पराशर झील

January 22, 2012
इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें

7 दिसम्बर 2011 की सुबह हम तीनों फुरसत से सोकर उठे। दस बज गये, सूरज सिर पर चढ गया, तब जाकर हम रेस्ट हाउस से बाहर निकले। अच्छा हां, एक बात और है कि यहां तक आने के लिये सडक भी बनी है। मण्डी से कटौला और फिर बागी। बागी से यहां तक 18 किलोमीटर की सडक बनी है। यह सडक रेस्ट हाउस के पास तक आती है। यहां से झील करीब आधा किलोमीटर दूर है, जहां तक जाने के लिये हरेक को पैदल चलना ही पडेगा। 

एक छोटी सी झील है पराशर। ऊंचाई लगभग 2550 मीटर। सर्दियों में बर्फ भी पडती है। झील की एक खास बात है कि इसमें एक टहला रहता है। यह टहला क्या बला है? बताता हूं। एक छोटा सा द्वीप है। इस द्वीप की भी खास बात है कि यह झील में टहलता रहता है, इसीलिये इसे टहला कहते हैं। आज यहां है तो दो महीने बाद आना, किसी दूसरे कोने में मिलेगा। झील के आसपास कोई पेड नहीं है, चारों तरफ बस हरी-हरी घास ही है जो दिसम्बर में पीली पड जाती है।
झील के किनारे ऋषि पराशर का एक मन्दिर है जो पगोडा शैली में बना है। यह मन्दिर मण्डी रियासत के राजा बाणसेन ने 14वीं शताब्दी में बनवाया था। इस पर सुन्दर नक्काशी बनी हुई है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिये यहां क्लिक करें। 

यहां से करीब दस किलोमीटर दूर तुंगा माता का मन्दिर है। हमारी प्रारम्भिक योजना तुंगा माता तक जाने की थी। वहां से दूसरी तरफ मण्डी-कुल्लू मुख्य राजमार्ग पर ज्वालापुर तक नीचे उतरना था लेकिन...। यह ‘लेकिन’ शब्द बडा दुष्ट है। मेरा बस चले तो शब्दकोश से इसे हटा दूं। यह शब्द सारी बात का अर्थ उल्टा कर देता है। इसे सुनते ही सुनने वाला बिना पूरी बात समझे ही मान जाता है कि काम नहीं हुआ। ... लेकिन देवरी से पराशर तक की दस किलोमीटर की सीधी कठिन चढाई में भरत इतना खराब हो गया कि उसने सीधे मना कर दिया। कहने लगा कि अब पैदल नीचे जाना बस की बात नहीं है। अगर किसी की गाडी आती है तो उनसे लिफ्ट मांग लूंगा। और मजे की बात यह रही कि आज यहां पांच चार यात्री ही थे और सभी पैदल आये थे। दो विदेशी भी थे। 

पूछताछ करने पर पता चला कि बागी यहां से 8 किलोमीटर की पदयात्रा पर है। बागी तक मण्डी से बसें आती हैं। और बागी से ही पराशर तक 18 किलोमीटर लम्बी सडक भी है। अब इतना तो तय हो गया कि हमें 8 किलोमीटर दूर बागी तक नीचे पैदल ही उतरना है। मजबूरी का नाम... भरत। और उसे पैदल चलना पडा। 

एक बार तो मैंने भी सोचा कि इसे जाने दे। अमित और मैं तुंगा माता चलेंगे, लेकिन इंसानियत भी कुछ चीज है हमारे अन्दर कि हमने भरत को नहीं छोडा और तुंगा माता को रद्द करते हुए बागी की तरफ चल दिये।

पीडब्ल्यूडी का रेस्ट हाउस। इसके पास ही जंगल विभाग का रेस्ट हाउस भी है।

पराशर झील से दिखती बर्फीली पहाडियां। यहां से रोहतांग दर्रा भी दिखता है

अमित और नीरज

रेस्ट हाउस के सामने खडा भरत। पूरी यात्रा में इसके चेहरे पर मुस्कान नहीं आई।

पराशर झील, टहला और मन्दिर

टहले की आकृति वृत्ताकार है।

यह है मन्दिर परिसर। इन्हीं में धर्मशाला भी है।

टहला झील में टहलता रहता है।

पराशर झील और मन्दिर। मन्दिर के परली तरफ कुछ दुकानें हैं, वहीं पर ढाबा भी है।

कहते हैं यहां पहले कभी एक पेड था। विशालकाय। उसी पेड को बिना काटे, बिना उखाडे काट-छांट करके यह मन्दिर बनाया गया है।

अमित मेरे साथ तीन साल से रह रहा है, लेकिन आज पहली बार हम दोनों कहीं घूमने निकले हैं एक साथ।

वादियां मेरा दामन...

उधर कहीं जंगल पार करके तुंगा माता का मन्दिर है।

बिल्कुल केन्द्र में दिखता निर्माण विभाग का रेस्ट हाउस, ऊपर बायें कोने में जंगल विभाग का।

भरत नागर, पता नहीं अब मेरे साथ कभी हिमालय भ्रमण पर जायेगा या नहीं।

राजमे चावल का ‘प्रसाद’ ग्रहण करते हुए। 2550 मीटर की ऊंचाई, दिसम्बर का महीना और धूप; विलासिता के लिये और क्या चाहिये?

अलविदा पराशर। फिर मिलेंगे।


अगला भाग: पराशर झील ट्रेकिंग- झील से कुल्लू तक


पराशर झील ट्रैक
1. पराशर झील ट्रेकिंग- दिल्ली से पण्डोह
2. पराशर झील ट्रेकिंग- पण्डोह से लहर
3. पराशर झील ट्रेकिंग- लहर से झील तक
4. पराशर झील
5. पराशर झील ट्रेकिंग- झील से कुल्लू तक
6. सोलांग घाटी में बर्फबारी
7. पराशर झील- जानकारी और नक्शा

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16 Comments

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January 22, 2012 at 1:15 PM delete

बढ़िया प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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January 22, 2012 at 5:49 PM delete

neeraj babu mauj to tumhari hai jo itni sundar jagah par ghum aate ho

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January 22, 2012 at 6:13 PM delete

इससे अधिक आनन्द कहाँ मिलेगा भला..वाह..

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January 22, 2012 at 7:30 PM delete

आपके माध्यम से ऐसी ऐसी जगहें देखने को मिली हैं जिनके बारे में कभी सुना भी नहीं था...आप महान हो जी...वादियाँ सच में आपका दमन हैं जी.


नीरज

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January 22, 2012 at 7:55 PM delete

नीरज भाई ....
हमने तो परासर झील नाम भी नहीं सुना था...आपके लेख के माध्यम से हमें इस झील जानकारी ही नहीं अपितु आपने इसे सुन्दर चित्रों के माध्यम से दिखा भी दिया ....
धन्यवाद

My Next Story:
Udaipur:A Beautiful Travel Destination,झीलों की नगरी:उदयपुर..Part-2 (Tour of the City)
http://safarhainsuhana.blogspot.com/2012/01/udaipura-beautiful-travel-destination.html

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January 22, 2012 at 8:00 PM delete

नीरज भाई ....
हमने तो परासर झील नाम भी नहीं सुना था...आपके लेख के माध्यम से हमें इस झील जानकारी ही नहीं अपितु आपने इसे सुन्दर चित्रों के माध्यम से दिखा भी दिया ....
धन्यवाद
My Next Story:
Udaipur:A Beautiful Travel Destination,झीलों की नगरी:उदयपुर..Part-2 (Tour of the City)
http://safarhainsuhana.blogspot.com/2012/01/udaipura-beautiful-travel-destination.html

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January 23, 2012 at 5:24 AM delete

खूबसूरत चित्र. टहला से परिचय कराने का शुक्रिया!

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January 23, 2012 at 11:13 AM delete

padh kr man yatra me leen ho gaya .....bahut bahut abhar.

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January 24, 2012 at 3:27 PM delete

भाई नीरज,
मजा आ गया पढकर....
वैसे एक बा तो है...
मैं पिछले दो तीन साल से तुम्हें follow कर रहा हूँ.. तुम्गारी व्रितिंग स्किल और पिक कुँलिटी दिन ब दिन निखरती जा रही है....

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January 26, 2012 at 1:26 PM delete

achchha laga aapke blog pe aakar..!!
ab follow kar raha hoon, barabar chakkar lagegi..:)

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Anonymous
January 27, 2012 at 12:55 AM delete

चित्र बहुत अच्छे है विशेष रूप से पाराशर झील से दिखते हिम शिखर...ये हिम शिखर कहां है मनाली या किन्नौर ??

- SS

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February 1, 2012 at 3:59 PM delete

शानदार । पहली बार इतने विस्तार से किसी ने इस जगह के बारे में लिखा है और वो भी हिन्दी में । ये वाक़ई एक विशेष पोस्ट है जिसे ऐतिहासिक कहना होगा ।

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February 3, 2012 at 6:09 PM delete

बड़ी खुसी हुई ये जानकर के आप मुंबई में भी अपने कदम रख रहे है
मुंबई आना तो एक बार मुझसे जरूर मिलना भुसावल से मुम्बई पैसेंजर ट्रेन
कितने बजे पहुचेगी बता देना मैं आप स्टेशन पर मिल सकता हूँ शायद मुलाक़ात
हो जाये

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June 13, 2012 at 10:13 AM delete

MY SIRNAME IS BANDAL (RAJPUT ) NOW WE LIVE IN MAHARASHTRA AS JAHAGIRDAR DESHMUKH .
OUR ORIGIN WAS THE BUNDELKHAND , AND THE VILLAGE BANDAL WAS TOOK FROM MY SIR NAME
THANK FOR THAT INFORMATION

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