Skip to main content

चल पडे करेरी की ओर

क्या चीज है हिमालय भी!! जितनी बार जाओ, उतना ही बुलाता है। मुझे इसकी गुफाएं और झीलें बहुत आकर्षित करती हैं। पिछली तीन यात्राओं- मदमहेश्वर, अल्मोडा और केदारनाथ के दौरान मैं उत्तराखण्ड में था तो इस बार हिमाचल का नम्बर लगना तय था। इसी नम्बर में करेरी झील आ गई।
करेरी झील कांगडा जिले में है। धौलाधार की बर्फीली पहाडियों पर समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर। जाडों में जम भी जाती होगी। गर्मियों में झील के आसपास बर्फ भी रहती है। मैक्लोडगंज से इसका पैदल रास्ता जाता है। बस, इतना ही सुना था मैंने इसके बारे में। जब से सुना था, इसे देखने की बडी इच्छा थी।
ब्लॉगिंग से पीएचडी कर रहे केवलराम भी धर्मशाला में ही रहते हैं। जब रोहतक ब्लॉगर सम्मेलन में उनसे मुक्कालात मतलब मुलाकात हुई तभी तय हो गया था कि करेरी झील तक केवल भी साथ देंगे। इस सफर में एक साथी और मिल गये- जयपुर के गप्पू जी। नाम तो इनका कुछ और ही होगा लेकिन सभी इन्हें गप्पू ही बुलाते हैं तो मैं भी गप्पू ही कहने लगा।
23 मई को सुबह नई दिल्ली से पौने सात बजे चलने वाली शाने पंजाब पकडकर पहले तो अम्बाला पहुंचे। फिर बस से चण्डीगढ और उससे आगे फिर बस बदलकर रात नौ बजे तक धर्मशाला। केवल राम के यहां दाडी में रुका गया। सुबह मैक्लोडगंज के लिये निकल पडे। हां, वादा करने के बाद भी केवलराम अपनी कुछ व्यस्तताओं की वजह से साथ नहीं जा सके।













सार्वजनिक बाथरूम


केवल और जाट


केवल के यहां से दिखतीं धौलाधार


असली यात्रा अब शुरू होती है।

अगला भाग: भागसू नाग और भागसू झरना, मैक्लोडगंज


करेरी झील यात्रा
1. चल पडे करेरी की ओर
2. भागसू नाग और भागसू झरना, मैक्लोडगंज
3. करेरी यात्रा- मैक्लोडगंज से नड्डी और गतडी
4. करेरी यात्रा- गतडी से करेरी गांव
5. करेरी गांव से झील तक
6. करेरी झील के जानलेवा दर्शन
7. करेरी झील की परिक्रमा
8. करेरी झील से वापसी
9. करेरी यात्रा का कुल खर्च- 4 दिन, 1247 रुपये
10. करेरी यात्रा पर गप्पू और पाठकों के विचार

Comments

  1. बाथरुम के फ़ोटो मत लगाया करो, लगाते हो तो वहां पर नहाया करो, आगे की यात्रा का इंतजार है,

    ReplyDelete
  2. केवल भाई के यहाँ आजकल मेहमानों का तांता लगा है...अभी ललित भाई गये और आप पहुँचे...


    चलिए, चलें आगे यात्रा पर.

    ReplyDelete
  3. दृश्य रुपहले, मन मौजी हम,
    राह मिले मित्रों की सरगम।

    ReplyDelete
  4. अगली कडी का इंतज़ार है

    ReplyDelete
  5. मुसाफिर जी,

    इतना कम लिखने से काम नहीं चलेगा....

    ReplyDelete
  6. अबके जब भी धर्मशाला जाउंगा तो केवल राम जी मिलने की कोशिश करूंगा. धर्मशाला मेरे घर से क़रीब दो घंटे की ड्राइव पर है.

    ReplyDelete
  7. करेरी झील...ये नाम पहली बार सुना...कितना कुछ है जिसके बारे में हम नहीं जानते और कितना कम है जिसे जान कर हम अभिमान करते हैं...केवल जी और गप्पू जी से मिल कर हार्दिक प्रसन्नता हुई...केवल जी का घर स्वर्ग जैसा है...कभी जायेंगे उनसे मिलने...
    नीरज

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर चित्र भाई, ओर विवरण भी सुंदर, अब तो लगता हे केवल भाई को एक कमरा ब्लागरो के लिये अलग से रखना पडेगा:) राम राम, अरे नीरज तुम नहाते भी हो या सिर्फ़ बाथरुम की फ़ोटो खींच कर काम चला लेते हो, ागली बार रोहतक आओगे तो पकड कर नहलायेगे:)

    ReplyDelete
  9. http://akelachana.blogspot.com/2011/06/blog-post_01.html

    lo ji padho

    ajit

    ReplyDelete
  10. दिल्ली से धर्म शाला जाना हो तो अम्बाला उतरने की बजाय जालंधर उतर के वहां से धर्मशाला के लिए direct बस लें ...ये route छोटा और फास्ट भी है ....जालंधर से धर्म शाला सिर्फ १४० किलोमीटर है ...
    अगले भाग का इंतज़ार है ...
    अजित

    ReplyDelete
  11. देर से आई हूँ पर हर पोस्ट पड़कर ही आगे चलूंगी ...मुझे केवल बाद मैं मिला वरना मैं भी उसके दर्शन कर आती ...ही ही ही

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

ट्रेन में बाइक कैसे बुक करें?

अक्सर हमें ट्रेनों में बाइक की बुकिंग करने की आवश्यकता पड़ती है। इस बार मुझे भी पड़ी तो कुछ जानकारियाँ इंटरनेट के माध्यम से जुटायीं। पता चला कि टंकी एकदम खाली होनी चाहिये और बाइक पैक होनी चाहिये - अंग्रेजी में ‘गनी बैग’ कहते हैं और हिंदी में टाट। तो तमाम तरह की परेशानियों के बाद आज आख़िरकार मैं भी अपनी बाइक ट्रेन में बुक करने में सफल रहा। अपना अनुभव और जानकारी आपको भी शेयर कर रहा हूँ। हमारे सामने मुख्य परेशानी यही होती है कि हमें चीजों की जानकारी नहीं होती। ट्रेनों में दो तरह से बाइक बुक की जा सकती है: लगेज के तौर पर और पार्सल के तौर पर। पहले बात करते हैं लगेज के तौर पर बाइक बुक करने का क्या प्रोसीजर है। इसमें आपके पास ट्रेन का आरक्षित टिकट होना चाहिये। यदि आपने रेलवे काउंटर से टिकट लिया है, तब तो वेटिंग टिकट भी चल जायेगा। और अगर आपके पास ऑनलाइन टिकट है, तब या तो कन्फर्म टिकट होना चाहिये या आर.ए.सी.। यानी जब आप स्वयं यात्रा कर रहे हों, और बाइक भी उसी ट्रेन में ले जाना चाहते हों, तो आरक्षित टिकट तो होना ही चाहिये। इसके अलावा बाइक की आर.सी. व आपका कोई पहचान-पत्र भी ज़रूरी है। मतलब

46 रेलवे स्टेशन हैं दिल्ली में

एक बार मैं गोरखपुर से लखनऊ जा रहा था। ट्रेन थी वैशाली एक्सप्रेस, जनरल डिब्बा। जाहिर है कि ज्यादातर यात्री बिहारी ही थे। उतनी भीड नहीं थी, जितनी अक्सर होती है। मैं ऊपर वाली बर्थ पर बैठ गया। नीचे कुछ यात्री बैठे थे जो दिल्ली जा रहे थे। ये लोग मजदूर थे और दिल्ली एयरपोर्ट के आसपास काम करते थे। इनके साथ कुछ ऐसे भी थे, जो दिल्ली जाकर मजदूर कम्पनी में नये नये भर्ती होने वाले थे। तभी एक ने पूछा कि दिल्ली में कितने रेलवे स्टेशन हैं। दूसरे ने कहा कि एक। तीसरा बोला कि नहीं, तीन हैं, नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और निजामुद्दीन। तभी चौथे की आवाज आई कि सराय रोहिल्ला भी तो है। यह बात करीब चार साढे चार साल पुरानी है, उस समय आनन्द विहार की पहचान नहीं थी। आनन्द विहार टर्मिनल तो बाद में बना। उनकी गिनती किसी तरह पांच तक पहुंच गई। इस गिनती को मैं आगे बढा सकता था लेकिन आदतन चुप रहा।

जाटराम की पहली पुस्तक: लद्दाख में पैदल यात्राएं

पुस्तक प्रकाशन की योजना तो काफी पहले से बनती आ रही थी लेकिन कुछ न कुछ समस्या आ ही जाती थी। सबसे बडी समस्या आती थी पैसों की। मैंने कई लेखकों से सुना था कि पुस्तक प्रकाशन में लगभग 25000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं और अगर कोई नया-नवेला है यानी पहली पुस्तक प्रकाशित करा रहा है तो प्रकाशक उसे कुछ भी रॉयल्टी नहीं देते। मैंने कईयों से पूछा कि अगर ऐसा है तो आपने क्यों छपवाई? तो उत्तर मिलता कि केवल इस तसल्ली के लिये कि हमारी भी एक पुस्तक है। फिर दिसम्बर 2015 में इस बारे में नई चीज पता चली- सेल्फ पब्लिकेशन। इसके बारे में और खोजबीन की तो पता चला कि यहां पुस्तक प्रकाशित हो सकती है। इसमें पुस्तक प्रकाशन का सारा नियन्त्रण लेखक का होता है। कई कम्पनियों के बारे में पता चला। सभी के अलग-अलग रेट थे। सबसे सस्ते रेट थे एजूक्रियेशन के- 10000 रुपये। दो चैप्टर सैम्पल भेज दिये और अगले ही दिन उन्होंने एप्रूव कर दिया कि आप अच्छा लिखते हो, अब पूरी पुस्तक भेजो। मैंने इनका सबसे सस्ता प्लान लिया था। इसमें एडिटिंग शामिल नहीं थी।