Monday, August 8, 2011

श्रीखण्ड महादेव यात्रा- भीमद्वारी से पार्वती बाग

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20 जुलाई 2011 दिन बुधवार। हम तीन जने श्रीखण्ड अभियान पर थे और उस दिन सुबह सुबह छह बजे के करीब भीमद्वारी से चल पडे। हमें बताया गया था कि यहां से श्रीखण्ड करीब 8 किलोमीटर है जिसका आना-जाना शाम तक बडे आराम से हो जायेगा। यहां से करीब दो किलोमीटर दूर पार्वती बाग है। आज की पोस्ट में ज्यादा ना चलते हुए पार्वती बाग तक ही जायेंगे।
करीब आधा किलोमीटर आगे एक शानदार झरना है जिसे पार्वती झरना कहते हैं। यह कुदरती कलाकारी का एक ऐसा नमूना है जिस पर से नजर हटती ही नहीं हैं। वाकई इस इलाके में कुदरती कलाकारी जबरदस्त रूप से बिखरी पडी है।
सन्दीप और विपिन मुझसे आगे निकल गये थे। वे मिले पार्वती बाग में- परांठे खा रहे थे। इधर मैं भी ठहरा परांठों का भूखा। जब तक मैं पार्वती बाग पहुंचा, दोनों अपने हिस्से के परांठे खत्म कर चुके थे। मेरे पहुंचते ही टैण्ट वाले से बोले कि ओये, हमारा बन्दा आ गया है, जो भी कुछ खाने को मांगे, दे देना, हम चलते हैं आगे, पैसे नीरज देगा। पूरी यात्रा में खजांची मैं ही रहा था। एक डायरी में खर्चा लिख लेता था।
पार्वती बाग कोई बाग नहीं है। बस ऐसे ही नाम पड गया है। यह जगह पेड लाइन यानी ट्री लाइन से हजारों फीट ऊपर है, यहां सिर्फ घास ही घास मिलती है। हां, जगह बडी है और समतल है। टैण्ट लगाने के लिये उपयुक्त है। इसके बाद श्रीखण्ड तक कहीं भी टैण्ट लगाने की कोई जगह नहीं है, इसलिये हर किसी को श्रीखण्ड के दर्शन करके कम से कम यहां तक जरूर आना होता है।
यह जगह इस यात्रा की इतनी महत्वपूर्ण जगह है कि दोपहर दो बजे तक ही यहां के सभी टैण्ट भर जाते हैं। अनजान लोग सोचते हैं कि शाम तक पार्वती बाग पहुंच जायेंगे तो आगे का रास्ता कल के लिये आसान हो जायेगा लेकिन शाम छह बजे आने वालों को यहां बैठने तक की जगह नहीं मिलती। सबसे बढिया तरीका यही है कि अगर दो बजे तक भी भीमद्वारी पहुंच गये तो चुपचाप यही पर रुक लो। अगले दिन सुबह सवेरे श्रीखण्ड के लिये चल पडो।

पार्वती झरना



हम कल करीब तीन बजे तक भीमद्वारी पहुंच गये थे। हालांकि हमारे पास आगे पार्वती बाग जाने के लिये पर्याप्त समय था लेकिन वहां जगह मिलने की कोई सम्भावना ना होने के कारण हम यही रुक गये। शाम तक क्या करें? चलो, भण्डारे में कढी चावल खाते हैं और घास पर मटरगश्ती करते हैं।



भीमद्वारी से पहले दो जगहें ऐसी आती हैं कि एकदम खडा ढलान। सन्दीप आगे था, यहां पहुंचते ही मुझे इशारा करके चिल्लाया कि ओये, आजा, यहां आ, तुझे पाताल लोक दिखाता हूं। पाताल लोक से मतलब नीचे उतरने की भयावहता से था।




भीमद्वारी से लेकर पार्वती बाग तक पार्वती झरना यहां राज करता है।

यह है एक बूढा ग्लेशियर। बूढा इसलिये कि अब यह अपने आखिरी दिन गिन रहा है। खुद तो खत्म हो ही रहा है, दूसरों की जान को भी खतरे में डाल रहा है। अगर यह बची खुची बर्फ भी टूट गई जोकि जरूर टूटेगी तो जिसके कारण भी यह टूटेगी, तो भईया, हो ली उसकी श्रीखण्ड यात्रा।

ये लो, हो गया काम। जब हम वापस आये तो यही बूढा ग्लेशियर इस हालत में था। जरूर कोई बेचारा इसमें गिरा होगा। हालांकि यहां जान का खतरा तो नहीं है लेकिन जब अचानक बर्फ टूटने से कोई इसमें गिरा होगा तो पैरों में जरूर कुछ ना कुछ हुआ होगा। इतनी ऊंचाई और दुर्गमता पर पैरों में जरा सा कुछ भी होना बहुत भारी परेशानी का संकेत है।



यहां तक गडरिये अपनी भेडो-बकरियों को ले आते हैं।














जब मुंह पर लठ पडता है तो बिल्कुल ऐसी ही प्रतिक्रिया होती है।

दिल्ली से जब चले थे तो क्या खिलखिला रहे थे। अब सब खत्म। वो तो तब है जब चारों ओर बेइंतहा खूबसूरती है और फोटू भी खिंच रहा है। सच है कि इस जगह से आगे हंसी खत्म हो जाती है।

अगला भाग: श्रीखण्ड महादेव के दर्शन


श्रीखण्ड महादेव यात्रा
1. श्रीखण्ड महादेव यात्रा
2. श्रीखण्ड यात्रा- नारकण्डा से जांव तक
3. श्रीखण्ड महादेव यात्रा- जांव से थाचडू
4. श्रीखण्ड महादेव यात्रा- थाचडू से भीमद्वार
5. श्रीखण्ड महादेव यात्रा- भीमद्वार से पार्वती बाग
6. श्रीखण्ड महादेव के दर्शन
7. श्रीखण्ड यात्रा- भीमद्वारी से रामपुर
8. श्रीखण्ड से वापसी एक अनोखे स्टाइल में
9. पिंजौर गार्डन
10. सेरोलसर झील और जलोडी जोत
11. जलोडी जोत के पास है रघुपुर किला
12. चकराता में टाइगर फाल
13. कालसी में अशोक का शिलालेख
14. गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब
15. श्रीखण्ड यात्रा- तैयारी और सावधानी

19 comments:

  1. शानदार यात्रा वृतांत के लिए बधाई.

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  2. sunder tasvire neeraj bhai man karta hai dekhta hi rahoon

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  3. चित्र और विवरण अच्‍छे लगे !!

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  5. स्वर्ग शायद कोई ऐसी ही जगह होगी...प्रकृति अपनी पूरी आन बाण शान से मौजूद है यहाँ...गज़ब की यात्रा रही होगी ये आपकी...
    नीरज

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  6. एकाध लठ का स्वाद ले ही लेना था, मान गए यार एक्टिंग जाट की। एकाध फ़िल्म में रोल पक्का। हा हा हा हा।
    बहोत बढिया चल रही है यात्रा।
    जय हिन्द

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  7. ये नहीं बताया कि लठ लगने से पहले ही रुक गया था,
    वैसे असली यात्रा भाग दो शुरु होगी,

    नैन सरोवर से आगे जो कि अभी नहीं आया है,

    आज तो पार्वती बाग के ही दर्शन कर लो।

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  8. चित्र 11 और 16 ईमेल कर दीजिये, अब यही वालपेपर रहेंगे।

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  9. नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर.......
    अतुलनीय......

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  10. मन खिलावन यात्रा मन भावन चित्र
    मन खिल जाता है ऐसी यात्रा और चित्र देखकर
    बहुत-बहुत धन्यवाद्

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  11. कमाल की तस्वीरें हैं....बार-बार देखने को जी चाहे...
    रोचक यात्रा-वृत्तांत

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  12. आपकी हर यात्रा शुभमंगल हो ।

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  13. शानदार वर्णन ................................
    भाई आज जल्दी में हूँ ...................

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  14. घिघ्घी बाँधे पढ़ते देखते चल रहे हैं साथ साथ!!

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  15. देखते-पढ़ते रोमांच हो रहा है.

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  16. आप ने जो "कदम क्रांति" का आगाज किया है, ये दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करेगी!!

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