Skip to main content

रेलयात्रा सूची: 2019

2005-2007 | 2008 | 2009 | 2010 | 2011 | 2012 | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019

दिनांककहां से/कहां तकट्रेन नं/नामदूरी (कुल दूरी)श्रेणी (गेज)
09-01रंगापाड़ा नॉर्थ - साहिबाबाद22411 अरुणाचल एक्स1946 (174986)फर्स्ट एसी (ब्रॉड)
10-01साहिबाबाद - दिल्ली शाहदरा64052 ईएमयू7 (174993)साधारण (ब्रॉड)
06-02नई दिल्ली - मडगाँव12218 केरल संपर्क क्रांति2071 (177064)थर्ड एसी (ब्रॉड)

नोट: दूरी दो-चार किलोमीटर ऊपर-नीचे हो सकती है।
भूल चूक लेनी देनी

कुछ और तथ्य:
कुल यात्राएं: 891 बार
कुल दूरी: 177064 किलोमीटर

पैसेंजर ट्रेनों में: 48071 किलोमीटर (497 बार)
मेल/एक्सप्रेस में: 50618 किलोमीटर (255 बार)
सुपरफास्ट में: 78375 किलोमीटर (139 बार)

ब्रॉड गेज से: 170578 किलोमीटर (826 बार)
मीटर गेज से: 4027 किलोमीटर (31 बार)
नैरो गेज से: 2459 किलोमीटर (34 बार)

बिना आरक्षण के: 73293 किलोमीटर (733 बार)
शयनयान (SL) में: 79612 किलोमीटर (124 बार)
सेकंड सीटिंग (2S) में: 2592 किलोमीटर (9 बार)
थर्ड एसी (3A) में: 15378 किलोमीटर (17 बार)
एसी चेयरकार (CC) में: 1361 किलोमीटर (5 बार)
सेकंड एसी (2A) में: 2882 किलोमीटर (2 बार)
फर्स्ट एसी (1A) में: 1946 किलोमीटर (1 बार)



4000 किलोमीटर से ज्यादा: 1 बार
1000 से 3999 किलोमीटर तक: 28 बार
500 से 999 किलोमीटर तक:  47 बार
100 से 499 किलोमीटर तक: 329 बार
50 से 99 किलोमीटर तक (अर्द्धशतक): 283 बार

किस महीने में कितनी यात्रा
महीनापैसेंजरमेल/एक्ससुपरफास्टकुल योग
जनवरी17762069787911724
फरवरी47904697697616463
मार्च700539301054221477
अप्रैल2002295444919447
मई3053142446829159
जून1393162545337551
जुलाई42124669481313694
अगस्त8061137741801139846
सितम्बर47393072683514646
अक्टूबर60684784575816610
नवम्बर3098247518127385
दिसम्बर1874514520439062



Comments

Popular posts from this blog

डायरी के पन्ने- 30 (विवाह स्पेशल)

ध्यान दें: डायरी के पन्ने यात्रा-वृत्तान्त नहीं हैं। 1 फरवरी: इस बार पहले ही सोच रखा था कि डायरी के पन्ने दिनांक-वार लिखने हैं। इसका कारण था कि पिछले दिनों मैं अपनी पिछली डायरियां पढ रहा था। अच्छा लग रहा था जब मैं वे पुराने दिनांक-वार पन्ने पढने लगा। तो आज सुबह नाइट ड्यूटी करके आया। नींद ऐसी आ रही थी कि बिना कुछ खाये-पीये सो गया। मैं अक्सर नाइट ड्यूटी से आकर बिना कुछ खाये-पीये सो जाता हूं, ज्यादातर तो चाय पीकर सोता हूं।। खाली पेट मुझे बहुत अच्छी नींद आती है। शाम चार बजे उठा। पिताजी उस समय सो रहे थे, धीरज लैपटॉप में करंट अफेयर्स को अपनी कापी में नोट कर रहा था। तभी बढई आ गया। अलमारी में कुछ समस्या थी और कुछ खिडकियों की जाली गलकर टूटने लगी थी। मच्छर सीजन दस्तक दे रहा है, खिडकियों पर जाली ठीकठाक रहे तो अच्छा। बढई के आने पर खटपट सुनकर पिताजी भी उठ गये। सात बजे बढई वापस चला गया। थोडा सा काम और बचा है, उसे कल निपटायेगा। इसके बाद धीरज बाजार गया और बाकी सामान के साथ कुछ जलेबियां भी ले आया। मैंने धीरज से कहा कि दूध के साथ जलेबी खायेंगे। पिताजी से कहा तो उन्होंने मना कर दिया। यह मना करना मुझे ब...

चित्रकोट जलप्रपात- अथाह जलराशि

इस यात्रा-वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें । चित्रधारा से निकले तो सीधे चित्रकोट जाकर ही रुके। जगदलपुर से ही हम इन्द्रावती नदी के लगभग समान्तर चले आ रहे थे। चित्रकोट से करीब दो तीन किलोमीटर पहले से यह नदी दिखने भी लगती है। मानसून का शुरूआती चरण होने के बावजूद भी इसमें खूब पानी था। इस जलप्रपात को भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है। और वास्तव में है भी ऐसा ही। प्रामाणिक आंकडे तो मुझे नहीं पता लेकिन मानसून में इसकी चौडाई बहुत ज्यादा बढ जाती है। अभी मानसून ढंग से शुरू भी नहीं हुआ था और इसकी चौडाई और जलराशि देख-देखकर आंखें फटी जा रही थीं। हालांकि पानी बिल्कुल गन्दला था- बारिश के कारण। मोटरसाइकिल एक तरफ खडी की। सामने ही छत्तीसगढ पर्यटन का विश्रामगृह था। विश्रामगृह के ज्यादातर कमरों की खिडकियों से यह विशाल जलराशि करीब सौ फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती दिखती है। मोटरसाइकिल खडी करके हम प्रपात के पास चले गये। जितना पास जाते, उतने ही रोंगटे खडे होने लगते। कभी नहीं सोचा था कि इतना पानी भी कहीं गिर सकता है। जहां हम खडे थे, कुछ दिन बाद पानी यहां तक भी आ जायेगा और प्रपात की चौडाई और भी बढ ...

लद्दाख बाइक यात्रा-4 (बटोट-डोडा-किश्तवाड-पारना)

9 जून 2015 हम बटोट में थे। बटोट से एक रास्ता तो सीधे रामबन, बनिहाल होते हुए श्रीनगर जाता ही है, एक दूसरा रास्ता डोडा, किश्तवाड भी जाता है। किश्तवाड से सिंथन टॉप होते हुए एक सडक श्रीनगर भी गई है। बटोट से मुख्य रास्ते से श्रीनगर डल गेट लगभग 170 किलोमीटर है जबकि किश्तवाड होते हुए यह दूरी 315 किलोमीटर है। जम्मू क्षेत्र से कश्मीर जाने के लिये तीन रास्ते हैं- पहला तो यही मुख्य रास्ता जम्मू-श्रीनगर हाईवे, दूसरा है मुगल रोड और तीसरा है किश्तवाड-अनन्तनाग मार्ग। शुरू से ही मेरी इच्छा मुख्य राजमार्ग से जाने की नहीं थी। पहले योजना मुगल रोड से जाने की थी लेकिन कल हुए बुद्धि परिवर्तन से मुगल रोड का विकल्प समाप्त हो गया। कल हम बटोट आकर रुक गये। सोचने-विचारने के लिये पूरी रात थी। मुख्य राजमार्ग से जाने का फायदा यह था कि हम आज ही श्रीनगर पहुंच सकते हैं और उससे आगे सोनामार्ग तक भी जा सकते हैं। किश्तवाड वाले रास्ते से आज ही श्रीनगर नहीं पहुंचा जा सकता। अर्णव ने सुझाव दिया था कि बटोट से सुबह चार-पांच बजे निकल पडो ताकि ट्रैफिक बढने से पहले जवाहर सुरंग पार कर सको। अर्णव को भी हमने किश्तवाड के बारे में नहीं ...