Skip to main content

फोटो-यात्रा-22: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से भारत

इस यात्रा के फोटो आरंभ से देखने के लिये यहाँ क्लिक करें
3 जून 2016



हम धीरे से नेपाल के द्वार से बाहर निकल गये। ‘नो मैंन्स लैंड़’ में पहुँचे और उतने ही धीरे से भारतीय द्वार में प्रवेश कर गये। किसी ने हमारी तरफ़ देखा तक नहीं। नेपाली बाइक भारत में और भारतीय बाइक नेपाल में दिनभर आती-जाती रहती हैं।
अब हम भारत में थे। अपने देश में थे। चाहे यह जैसा भी हो, इसके नागरिक जैसे भी हों, लेकिन है तो हमारा अपना ही। चौबीस दिन नेपाल में रहकर हमें अपने देश की सख़्त ज़रूरत महसूस होने लगी थी।
नेपाली सिम निकालकर भारतीय सिम डाल लिया। फेसबुक पर पहला संदेश भेजा - “भारत माता की जय।”

एवरेस्ट बेस कैंप ट्रैक पर आधारित मेरी किताब ‘हमसफ़र एवरेस्ट का एक अंश। किताब तो आपने पढ़ ही ली होगी, अब आज की यात्रा के फोटो देखिये:





ताकशिंदो-ला पर खड़ी मोटरसाइकिल

ताकशिंदो-ला से वापसी का रास्ता बारिश हो जाने के कारण अत्यधिक खराब हो गया था।



फिसलन बेशुमार...




केवल दूधकुंड की तरफ की यह चोटी हमारा उत्साहवर्धन कर रही थी।

दीप्ति आगे जाकर यह देख रही है कि बाइक को किस लीक में लाना ठीक रहेगा, ताकि यह कम से कम फिसले और अगर फिसले तो, नीचे खाई में न गिरे।



रिंगमो के बाद ‘हाईवे’ मिल गया।







वापसी का सफर



भंज्यांग माने कम ऊँचाई पर स्थित एक दर्रा

घुर्मी



सिंधुली की सड़क


सिंधुली से बारबाडोस की सड़क




और पहाड़ों से उतरकर मैदान में


रात दस बजे






अगला भाग: भारत प्रवेश के बाद: बॉर्डर से दिल्ली






1. फोटो-यात्रा-1: एवरेस्ट बेस कैंप - दिल्ली से नेपाल
2. फोटो-यात्रा-2: एवरेस्ट बेस कैंप - काठमांडू आगमन
3. फोटो-यात्रा-3: एवरेस्ट बेस कैंप - पशुपति दर्शन और आगे प्रस्थान
4. फोटो-यात्रा-4: एवरेस्ट बेस कैंप - दुम्जा से फाफलू
5. फोटो-यात्रा-5: एवरेस्ट बेस कैंप - फाफलू से ताकशिंदो-ला
6. फोटो-यात्रा-6: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से जुभिंग
7. फोटो-यात्रा-7: एवरेस्ट बेस कैंप - जुभिंग से बुपसा
8. फोटो-यात्रा-8: एवरेस्ट बेस कैंप - बुपसा से सुरके
9. फोटो-यात्रा-9: एवरेस्ट बेस कैंप - सुरके से फाकडिंग
10. फोटो-यात्रा-10: एवरेस्ट बेस कैंप - फाकडिंग से नामचे बाज़ार
11. फोटो-यात्रा-11: एवरेस्ट बेस कैंप - नामचे बाज़ार से डोले
12. फोटो-यात्रा-12: एवरेस्ट बेस कैंप - डोले से फंगा
13. फोटो-यात्रा-13: एवरेस्ट बेस कैंप - फंगा से गोक्यो
14. फोटो-यात्रा-14: गोक्यो और गोक्यो-री
15. फोटो-यात्रा-15: एवरेस्ट बेस कैंप - गोक्यो से थंगनाग
16. फोटो-यात्रा-16: एवरेस्ट बेस कैंप - थंगनाग से ज़ोंगला
17. फोटो-यात्रा-17: एवरेस्ट बेस कैंप - ज़ोंगला से गोरकक्षेप
18. फोटो-यात्रा-18: एवरेस्ट के चरणों में
19. फोटो-यात्रा-19: एवरेस्ट बेस कैंप - थुकला से नामचे बाज़ार
20. फोटो-यात्रा-20: एवरेस्ट बेस कैंप - नामचे बाज़ार से खारी-ला
21. फोटो-यात्रा-21: एवरेस्ट बेस कैंप - खारी-ला से ताकशिंदो-ला
22. फोटो-यात्रा-22: एवरेस्ट बेस कैंप - ताकशिंदो-ला से भारत
23. भारत प्रवेश के बाद: बॉर्डर से दिल्ली




Comments

  1. नीरज जी
    हमसफ़र एवेरेस्ट में आपने लिखा था कि रास्ता बहुत ही ख़राब था तबतक तो मैं भी ये सोच रहा था कि कच्चा होने की वजह से रास्ता ख़राब होगा लेकिन फोटो देख कर पता चल रहा है कि रास्ता ख़राब ही नहीं बल्कि बारिश के कारण बेहद खतरनाक हो गया था


    सलाम है आप दोनों की हिम्मत को

    ReplyDelete
  2. Is raaste me chalna matlab sidhe mout ko gale lagana

    ReplyDelete
  3. नीरज भाई मेरा मोबाइल नंबर 7800007222 है यही मेरा व्हाट्सएप्प नंबर भी है | अगर आप ठीक समझे तो अपना दूरभाष नंबर मुझे मेरे नंबर पर भेज दें यहाँ नहीं मांग रहा हूँ क्यू की सार्वजनिक हो जायेगा|

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

हल्दीघाटी- जहां इतिहास जीवित है

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें । हल्दीघाटी एक ऐसा नाम है जिसको सुनते ही इतिहास याद आ जाता है। हल्दीघाटी के बारे में हम तीसरी चौथी कक्षा से ही पढना शुरू कर देते हैं: रण बीच चौकडी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोडे से, पड गया हवा का पाला था। 18 अगस्त 2010 को जब मैं मेवाड (उदयपुर) गया तो मेरा पहला ठिकाना नाथद्वारा था। उसके बाद हल्दीघाटी। पता चला कि नाथद्वारा से कोई साधन नहीं मिलेगा सिवाय टम्पू के। एक टम्पू वाले से पूछा तो उसने बताया कि तीन सौ रुपये लूंगा आने-जाने के। हालांकि यहां से हल्दीघाटी लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर है इसलिये तीन सौ रुपये मुझे ज्यादा नहीं लगे। फिर भी मैंने कहा कि यार पच्चीस किलोमीटर ही तो है, तीन सौ तो बहुत ज्यादा हैं। बोला कि पच्चीस किलोमीटर दूर तो हल्दीघाटी का जीरो माइल है, पूरी घाटी तो और भी कम से कम पांच किलोमीटर आगे तक है। चलो, ढाई सौ दे देना। ढाई सौ में दोनों राजी।

स्टेशन से बस अड्डा कितना दूर है?

आज बात करते हैं कि विभिन्न शहरों में रेलवे स्टेशन और मुख्य बस अड्डे आपस में कितना कितना दूर हैं? आने जाने के साधन कौन कौन से हैं? वगैरा वगैरा। शुरू करते हैं भारत की राजधानी से ही। दिल्ली:- दिल्ली में तीन मुख्य बस अड्डे हैं यानी ISBT- महाराणा प्रताप (कश्मीरी गेट), आनंद विहार और सराय काले खां। कश्मीरी गेट पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। आनंद विहार में रेलवे स्टेशन भी है लेकिन यहाँ पर एक्सप्रेस ट्रेनें नहीं रुकतीं। हालाँकि अब तो आनंद विहार रेलवे स्टेशन को टर्मिनल बनाया जा चुका है। मेट्रो भी पहुँच चुकी है। सराय काले खां बस अड्डे के बराबर में ही है हज़रत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन। गाजियाबाद: - रेलवे स्टेशन से बस अड्डा तीन चार किलोमीटर दूर है। ऑटो वाले पांच रूपये लेते हैं।

लद्दाख यात्रा- सिन्धु दर्शन व चिलिंग को प्रस्थान

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें । नाश्ता करके सिन्धु घाट की तरफ चल पडा। थोडा आगे चोगलमसर है। लेह से चोगलमसर करीब आठ किलोमीटर है। लेकिन इस पूरी दूरी में अच्छी खासी बसावट है जिससे चोगलमसर लेह का ही हिस्सा लगता है। चोगलमसर के बाद आबादी खत्म हो जाती है। सिन्धु नदी- मानसरोवर से शुरू होकर कराची में खत्म होने से पहले यह तीन देशों- चीन, भारत व पाकिस्तान में बहती है। पंजाब की पांच नदियों में यह प्रमुख है लेकिन लद्दाख की भी यह प्रमुख नदी है। मुम्बई के एक मित्र का आग्रह है कि मैं उनके लिये सिन्धु जल लेकर आऊं। वे भारत की सात नदियों के जल का संग्रह करना चाहते हैं जिनमें से छह नदियां यानी गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी व एक और उनके पास संग्रहीत हैं। सातवीं के रूप में वे सिन्धु को चाहते हैं। कोशिश करूंगा उनके लिये सिन्धु जल लेकर जाने की। मैं चाहता हूं कि वे अपने संग्रह को बढायें। इसमें प्रेम का प्रतीक चेनाब, मोहपाशरहित विपाशा यानी ब्यास, मानसरोवर से आने वाली सतलुज, पूर्वोत्तर का जीवन ब्रह्मपुत्र, बिहार का शोक कोसी, अयोध्या वाली सरयू, दक्षिण की गंगा कावे...