Monday, December 29, 2014

2014 की घुमक्कडी का लेखा-जोखा

यात्राओं के लिहाज से यह साल बिल्कुल भी शानदार नहीं रहा। एक के बाद एक बिगडते समीकरण, यात्राओं को बीच में छोडना; मतलब जो नहीं होना चाहिये था, वो सब हुआ। कुछ बडी यात्राएं जरूर हुईं लेकिन एकाध को छोडकर लगभग सभी में कुछ न कुछ गडबड होती रही। कई बार ऐसा लगा... बल्कि अब भी ऐसा लग रहा है कि इस साल जो भी यात्राएं कीं, सभी जबरदस्ती की गई यात्राएं थीं।
चलिये, पहले बात करते हैं उन यात्राओं की जिनका वृत्तान्त प्रकाशित हुआ।
साल के शुरू में ही जब सुना कि कश्मीर में भारी बर्फबारी हो रही है तो यहां की ट्रेन में यात्रा करने का मन हो गया। यहां ब्रॉड गेज है और भारत की एकमात्र ऐसी ब्रॉडगेज की लाइन है जहां बर्फ पडती है। जब शून्य से नीचे के तापमान में कश्मीर गया तो दूर तक फैली बर्फ में ट्रेन को गुजरते देखना बेहद सुखद एहसास था।

यह एक महत्वाकांक्षी यात्रा थी। इसमें साइकिल से पूरे मिजोरम की परिक्रमा करनी थी। मुम्बई से सचिन ने साथ दिया। इस यात्रा की एलटीसी लेने की योजना थी, तभी तो आरक्षण राजधानी एक्सप्रेस में किया था। लेकिन जैसे जैसे यात्रा आगे बढती गई, समीकरण बदलते गये, बिगडते गये और आखिरकार यात्रा बीच में छोडकर वापस लौटना पडा। फिर भी सन्तुष्टि है कि पूर्वोत्तर भारत के सुदूरवर्ती राज्य में आइजॉल से चम्फाई तक लगभग 200 किलोमीटर तक साइकिल चलाई।
तीन दिनों की इस यात्रा में गुजरात के वीरमगाम से पैसेंजर ट्रेन यात्रा आरम्भ हुई और पहले दिन सूरत, दूसरे दिन सूरत से मुम्बई और तीसरे दिन वडोदरा से रतलाम तक यात्रा की गई। इस दौरान मिजोरम यात्रा के साथी मुम्बई निवासी सचिन से मुलाकात भी हुई।
यह असल में चूडधार-कमरूनाग यात्रा नहीं थी बल्कि मिलम ग्लेशियर यात्रा थी। दिल्ली से मुन्स्यारी के लिये निकल भी चुका था लेकिन अल्मोडा भी नहीं पहुंच पाया कि वापस चलने की आफत लगने लगी। अचानक ही मिलम से मोहभंग हो गया और मैं वापस काठगोदाम लौट आया। वहां से ट्रेन पकडी और कानपुर चला गया, फिर झांसी पहुंचा। मई का महीना था, गर्मी ने परेशान किया तो फिर से हिमालय याद आने लगा। ट्रेन से कालका पहुंचा और फिर सोलन होते हुए नोहराधार। यहां से चूडधार की ट्रेकिंग की। वहां से नीचे उतरा लेकिन अभी भी कई छुट्टियां बची हुई थीं। इस दौरान सुरेन्द्र और सचिन साथ देने आ गये और हम कमरूनाग चले गये। मौसम खराब था, नहीं तो शिकारी देवी भी जाते। इस यात्रा को पढने में पाठकों को काफी आनन्द आया लेकिन मुझे नहीं। मैं पागलों की तरह एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकता रहा और कहीं भी मन नहीं लगा।
यह एक सुनियोजित यात्रा थी और सुनियोजित तरीके से सम्पन्न हुई। इसमें सुरेन्द्र, मधुर और अशोक ने साथ दिया। कभी भी ऐसा नहीं लगा कि मैं जबरदस्ती यात्रा कर रहा हूं। मलाणा देखने की कई सालों से इच्छा थी, इस बार वो भी देख लिया।
यह यात्रा मुगलसराय से शुरू हुई लेकिन शुरूआत बहुत खराब रही। नीलांचल एक्सप्रेस छूट गई और मुझे राजधानी एक्सप्रेस से जाना पडा। पहले दिन मुगलसराय से चलकर गोमो जाकर रुका। अगले दिन गोमो से हावडा, रातोंरात पटना आ गया और तीसरे दिन पटना से मुगलसराय की लोकल में बैठ गया। लेकिन यह ट्रेन बक्सर में कई घण्टे तक खडी रही और आखिरकार मुझे यह छोडनी पडी और दूसरी ट्रेन से वाराणसी गया। उसके बाद दिल्ली।
एक दिन की इस यात्रा में दिल्ली से मथुरा ताज एक्सप्रेस से, मथुरा से अलवर पैसेंजर से, जयपुर एक्सप्रेस से, सवाई माधोपुर और आगे आगरा किला तक पैसेंजर से यात्रा की गई। राजस्थान-यूपी की सीमा पर कुछ लाइनें थीं जो काफी समय से मुझसे बची हुई थीं, इस बार ये सब निपट गईं।
यह एक सुनियोजित यात्रा थी और इसका सारा श्रेय सुनील पाण्डेय जी को जाता है। दिल्ली से रायपुर पहुंचा और सुनील जी के साथ हो लिया। विशाखापट्टनम, अरकू घूमते हुए बस्तर पहुंचे, चित्रकोट प्रपात देखा, तीरथगढ प्रपात देखा और प्रसिद्ध केके लाइन देखी।
यात्रा की पहले योजना बनी, फिर विधान और प्रकाश जी साथ चलने को राजी हुए, फिर मेरा मन डोल गया। अगर हमारा सबका हवाई टिकट न होता, तो मैं इस यात्रा को रद्द करने वाला था। फिर भी तमाम व्यवधानों के बावजूद यात्रा सही-सलामत और समय से सम्पन्न हो गई। हालांकि विधान और प्रकाश जी को यात्रा बीच में ही छोडकर आना पडा।
नई मोटरसाइकिल ली और यह पहली मोटरसाइकिल यात्रा थी। चार दिनों की इस यात्रा में दिल्ली से बडौत, लाक्षागृह, ऋषिकेश, नीलकण्ठ महादेव, चम्बा, धनौल्टी, मसूरी, लाखामण्डल, चकराता और आखिरकार दिल्ली तक का चक्कर लगाया गया। साथ दिया सचिन, अरुण और दीपक ने।
इनके अलावा कुछ यात्राएं ऐसी भी रहीं जो प्रकाशित नहीं कीं। इनमें रानीखेत-नैनीताल की यात्रा सबसे ऊपर है। इस यात्रा के अनुभव इतने कडवे रहे कि इसे न लिखने का फैसला करना पडा। अब आप स्वयं ही अन्दाजा लगा सकते हो कि कितना भयानक अनुभव रहा होगा। इसके बाद चार-दिनी ट्रेन यात्रा भी की जिसमें गोमो से खडगपुर, टाटानगर, बिलासपुर, रायपुर, गोंदिया और बिलासपुर-कटनी मार्ग पर पैसेंजर ट्रेनों में यात्रा की। लेकिन पाठकों के पैसेंजर ट्रेन यात्राओं को नापसन्द करने के कारण इसे भी प्रकाशित नहीं किया। पंजाब में रेलवे का जाल बिछा हुआ है और वहां हर जगह लोकल ट्रेनें खूब चलती हैं। इसी तरह जब लुधियाना से फिरोजपुर जा रहा था और चार दिनों का कार्यक्रम था तो फिरोजपुर में पता नहीं क्या हुआ कि अगले दिन सबकुछ छोड-छाडकर वापस भाग आया। अभी हाल ही में दिल्ली से बीकानेर और आगे फलोदी तक की पैसेंजर यात्रा भी की, इसे भी प्रकाशित नहीं किया।
इनके अलावा साल के शुरू में प्रशान्त के साथ आठ दिनों के लिये गुजरात में सौराष्ट्र में ट्रेन यात्रा करने का कार्यक्रम बन गया था, सभी आरक्षण हो गये थे लेकिन उसे रद्द करना पडा। अभी हाल ही में क्रिसमस की छुट्टियों में बाइक से दिल्ली से जोधपुर जाने का इरादा था लेकिन भयंकर ठण्ड ने उसे भी ठण्डे बस्ते में डाल दिया। इसके बदले वडोदरा डिवीजन की नैरो गेज लाइनों पर यात्रा करने की सोची, आरक्षण हो गये लेकिन एक दिन पहले उसे भी रद्द करना पडा।
कुल मिलाकर यह साल यात्राओं के लिहाज से अच्छा नहीं रहा। अब चूंकि मोटरसाइकिल ले ली है तो अगले साल के लिये कुछ मोटरसाइकिल यात्राओं का कार्यक्रम बनाया जा सकता है। फिलहाल तो जनवरी के मध्य में कच्छ यात्रा की योजना है लेकिन इसे शुरू तब माना जाये जब मैं दिल्ली छोड दूं। मोटरसाइकिल होने के कारण जून के बाद स्पीति, लाहौल और लद्दाख के बारे में भी सोचा जा सकता है।

24 comments:

  1. Abhinandan neeraj bhai , ham aapki har yatra pasand karte he chahe trecking ho ya train yatra .please aap likho har yatra likho . Naya sal aapk liye best rahe or tandurast raho ma gayatri aapki raksha kare prathna sah .

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    1. धन्यवाद उमेश भाई...

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  2. नीरज भाई उम्मीद करता हूँ नया साल यात्राओं के लिहाज से आपके लिए बेहतर साबित हो.!
    वैसे ये साल भी इतना बुरा नही रहा.! कुछ बेहतरीन यात्राएं तो आपके खाते में जुड़ ही गयी.!

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    1. बिल्कुल अरुण भाई, कुछ बेहतरीन यात्राएं अपने खाते में जुडी हैं। धन्यवाद आपका।

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  3. यात्रा तो यात्रा है। आपको रानीखेत-नैनीताल की यात्रा के कड़वे अनुभव साझा करने चाहिए , अब उत्सुकता जाग गई है।

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    1. उस यात्रा को तो नहीं लिखूंगा लेकिन कभी उपयुक्त समय आने पर इशारा जरूर कर दूंगा। धन्यवाद आपका।

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  4. नीरज भाई यह आने वाला वर्ष आपके के लिए बहुत ही अच्छा रहे,ऐसी कामनां है ईश्वर से हमारी,
    इस वर्ष मोटरसाईकल से आप पूरा हिमाचल व उत्तराखण्ड की रोड भर्मण कर डालो,
    पाठको को ही मजा आ जाएगा

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    1. हां, सचिन भाई, पाठकों के मजे के लिये कोशिश करूंगा रोड भ्रमण करने की...

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  5. You are great neeraj bhaiya. Aap apne ranikhet - nanital yatra k kadve anubhav jarur prakasit kre. Please

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    1. धन्यवाद मिश्रा जी...

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  6. are bhai saal kharaab gaya kyon bolte ho .aapki kashmir yatra ne hame ghar baithe urope ki switzerland ki traino ki yaad dila di.jaisa filmo me dikhata hai................................
    aapki mizoram yatra ne hamaari kai bhrantiyo ko dur kiya.jo north state ke bare me yahan middle india ke logo ko rahta hai...........
    malana yatra me wahan ki shaandaar history batayi jo google me bhi nahi mil sakti.....................
    bastar yatra se hamare chhattisgarh ko itna shandaar explore kiya..........
    aur ab itna shaandaar padum daarcha trak chal rahaa hai........
    aapke shabdo me kkahoo to koi kami nahi hai. hai bhi to hum pathako ko dikhayee nahi deti. dikhayi deti hai to samajh nahi aati .samajh aati hai to...........................to kya .......aapki dusri yatrao ke vivran padh lete hai.
    bas man khush ho jaata hai.

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    1. हा हा हा... धन्यवाद मनीष जी...

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  7. Neeraj jee 2014 🕔 me aapke dawra ki gai yatra bahut hi romanchkari aur utsahwerdhak rahi.Yatra ka aarmbh aur ant lagbhag himalya se huaa.Kashmir rail yatra ne ghar se bahr nikalne ke liye himmat di to mizoram yatra sudur anchhuye apno ke beech jane ko badhya karti hai,paisenjer yatra se hame jameen se jurne ka ehsas hota hai, paisenjer yatra se hame jameen se jurne ka ehsas hota hai, kamrunag yatra n manane wali har ko mahsus krata hai.Atku badter yatra hamse dur hue sanskriti se jorne ka karya karti hai aur padum darcha tack naye ghumkkaro ko paida karne ki himmat deta hai.Bhale hi n majil mile manjil ki suruwat to hai.AAGE UMMIDo KE sath.......

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    1. धन्यवाद गुप्ता जी आपका बहुत बहुत...

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  8. lo kar lo baat yatra bhi ki or maza bhi nahi aaya-- areee, yatra mein pareshani to muh khole khadi rahti hi hai ----

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    1. धन्यवाद दर्शन जी...

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  9. aap ki ek yaatra bhi hamare liye bahut hi bhai aap ko naye saal ki shubhkamna

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  10. Didn't liked this new theme of your blog..its so dark and a peculiar type of negative waves comes..

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  11. आपने लिखा है -

    '..इस यात्रा के अनुभव इतने कडवे रहे कि इसे न लिखने का फैसला करना पडा। अब आप स्वयं ही अन्दाजा लगा सकते हो कि कितना भयानक अनुभव रहा होगा। इसके बाद चार-दिनी ट्रेन यात्रा भी की जिसमें गोमो से खडगपुर, टाटानगर, बिलासपुर, रायपुर, गोंदिया और बिलासपुर-कटनी मार्ग पर पैसेंजर ट्रेनों में यात्रा की। लेकिन पाठकों के पैसेंजर ट्रेन यात्राओं को नापसन्द करने के कारण इसे भी प्रकाशित नहीं किया।.."
    तो, मेरे विचार में केवल सुखद यात्राओं को ही डाक्यूमेंट करने का विचार कतई ठीक नहीं है. कड़वी दुखद यादें भी लिखें - जीवन का समग्र और आपकी यात्रा का समग्र इनके बगैर अधूरा है. साथ ही, पाठकों कि चिंताएं तो करें, परंतु इतना भी नहीं कि अपनी यात्राओं को प्रकाशित ही न करें. मुझे लगता है कि आपको अपनी तमाम यात्राओं को प्रकाशित करना चाहिए.

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  12. अच्छा; पाठक पैसेंजर ट्रेन की यात्राओं को पसन्द नही करते? मेरे ख्याल से विशद अनुभव तो उनमें ही होते हैं।

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  13. NEERAJ BHAI APKA POSTAL ADDRESS LIKHEN

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    1. Neeraj Kumar,
      E-607, Metro Vihar, Shastri Park, Delhi-53

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