Monday, April 9, 2018

फोटो-यात्रा-18: एवरेस्ट के चरणों में

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28 मई 2016
“हम मानसिक और शारीरिक रूप से इतने थक चुके थे कि 5500 मीटर चढ़ने के लिये - अपना एक रिकार्ड़ बनाने के लिये - हम काला पत्थर नहीं जाने वाले थे। यदि मौसम साफ़ होता, तो एवरेस्ट देखने के लालच में जा भी सकते थे, लेकिन ऊँचाई के लालच में कभी नहीं जायेंगे।”
“मेरी शिखर पर चढ़ने की कभी इच्छा नहीं होती। बेसकैंप तक आने की इच्छा थी और आज बेसकैंप मेरे सामने था।”
“बेसकैंप से लौटते समय एक कसक भी थी कि एवरेस्ट के दर्शन नहीं हुए। लेकिन आभास भी हो रहा था कि वह हमें देख रही है और हम उसके साये में चल रहे हैं।”
“सोने से पहले आज के दिन के बारे में सोचने लगे। निःसंदेह आज का दिन हमारी ज़िंदगी का एक अहम दिन था। जिस ट्रैक पर जाने की इच्छा सभी ट्रैकर्स करते हैं, आज हमने उसी ट्रैक को पूरा कर लिया था।
एवरेस्ट बेस कैंप। हालाँकि प्रत्येक पर्वत का एक बेसकैंप होता है, लेकिन अगर कहीं दो ट्रैकर्स खड़े ‘बेसकैंप’ का ज़िक्र कर रहे हों, तो समझ लेना कि एवरेस्ट बेसकैंप की ही चर्चा चल रही होगी।”

एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक पर आधारित मेरी किताब हमसफ़र एवरेस्ट का एक अंश। किताब तो आपने पढ़ ही ली होगी, अब आज की यात्रा के फोटो देखिये:




गोरकक्षेप से बेसकैंप की ओर, खुंबू ग्लेशियर के साथ-साथ

खुंबू ग्लेशियर के ऊपर खुंबू आइसफॉल है, जहाँ से होकर एवरेस्ट शिखर का रास्ता जाता है।

यहाँ खुंबू ग्लेशियर के अलावा भी बहुत सारे ग्लेशियर हैं और खतरनाक तरीके से आसमान में लटके हुए हैं।

इतनी ऊँचाई पर हाई एल्टीट्यूड सिकनेस होनी ही है।

खुंबू ग्लेशियर


एवरेस्ट बेसकैंप पर बहुत सारे तंबू लगे थे, जो एवरेस्ट शिखर पर जाने वाले पर्वतारोहियों के थे।

खुंबू आइसफॉल का ज़ूम करके लिया गया फोटो। इसमें आलपिन की नोक के बराबर स्थान की कल्पना कीजिये - आदमी इसमें उतना ही बड़ा दिखेगा। और इसी से होकर एवरेस्ट शिखर जाया जाता है।




ऊपर बाएँ कोने में झंडियाँ ही एवरेस्ट बेसकैंप है...

खुंबू ग्लेशियर पर

एवरेस्ट बेसकैंप पर शूटिंग करता चीनी दल


पर्वतारोहियों के तंबू

खुंबू आइसफॉल का ज़ूम करके लिया गया फोटो।

खुंबू आइसफॉल का ज़ूम करके लिया गया फोटो। इसमें आदमी की हैसियत आलपिन की नोक के बराबर है। और इधर से एवरेस्ट जाने वाले प्रत्येक पर्वतारोही को यहीं से होकर जाना पड़ता है।





शेरपा लोग जानवरों से भी ज्यादा बोझ उठाते हैं।




तूफानी हवाओं के बीच इसे ले जाना बड़ा कठिन काम है।

वापसी का रास्ता

फ्राइड पोटैटो मोमो और उनकी चटनी

अलविदा गोरकक्षेप, अलविदा एवरेस्ट


गोरकक्षेप में शिवाजी महाराज की प्रतिमा


गोरक पक्षी

अलविदा गोरकक्षेप... और उसके उस तरफ ऊपर जाता काला पत्थर का रास्ता...




दूर दिखता थुकला, जहाँ हमें आज रुकना है।

थुकला में डिनर





अगला भाग: फोटो-यात्रा-19: एवरेस्ट बेस कैंप - थुकला से नामचे बाज़ार

3 comments:

  1. नयनाभिराम चित्र.. इतनी ऊंचाई व थकान के बाद भी तुम दोनो के मुस्कुराते चेहरे देख हैरानी हुई... लगे रहो मुन्ना भाई

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    1. पिछला भाग का लिंक भी अन्त में दे दिया करो.. ढूंढने में समय नष्ट ना होगा

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  2. बहुत सुन्दर!!! बहुत बड़ी उपलब्धी नीरजजी!!

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