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नील द्वीप: भरतपुर बीच और लक्ष्मणपुर बीच

20 जनवरी 2017
नैचुरल ब्रिज से पैदल मुख्य बाज़ार तक आने में थक गये। गर्मी भी थी और उमस भी। बाज़ार से भरतपुर बीच आधा किलोमीटर दूर है। पहुँच गये। लेटने की जगह मिल गयी और मैं सो गया।
नील द्वीप पर भरतपुर, सीतापुर, लक्ष्मणपुर और रामनगर सब बीच हैं।
मुझे समुद्र तटों का कोई अनुभव नहीं है। न ही यह पता कि फलाँ बीच ख़ूबसूरत है और फलाँ नहीं है। सभी तट एक-जैसे लगते हैं। मुझे न किसी बीच की विशेषता पता है और न ही वहाँ की ख़ूबियाँ। यही बात आपको इन यात्रा-वृत्तांतों में भी दिख रही होगी। अंडमान यात्रा को मैं पूरे अधिकार से नहीं लिख पा रहा हूँ। दिल पहाड़ों और ट्रेनों में ही बसता है ना।
दो घंटे सो लेने के बाद बड़ा अच्छा लगने लगा। यहाँ भीड़ नहीं थी, लेकिन चहल-पहल थी। कुछ दुकानें थीं, जहाँ केवल एजेंट लोग बैठे थे - समुद्री गतिविधियाँ कराने के लिये। बीच तो रेतीला और साफ़-सुथरा था, लेकिन आगे समुद्र में कोरल थे। इसलिये स्कूबा डाइविंग का अच्छा काम हो रहा था। हाई स्पीड़ वाटर स्कूटर वाला लड़कियों को सैर करा रहा था और तब तक समुद्र में कलाबाजियाँ कराता रहता, जब तक कि लड़की की चीख न निकल जाये।





हैवलॉक द्वीप का दक्षिणी सिरा यहाँ से काफ़ी नज़दीक दिखता है। आधा घंटा नाव की सवारी और आप हैवलॉक पहुँच जाओगे। हालाँकि वहाँ का मुख्य बाज़ार इसके उत्तरी सिरे पर है और नील से वहाँ जाने के लिये बोट से दो घंटे लग जाते हैं।
बराबर में नील जेट्टी है। जिस जहाज से हम पोर्ट ब्लेयर से यहाँ आये थे, वो हमें उतारकर हैवलॉक चला गया था। अब वह हैवलॉक से वापस यहाँ आया और आधे घंटे ठहरकर पोर्ट ब्लेयर रवाना हो गया।
चार बजे यहाँ से वापस चल दिये - लक्ष्मणपुर बीच के लिये। लेकिन एक भूल हो गयी। हमने सुबह जेट्टी के पास दूरियाँ लिखी देखी थीं। उसमें लक्ष्मणपुर बीच तीन किलोमीटर दूर लिखा हुआ था, लेकिन हम इसे भूल गये और मानने लगे कि लक्ष्मणपुर बीच केवल आधा किलोमीटर ही दूर है।
अंडमान में आपको जलेबियाँ छनती दिख जायें तो अविलंब उधर ही लपक लेना चाहिये। नारियल के खोल में छोटा-सा छेद करके इसी से वह जलेबियाँ छान रहा था। उसका यह तरीका पसंद आया।
जलेबी खाते-खाते लक्ष्मणपुर बीच की तरफ़ चल दिये। शाम के पाँच बज चुके थे। यहाँ सूर्यास्त जल्दी हो जाता है और हम सूर्यास्त ही देखना चाहते थे। लेकिन आधा किलोमीटर चले, एक किलोमीटर, और दो किलोमीटर भी आ गये - बीच नहीं आया। पता होता तो हम किसी ऑटो वाले को पकड़ते।
लक्ष्मणपुर बीच बेहद ख़ूबसूरत बीच है। मुझे अच्छा लगा। सूर्यास्त हो चुका था, आकाश में केवल आख़िरी लालिमा ही बची थी, वही हमने कैमरे में समेट ली। सूर्यास्त के बाद किसी को भी समुद्र में जाने की अनुमति नहीं थी, इसलिये नहा तो कोई नहीं रहा था, लेकिन सभी फोटो पर फोटो लिये जा रहे थे। एक ठूँठ पड़ा था। यात्रियों ने उसे तक नहीं छोड़ा। उस पर चढ़-चढ़ कर, इधर-उधर झुककर, ये टाँग उठाकर, वो हाथ फैलाकर; सब उसके हर एंगल से फोटो लिये जा रहे थे। बड़ी देर प्रतीक्षा करने के बाद, दो कप चाय पीने के बाद, एक प्लेट पकौड़ियाँ खाने के बाद दीप्ति का उस ठूँठ पर चढ़ने का नंबर आया। फिर मेरा भी नंबर था, लेकिन मैंने अपने नंबर का बलिदान कर दिया।
उधर उत्तर में बहुत दूर हैवलॉक द्वीप पर रोशनियाँ दिख रही थीं। मुझे समझते देर नहीं लगी कि वो वहाँ का सबसे प्रसिद्ध बीच राधानगर है।
वापस लौटने लगे तो पैदल चलने का मन नहीं किया। आज हम लगभग दस किलोमीटर पैदल चल चुके थे और अब बिल्कुल भी इच्छा नहीं थी। तीन किलोमीटर दूर बाज़ार है और उससे भी दो किलोमीटर आगे हमारा होटल - कुल पाँच किलोमीटर। लेकिन यहाँ लक्ष्मणपुर बीच से कुछ भी साधन नहीं मिला तो पैदल ही चलना पड़ा। पैर तो दुख रहे थे, लेकिन अंधेरे में चलना पड़ा। फिर तो होटल तक पैदल ही गये।
होटल में केवल विदेशी ही थे। हमने रोटी-सब्जी का ऑर्डर दे दिया। बराबर में बैठे विदेशी के सामने पका हुआ समूचा मुर्गा प्लेट में हाज़िर हो गया। हम कुछ देर तक देखते रहे कि ये लोग इसे कैसे खायेंगे, लेकिन एक सीमा के बाद मन खराब हो गया और हमें नज़रें फेरनी पड़ गयीं।
इस लड़की ने तवे की नर्म-नर्म रोटियाँ बनायीं और बेहद स्वादिष्ट सब्जी। अवश्य इसने इसका प्रशिक्षण लिया होगा, अन्यथा अंडमान में ऐसा शानदार उत्तर भारतीय भोजन नहीं मिलता।
मच्छर बहुत थे, लेकिन जहाँ मच्छरदानी लगी हो, वहाँ मच्छर की क्या बिसात?
रामनगर बीच के किनारे यह होटल था। सुबह दीप्ति इस बीच पर नहाने गयी, तो दो मिनट में ही लौट आयी - “कोरल बीच है।”
अच्छा किया, लौट आयी। नहाने की कोशिश करती, तो घुटने छिलवाकर आती।
किसी ‘टूरिस्ट प्लेस’ का इतना वर्णन काफ़ी है। उम्मीद है आप शिकायत नहीं करेंगे।




भरतपुर बीच से दिखता हैवलॉक का दक्षिणी सिरा











भरतपुर बीच





लक्ष्मणपुर बीच की ओर जाता रास्ता


लक्ष्मणपुर बीच पर ‘हो चुका’ सूर्यास्त







कालापानी रिसॉर्ट में कॉटेज


शुद्ध शाकाहारी मित्र ध्यान रखें... जिस तवे पर डोसा बनता है, ठीक उसी तवे पर ठीक उसी जगह आमलेट भी बनता है... अंडमान में आप इससे बच नहीं सकते...





जो भी कुछ है, हर चीज एक्सप्लेन नहीं किया करते...

नील जेट्टी



हैवलॉक जाने की तैयारी में





जहाज के अंदर









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10. अंडमान में बाइक यात्रा: माउंट हैरियट नेशनल पार्क
11. वंडूर बीच भ्रमण
12. अंडमान यात्रा की कुछ वीडियो




Comments

  1. पोस्ट पढ़ने के बाद मन में सिर्फ एक ही बात आती है वाह ! क्या कहना ! इस बार अंडमान की बहुत से पूर से दर्शन हुआ और चित्र में समुद्री तटों के साथ-साथ कुछ अच्छे पाॅज देखने को मिला।

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  2. नीरज जी आपका पोस्ट पढ़ते हुए सामने जलेबी बनती देखी तो खाते हुए कमेंट कर दिया ।अंडमान न सही धामपुर की जलेबी में मजा आ गया ।अंडमान यात्रा के अगले विवरण का इंतज़ार रहेगा ।मजेदार यात्रा ।

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  3. जब लिखने मे कंजूसी नहीं करते हो तो पढ़ने में मज़ा आ जाता है...
    बहुत बढ़िया लेख...
    शानदार फ़ोटोग्राफ़ी।

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  4. Ek bar phir se shandar photography. Wah.. Jawab nahi. Kisi Ghumakkad Devta ka ashirvad hai aap par.

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  5. लेख ठीक है पर आपका पुराना पाठक और शुभचिंतक होने के नाते पता नही क्यों लगता है की आप अंडमान यात्रा को दिल से नही लिख रहे है। मैंने आपकी पहाड़ो रेल साइकिल पैदल हर यात्रा पढ़ी है वहॉ अलग ही मज है हिन्दी मे होते है ना रस छंद अलंकार सब है पर यहाँ कमी साफ नजर आ रही है। साथ ही जो क्वालिटी लद्दाख और पहाड़ो की फोटोस की है यहा वो नही। खैर जो भी है अच्छा है।

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    1. सही कहा आपने पवन जी... कार्य की अधिकता के कारण अंडमान यात्रा को विस्तारपूर्वक और अधिकारपूर्वक नहीं लिख सका... आगे की यात्राओं में आपको अच्छा वृत्तांत पढ़ने को मिलेगा... धन्यवाद आपका...

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