Skip to main content

जयपुर का जंतर मंतर

इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें
जयपुर वाला जंतर मंतर हवामहल के पास ही है। हवामहल की ऊपरी मंजिल से यह दिखता भी है।
जंतर मंतर महाराजा जयसिंह द्वितीय के काल में बनवाया गया था। शायद उन्होंने ही दिल्ली में भी बनवाया था। दिल्ली वाला अपना देखा हुआ नहीं है। बताते हैं कि जयपुर वाला जंतर मंतर ज्यादा विशाल है।
यहां विदेशियों का आगमन बहुत ज्यादा होता है। और वे इसकी गणितीय गणनाओं में दिलचस्पी भी लेते हैं। इसलिये उन गणनाओं को समझाने के लिये यहां गाइडों की भरमार है। हमारे लिये तो जंतर मंतर की ‘इमारतें’ फोटू खींचने की जगहें हैं।



उन्नतांश यंत्र

दक्षिणोत्तर भित्ति यंत्र
वृहत सम्राट यंत्र

सभी राशियों के लिये राशि वलय यंत्र



नाडीवलय यंत्र

राम यंत्र


यहां विदेशियों की भरमार रहती है।
उस दिन एक देशी जाट भी था। शर्ट बदल ली है।

अगला भाग: सिटी पैलेस, जयपुर

जयपुर यात्रा
1. जयपुर यात्रा-आमेर किला
2. जयपुर की शान हवामहल
3. जयपुर का जन्तर मन्तर
4. सिटी पैलेस, जयपुर
5. नाहरगढ किला, जयपुर

Comments

  1. suder chitra
    mushafir ho yaro
    na dar he na thikana

    ReplyDelete
  2. नीरज,

    आपकी घुमक्कड़ी वाली पोस्टें मुझे इसलिए पसंद हैं क्योंकि आप लिखने से ज्यादा तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं. अपनी तो घर बैठे ही सारी घुमक्कड़ी हो जाती है. वैसे सच कहूँ तो आपकी पोस्टें देखकर मेरे मन में तो ईर्ष्यावश एक ही ख्याल आता है की प्यारे घूम लो जब गृहस्थी के कोल्हू में जुतोगे तो हमारी तरह एक ही जगह पर मिलोगे.

    ReplyDelete
  3. इस स्थान पर कई बार गया हूँ। यह हमेशा आकर्षित करता है।

    ReplyDelete
  4. हमें तो देशी ही ज्यादा पसंद है, जाट भी और खाट भी:)

    खूबसूरत तस्वीरें और शानदार पोस्ट, हमेशा की तरह।

    जुटया रह छोरे घुमक्कड़ी में. जद तक ’नून तेल लाकड़ी’ ते बच रया है।

    ReplyDelete
  5. बहुत खुद यहां तो सारे ही फ़िरंगी दिख रहे हे, चित्र बहुत सुंदर राम राम

    ReplyDelete
  6. बधाई! शर्ट बदल ली आपने :)

    प्रणाम

    ReplyDelete
  7. वाह, वाह गुरु , आपने तो सारे ही चित्र एक-एक कर खूबसूरती से उतारे !

    ReplyDelete
  8. अभी भी वैसा का वैसा है जैसा बरसों पहले था...बहुत गज़ब है ये जंतर मंतर...
    नीरज

    ReplyDelete
  9. खूबसूरत तश्वीरें। आपकी घुमक्कड़ी देख कर कुछ-कुछ होता है।

    ReplyDelete
  10. आप अच्छे फोटोग्राफर भी बनते जा रहे हैं।

    ReplyDelete
  11. आपका संग्रह दिनों दिन विशाल होता जा रहा है | शुभकामनाये |

    ReplyDelete
  12. बहतु अच्छी तस्वीरें ओर जानकारी .

    ReplyDelete
  13. घर बैठे सुन्दर दृश्य दिखाने के लिऐ धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  14. शायद जंतर मंतर का रास्ता हवामहल के आगे से बाज़ार होते हुए जाता है, बहुत पहले गया था इसलिए पक्का मालूम नहीं है

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

स्टेशन से बस अड्डा कितना दूर है?

आज बात करते हैं कि विभिन्न शहरों में रेलवे स्टेशन और मुख्य बस अड्डे आपस में कितना कितना दूर हैं? आने जाने के साधन कौन कौन से हैं? वगैरा वगैरा। शुरू करते हैं भारत की राजधानी से ही। दिल्ली:- दिल्ली में तीन मुख्य बस अड्डे हैं यानी ISBT- महाराणा प्रताप (कश्मीरी गेट), आनंद विहार और सराय काले खां। कश्मीरी गेट पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। आनंद विहार में रेलवे स्टेशन भी है लेकिन यहाँ पर एक्सप्रेस ट्रेनें नहीं रुकतीं। हालाँकि अब तो आनंद विहार रेलवे स्टेशन को टर्मिनल बनाया जा चुका है। मेट्रो भी पहुँच चुकी है। सराय काले खां बस अड्डे के बराबर में ही है हज़रत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन। गाजियाबाद: - रेलवे स्टेशन से बस अड्डा तीन चार किलोमीटर दूर है। ऑटो वाले पांच रूपये लेते हैं।

चूडधार की जानकारी व नक्शा

चूडधार की यात्रा कथा तो पढ ही ली होगी। ट्रेकिंग पर जाते हुए मैं जीपीएस से कुछ डाटा अपने पास नोट करता हुआ चलता हूं। यह अक्षांस, देशान्तर व ऊंचाई होती है ताकि बाद में इससे दूरी-ऊंचाई नक्शा बनाया जा सके। आज ज्यादा कुछ नहीं है, बस यही डाटा है। अक्षांस व देशान्तर पृथ्वी पर हमारी सटीक स्थिति बताते हैं। मैं हर दस-दस पन्द्रह-पन्द्रह मिनट बाद अपनी स्थिति नोट कर लेता था। अपने पास जीपीएस युक्त साधारण सा मोबाइल है जिसमें मैं अपना यात्रा-पथ रिकार्ड नहीं कर सकता। हर बार रुककर एक कागज पर यह सब नोट करना होता था। इससे पता नहीं चलता कि दो बिन्दुओं के बीच में कितनी दूरी तय की। बाद में गूगल मैप पर देखा तो उसने भी बताने से मना कर दिया। कहने लगा कि जहां सडक बनी है, केवल वहीं की दूरी बताऊंगा। अब गूगल मैप को कैसे समझाऊं कि सडक तो चूडधार के आसपास भी नहीं फटकती। हां, गूगल अर्थ बता सकता है लेकिन अपने नन्हे से लैपटॉप में यह कभी इंस्टाल नहीं हो पाया।

लद्दाख बाइक यात्रा- 12 (लेह-खारदुंगला)

16 जून 2015 एक बात मैं अक्सर सोचता हूं। हम मैदानों में बाइक के पहियों में हवा लगभग 35 पौंड पर भरते हैं। जब हम लद्दाख जैसी ऊंची जगहों पर पहुंचते हैं तो वातावरण में हवा का दबाव कम होने के कारण पहियों में हवा का दाब बढ जाता है। जैसे कि मान लो लेह में हवा का दाब दिल्ली के मुकाबले आधा है, तो दिल्ली में भरी गई 35 पौंड की हवा लेह में 70 पौंड का प्रभाव पैदा करेगी। यह खतरनाक हो सकता है। बाइकों में अधिकतम 40 पौंड तक ही हवा भरी जाती है, उससे ज्यादा हवा अगर भरी गई तो टायर के फटने का डर हो जाता है। लेकिन ऊंचाईयों पर पहुंचने पर दाब 70 पौंड तक भी पहुंच जाता है, जो निश्चित रूप से अत्यधिक खतरनाक है। ऐसे में अत्यधिक दाब वाली हवा ट्यूब पर, पहिये पर दबाव डालती है और ट्यूब जहां से भी कमजोर होती है, वहीं से पंचर हो जाती है। लद्दाख में दर्रों के आसपास पंचर ज्यादा होते हैं। केवल इसीलिये। इसलिये जरूरी था कि हवा चेक की जाये। यह काम हम कल नहीं करा सके, सोचा कि आज चलते समय करायेंगे। लेकिन आज सुबह नौ बजे हम चल पडे, लेह से बाहर निकल गये लेकिन हवा चेक नहीं कराई। यह खतरनाक तो था लेकिन जो होगा देखा जायेगा।