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फोटो-यात्रा-3: एवरेस्ट बेस कैंप - पशुपति दर्शन और आगे प्रस्थान

इस यात्रा के फोटो आरंभ से देखने के लिये यहाँ क्लिक करें
13 मई 2016
“मेरे मोबाइल में रेल की पटरियों का वॉलपेपर लगा था। होटल मालिक की निगाह पड़ गयी और उसने इसे अपनी पत्नी और बच्चों को दिखाया। फिर ट्रेनों के कुछ फोटो भी दिखाए। बोला - “इंडिया में ऐसी होती है रेल। एक के पीछे एक बहुत बड़ी-बड़ी बसें जुड़ी होती हैं और लोहे की सड़क पर सर्र से भागी चली जाती हैं। बिजली से भी चलती हैं।” सब बड़े गौर से देखते रहे। इनके लिये रेल बहुत दूर की चीज है। बच्चों ने नेपाली में अपने पिता से अनगिनत प्रश्न पूछे, उत्तर मैंने दिये। एक तो नेपाल में ही रेल न के बराबर है। उन्हें इस ‘आश्चर्य’ को देखने विदेश जाना पड़ता है। फिर उससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह थी कि इतने भारी-भरकम तामझाम को बिजली से कैसे चलाते हैं? जिस गाँव में बिजली ही नहीं है, जो गाँव दिन ढलने के बाद मात्र एक घंटे के लिये उजाला चाहता है, वहाँ के बच्चे कैसे समझ सकेंगे कि बिजली कितनी शक्तिशाली होती है?”




एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक पर आधारित मेरी किताब ‘हमसफ़र एवरेस्ट का एक अंश। किताब तो आपने पढ़ ही ली होगी, अब आज की यात्रा के फोटो देखिये:





ठमेल मार्किट की एक गली

सरदार जी का सत्कार रेस्टॉरेंट...

नेपाल में पनीर-भुज्जी के साथ आलू के पराँठे...





काठमांडू ऐसा ही है... आधुनिकता भी, परंपरा भी... और उलझा हुआ भी...



ठमेल में आलीशान होटल हैं...



नेपाल की सड़कों पर दिल्ली की बाइक...





काठमांडू से निकलते ही खाली सड़क मिलती है...


दुम्जा... जहाँ हम आज रात रुके...

दुम्जा में डिनर... दाल-भात, आलू की सब्जी, किसी घास की उलझाऊ-सी सब्जी जिसे ‘वेज’ कहते हैं... बाँस का अचार... और इसमें ‘फ्रेंच फ्राइज’ का होना सोने पे सुहागा था...







अगला भाग: फोटो-यात्रा-4: एवरेस्ट बेस कैंप - दुम्जा से फाफलू



1. फोटो-यात्रा-1: एवरेस्ट बेस कैंप - दिल्ली से नेपाल
2. फोटो-यात्रा-2: एवरेस्ट बेस कैंप - काठमांडू आगमन
3. फोटो-यात्रा-3: एवरेस्ट बेस कैंप - पशुपति दर्शन और आगे प्रस्थान
4. फोटो-यात्रा-4: एवरेस्ट बेस कैंप - दुम्जा से फाफलू
5. फोटो-यात्रा-5: एवरेस्ट बेस कैंप - फाफलू से ताकशिंदो-ला
6. फोटो-यात्रा-6: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से जुभिंग
7. फोटो-यात्रा-7: एवरेस्ट बेस कैंप - जुभिंग से बुपसा
8. फोटो-यात्रा-8: एवरेस्ट बेस कैंप - बुपसा से सुरके
9. फोटो-यात्रा-9: एवरेस्ट बेस कैंप - सुरके से फाकडिंग
10. फोटो-यात्रा-10: एवरेस्ट बेस कैंप - फाकडिंग से नामचे बाज़ार
11. फोटो-यात्रा-11: एवरेस्ट बेस कैंप - नामचे बाज़ार से डोले
12. फोटो-यात्रा-12: एवरेस्ट बेस कैंप - डोले से फंगा
13. फोटो-यात्रा-13: एवरेस्ट बेस कैंप - फंगा से गोक्यो
14. फोटो-यात्रा-14: गोक्यो और गोक्यो-री
15. फोटो-यात्रा-15: एवरेस्ट बेस कैंप - गोक्यो से थंगनाग
16. फोटो-यात्रा-16: एवरेस्ट बेस कैंप - थंगनाग से ज़ोंगला
17. फोटो-यात्रा-17: एवरेस्ट बेस कैंप - ज़ोंगला से गोरकक्षेप
18. फोटो-यात्रा-18: एवरेस्ट के चरणों में
19. फोटो-यात्रा-19: एवरेस्ट बेस कैंप - थुकला से नामचे बाज़ार
20. फोटो-यात्रा-20: एवरेस्ट बेस कैंप - नामचे बाज़ार से खारी-ला
21. फोटो-यात्रा-21: एवरेस्ट बेस कैंप - खारी-ला से ताकशिंदो-ला
22. फोटो-यात्रा-22: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से भारत
23. भारत प्रवेश के बाद: बॉर्डर से दिल्ली




Comments

  1. वाह ! शानदार ! अभी तो फोटोज़ का ट्रेलर आया है पिक्चर तो अभी बाकी है

    दाल भात के साथ mountain dew भी दिख रही है

    ReplyDelete

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आसमानी बिजली के कुछ फोटो

बरसात में जब बिजली चमकती है तो सेकंड के सौवें हिस्से में सबकुछ हो जाता है। पता नहीं लोगबाग इतनी फुर्ती से इनके फोटो कैसे खींच लेते हैं? मैंने भी कोशिश की लेकिन जब तक क्लिक करता, तब तक दो सेकंड बीत जाते। कडकती बिजली के लिये तो दो सेकंड बहुत ज्यादा होते हैं। मुझे हमेशा अन्धेरी रात ही दिखाई देती। इलाज निकला। कैमरे को ट्राइपॉड पर वीडियो मोड में लगाकर छोड दिया और अन्दर जाकर डिनर करने लगा। वापस आया तो करीब बीस मिनट की वीडियो हाथ लग चुकी थी। इसमें बहुत बढिया बिजली कडकती व गिरती भी कैद हो गई। दो-तीन बार ऐसा किया। आखिरकार उन वीडियो से कुछ फोटो हाथ लगे हैं, क्वालिटी बेशक उतनी अच्छी नहीं है लेकिन बिजली अच्छी लग रही है।

डायरी के पन्ने- 5

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भंगायणी माता मन्दिर, हरिपुरधार

इस यात्रा-वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें । 10 मई 2014 हरिपुरधार के बारे में सबसे पहले दैनिक जागरण के यात्रा पृष्ठ पर पढा था। तभी से यहां जाने की प्रबल इच्छा थी। आज जब मैं तराहां में था और मुझे नोहराधार व कहीं भी जाने के लिये हरिपुरधार होकर ही जाना पडेगा तो वो इच्छा फिर जाग उठी। सोच लिया कि कुछ समय के लिये यहां जरूर उतरूंगा। तराहां से हरिपुरधार की दूरी 21 किलोमीटर है। यहां देखने के लिये मुख्य एक ही स्थान है- भंगायणी माता का मन्दिर जो हरिपुरधार से दो किलोमीटर पहले है। बस ने ठीक मन्दिर के सामने उतार दिया। कुछ और यात्री भी यहां उतरे। कंडक्टर ने मुझे एक रुपया दिया कि ये लो, मेरी तरफ से मन्दिर में चढा देना। इससे पता चलता है कि माता का यहां कितना प्रभाव है।