Thursday, April 5, 2018

फोटो-यात्रा-17: एवरेस्ट बेस कैंप - ज़ोंगला से गोरकक्षेप

इस यात्रा के फोटो आरंभ से देखने के लिये यहाँ क्लिक करें
27 मई 2016
“या तो गंगोत्री के पास तपोवन के बराबर में शिवलिंग चोटी ने मुझे इतना सम्मोहित किया था, या फिर आज आमा डबलम ने किया। ये आगे-पीछे दो चोटियाँ हैं। आगे वाली कुछ छोटी है और पीछे वाली ज्यादा ऊँची है। ऐसा लगता कि आमा ने - अम्मा ने - अपनी बेटी को गोद में बैठा रखा हो। आमा डबलम का मतलब क्या होता है? किसी ने कहा - अम्मा का आभूषण, तो किसी ने कहा - डबल अम्मा यानी दो माताएँ। मतलब कुछ भी हो, आमा डबलम ही एवरेस्ट क्षेत्र का आभूषण है।”
“आश्चर्यजनक रूप से गोरकक्षेप में हमें छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा दिखायी पड़ी। इसे पुणे की ‘गिरीप्रेमी’ संस्था ने 2012 में लगाया था। यहाँ इतनी दूर विदेश में, जहाँ से चीन की सीमा केवल चार हवाई किलोमीटर दूर थी, शिवाजी महाराज की प्रतिमा को देखकर लगा जैसे कोई अपना मिल गया हो। इसके लिये पुणे की यह संस्था वास्तव में बधाई की पात्र है। शायद ही कोई नेपाली या अन्य विदेशी ट्रैकर्स शिवाजी महाराज के बारे में जानते हों, लेकिन भारत का बच्चा-बच्चा इसी नाम से अपने लिखने-पढ़ने की शुरूआत करता है।”

एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक पर आधारित मेरी किताब हमसफ़र एवरेस्ट का एक अंश। किताब तो आपने पढ़ ही ली होगी, अब आज की यात्रा के फोटो देखिये:




ज़ोंगला चोला-चे चोटी के एकदम नीचे स्थित है।

और आमा डबलम की तो बात ही अलग है।



यह चो-ला ग्लेशियर है, जो हमने कल पार किया था। दूर चो-ला दर्रा (शायद) भी दिख रहा है।

अगर आसपास कहीं एवरेस्ट न होती, तो इस किताब का नाम ‘आमा डबलम’ ही होता। आप सोचते कि अजीब नाम है, लेखक पागल हो गया है।



यह पुमो-री है।

पुमो-री से आमा डबलम तक का दृश्य। बीचोंबीच नुपसे आ गयी, अन्यथा एवरेस्ट भी दिखती।

लोबुचे


ऊपर तक याकों की कतार दिख रही है।

दूसरी तरफ के पहाड़ों पर लटका एक ग्लेशियर

खुंबू ग्लेशियर



और वो रहा खुंबू ग्लेशियर के एकदम किनारे बसा हुआ गोरकक्षेप

गोरकक्षेप में मेन्यू कार्ड

गोरकक्षेप ही इस ट्रैक का सबसे महंगा स्थान है।







अगला भाग: फोटो-यात्रा-18: एवरेस्ट बेस कैंप - एवरेस्ट के चरणों में

No comments:

Post a Comment