Monday, February 12, 2018

फोटो-यात्रा-3: एवरेस्ट बेस कैंप - पशुपति दर्शन और आगे प्रस्थान

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13 मई 2016
“मेरे मोबाइल में रेल की पटरियों का वॉलपेपर लगा था। होटल मालिक की निगाह पड़ गयी और उसने इसे अपनी पत्नी और बच्चों को दिखाया। फिर ट्रेनों के कुछ फोटो भी दिखाए। बोला - “इंडिया में ऐसी होती है रेल। एक के पीछे एक बहुत बड़ी-बड़ी बसें जुड़ी होती हैं और लोहे की सड़क पर सर्र से भागी चली जाती हैं। बिजली से भी चलती हैं।” सब बड़े गौर से देखते रहे। इनके लिये रेल बहुत दूर की चीज है। बच्चों ने नेपाली में अपने पिता से अनगिनत प्रश्न पूछे, उत्तर मैंने दिये। एक तो नेपाल में ही रेल न के बराबर है। उन्हें इस ‘आश्चर्य’ को देखने विदेश जाना पड़ता है। फिर उससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह थी कि इतने भारी-भरकम तामझाम को बिजली से कैसे चलाते हैं? जिस गाँव में बिजली ही नहीं है, जो गाँव दिन ढलने के बाद मात्र एक घंटे के लिये उजाला चाहता है, वहाँ के बच्चे कैसे समझ सकेंगे कि बिजली कितनी शक्तिशाली होती है?”
एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक पर आधारित मेरी किताब हमसफ़र एवरेस्ट का एक अंश। किताब तो आपने पढ़ ही ली होगी, अब आज की यात्रा के फोटो देखिये:





ठमेल मार्किट की एक गली

सरदार जी का सत्कार रेस्टॉरेंट...

नेपाल में पनीर-भुज्जी के साथ आलू के पराँठे...


काठमांडू ऐसा ही है... आधुनिकता भी, परंपरा भी... और उलझा हुआ भी...



ठमेल में आलीशान होटल हैं...



नेपाल की सड़कों पर दिल्ली की बाइक...


काठमांडू से निकलते ही खाली सड़क मिलती है...


दुम्जा... जहाँ हम आज रात रुके...

दुम्जा में डिनर... दाल-भात, आलू की सब्जी, किसी घास की उलझाऊ-सी सब्जी जिसे ‘वेज’ कहते हैं... बाँस का अचार... और इसमें ‘फ्रेंच फ्राइज’ का होना सोने पे सुहागा था...

अगला भाग: फोटो-यात्रा-4: एवरेस्ट बेस कैंप - दुम्जा से फाफलू



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