैरों पर चलने वाला, अपने शरीर को ढककर रखने वाला जानवर, जो हमेशा अपनी पीठ पर बोझा उठाये घूमता रहता है - पता नहीं कहाँ से आता है, कहाँ जाता है - बहुत ख़तरनाक होता है। अपने से कई गुने बड़े हम याकों को खूंटे से बाँधकर रखता है, पालतू बना लेता है, बोझा ढुलवाता है और दूध भी निकाल लेता है। इनसे जितना बच सको, बचना चाहिये।”
इसी पढ़ाई-लिखाई का नतीज़ा था कि ये हमसे दूर ही दूर रहे। हम पगडंडी पर इनके नज़दीक पहुँचते, तो ये बछड़ों समेत दूर भाग जाते।”





एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक पर आधारित मेरी किताब ‘हमसफ़र एवरेस्ट’ का एक अंश। किताब तो आपने पढ़ ही ली होगी, अब आज की यात्रा के फोटो देखिये:



डोले में इसी होटल में हम रुके थे - फ्री में।



इस पूरी घाटी में थमसेरकू का राज चलता है

थमसेरकू के साये में डोले गाँव







डोले से गोक्यो की ओर जाता रास्ता











लुज़ा गाँव



लुज़ा गाँव



माछेरमा गाँव










फंगा




फंगा में यहीं रुके थे।











अगला भाग: फोटो-यात्रा-13: एवरेस्ट बेस कैंप - फंगा से गोक्यो


1. फोटो-यात्रा-1: एवरेस्ट बेस कैंप - दिल्ली से नेपाल
2. फोटो-यात्रा-2: एवरेस्ट बेस कैंप - काठमांडू आगमन
3. फोटो-यात्रा-3: एवरेस्ट बेस कैंप - पशुपति दर्शन और आगे प्रस्थान
4. फोटो-यात्रा-4: एवरेस्ट बेस कैंप - दुम्जा से फाफलू
5. फोटो-यात्रा-5: एवरेस्ट बेस कैंप - फाफलू से ताकशिंदो-ला
6. फोटो-यात्रा-6: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से जुभिंग
7. फोटो-यात्रा-7: एवरेस्ट बेस कैंप - जुभिंग से बुपसा
8. फोटो-यात्रा-8: एवरेस्ट बेस कैंप - बुपसा से सुरके
9. फोटो-यात्रा-9: एवरेस्ट बेस कैंप - सुरके से फाकडिंग
10. फोटो-यात्रा-10: एवरेस्ट बेस कैंप - फाकडिंग से नामचे बाज़ार
11. फोटो-यात्रा-11: एवरेस्ट बेस कैंप - नामचे बाज़ार से डोले
12. फोटो-यात्रा-12: एवरेस्ट बेस कैंप - डोले से फंगा
13. फोटो-यात्रा-13: एवरेस्ट बेस कैंप - फंगा से गोक्यो
14. फोटो-यात्रा-14: गोक्यो और गोक्यो-री
15. फोटो-यात्रा-15: एवरेस्ट बेस कैंप - गोक्यो से थंगनाग
16. फोटो-यात्रा-16: एवरेस्ट बेस कैंप - थंगनाग से ज़ोंगला
17. फोटो-यात्रा-17: एवरेस्ट बेस कैंप - ज़ोंगला से गोरकक्षेप
18. फोटो-यात्रा-18: एवरेस्ट के चरणों में
19. फोटो-यात्रा-19: एवरेस्ट बेस कैंप - थुकला से नामचे बाज़ार
20. फोटो-यात्रा-20: एवरेस्ट बेस कैंप - नामचे बाज़ार से खारी-ला
21. फोटो-यात्रा-21: एवरेस्ट बेस कैंप - खारी-ला से ताकशिंदो-ला
22. फोटो-यात्रा-22: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से भारत
23. भारत प्रवेश के बाद: बॉर्डर से दिल्ली




Comments

  1. पढ़ा तो है किताब में लेकिन फोटो बहुत जबरदस्त हैं। ऐसी जगहों को देखकर मुर्दा भी सांस लेने लग जाएगा !!

    ReplyDelete
  2. लुजा गांव में एक प्लाट ले लिया क्या

    ReplyDelete
  3. bahut hi interesting hai story and phuto niraj ji,, waiting for section 13

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

आज ब्लॉग दस साल का हो गया

साल 2003... उम्र 15 वर्ष... जून की एक शाम... मैं अखबार में अपना रोल नंबर ढूँढ़ रहा था... आज रिजल्ट स्पेशल अखबार में दसवीं का रिजल्ट आया था... उसी एक अखबार में अपना रिजल्ट देखने वालों की भारी भीड़ थी और मैं भी उस भीड़ का हिस्सा था... मैं पढ़ने में अच्छा था और फेल होने का कोई कारण नहीं था... लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से लगने लगा था कि अगर फेल हो ही गया तो?... तो दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका नहीं मिलेगा... घर की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि मुझे दसवीं करने का एक और मौका दिया जाता... निश्चित रूप से कहीं मजदूरी में लगा दिया जाता और फिर वही हमेशा के लिए मेरी नियति बन जाने वाली थी... जैसे ही अखबार मेरे हाथ में आया, तो पिताजी पीछे खड़े थे... मेरा रोल नंबर मुझसे अच्छी तरह उन्हें पता था और उनकी नजरें बारीक-बारीक अक्षरों में लिखे पूरे जिले के लाखों रोल नंबरों में से उस एक रोल नंबर को मुझसे पहले देख लेने में सक्षम थीं... और उस समय मैं भगवान से मना रहा था... हे भगवान! भले ही थर्ड डिवीजन दे देना, लेकिन पास कर देना... फेल होने की दशा में मुझे किस दिशा में भागना था और घर से कितने समय के लिए गायब रहना था, ...

आसमानी बिजली के कुछ फोटो

बरसात में जब बिजली चमकती है तो सेकंड के सौवें हिस्से में सबकुछ हो जाता है। पता नहीं लोगबाग इतनी फुर्ती से इनके फोटो कैसे खींच लेते हैं? मैंने भी कोशिश की लेकिन जब तक क्लिक करता, तब तक दो सेकंड बीत जाते। कडकती बिजली के लिये तो दो सेकंड बहुत ज्यादा होते हैं। मुझे हमेशा अन्धेरी रात ही दिखाई देती। इलाज निकला। कैमरे को ट्राइपॉड पर वीडियो मोड में लगाकर छोड दिया और अन्दर जाकर डिनर करने लगा। वापस आया तो करीब बीस मिनट की वीडियो हाथ लग चुकी थी। इसमें बहुत बढिया बिजली कडकती व गिरती भी कैद हो गई। दो-तीन बार ऐसा किया। आखिरकार उन वीडियो से कुछ फोटो हाथ लगे हैं, क्वालिटी बेशक उतनी अच्छी नहीं है लेकिन बिजली अच्छी लग रही है।

लद्दाख साइकिल यात्रा का आगाज़

दृश्य एक: ‘‘हेलो, यू आर फ्रॉम?” “दिल्ली।” “व्हेयर आर यू गोइंग?” “लद्दाख।” “ओ माई गॉड़! बाइ साइकिल?” “मैं बहुत अच्छी हिंदी बोल सकता हूँ। अगर आप भी हिंदी में बोल सकते हैं तो मुझसे हिन्दी में बात कीजिये। अगर आप हिंदी नहीं बोल सकते तो क्षमा कीजिये, मैं आपकी भाषा नहीं समझ सकता।” यह रोहतांग घूमने जा रहे कुछ आश्चर्यचकित पर्यटकों से बातचीत का अंश है। दृश्य दो: “भाई, रुकना जरा। हमें बड़े जोर की प्यास लगी है। यहाँ बर्फ़ तो बहुत है, लेकिन पानी नहीं है। अपनी परेशानी तो देखी जाये लेकिन बच्चों की परेशानी नहीं देखी जाती। तुम्हारे पास अगर पानी हो तो प्लीज़ दे दो। बस, एक-एक घूँट ही पीयेंगे।” “हाँ, मेरे पास एक बोतल पानी है। आप पूरी बोतल खाली कर दो। एक घूँट का कोई चक्कर नहीं है। आगे मुझे नीचे ही उतरना है, बहुत पानी मिलेगा रास्ते में। दस मिनट बाद ही दोबारा भर लूँगा।” यह रोहतांग पर बर्फ़ में मस्ती कर रहे एक बड़े-से परिवार से बातचीत के अंश हैं।