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‘कुमारहट्टी से जानकीचट्टी’ यात्रा की वीड़ियो

पिछले दिनों हमारी “कुमारहट्टी से जानकीचट्टी” यात्रा-श्रंखला प्रकाशित हुई। इस दौरान फ़ेसबुक पेज पर कुछ वीड़ियो भी अपलोड़ कीं। उन्हीं वीड़ियो को यहाँ ब्लॉग पर भी प्रकाशित किया जा रहा है। यदि आपने फेसबुक पेज पर वीड़ियो न देखी हों, तो यहाँ देख सकते हैं।


















इस यात्रा के सभी भाग:
1. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी
2. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग दो
3. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग तीन (त्यूणी और हनोल)
4. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग चार (हनोल से पुरोला)
5. बाइक यात्रा: पुरोला से खरसाली
6. बाइक यात्रा: खरसाली से दिल्ली
7. ‘कुमारहट्टी से जानकीचट्टी’ यात्रा की वीडियो



Comments

  1. देखकर ही रोमांच हो आया, बहुत शानदार.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  2. Dhanywad is khoobsurat yatra ke liye

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चूडधार की जानकारी व नक्शा

चूडधार की यात्रा कथा तो पढ ही ली होगी। ट्रेकिंग पर जाते हुए मैं जीपीएस से कुछ डाटा अपने पास नोट करता हुआ चलता हूं। यह अक्षांस, देशान्तर व ऊंचाई होती है ताकि बाद में इससे दूरी-ऊंचाई नक्शा बनाया जा सके। आज ज्यादा कुछ नहीं है, बस यही डाटा है। अक्षांस व देशान्तर पृथ्वी पर हमारी सटीक स्थिति बताते हैं। मैं हर दस-दस पन्द्रह-पन्द्रह मिनट बाद अपनी स्थिति नोट कर लेता था। अपने पास जीपीएस युक्त साधारण सा मोबाइल है जिसमें मैं अपना यात्रा-पथ रिकार्ड नहीं कर सकता। हर बार रुककर एक कागज पर यह सब नोट करना होता था। इससे पता नहीं चलता कि दो बिन्दुओं के बीच में कितनी दूरी तय की। बाद में गूगल मैप पर देखा तो उसने भी बताने से मना कर दिया। कहने लगा कि जहां सडक बनी है, केवल वहीं की दूरी बताऊंगा। अब गूगल मैप को कैसे समझाऊं कि सडक तो चूडधार के आसपास भी नहीं फटकती। हां, गूगल अर्थ बता सकता है लेकिन अपने नन्हे से लैपटॉप में यह कभी इंस्टाल नहीं हो पाया।

खीरगंगा - दुर्गम और रोमांचक

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें । पिछली बार पढा कि मणिकर्ण से खीरगंगा 25 किलोमीटर दूर है। 15 किलोमीटर दूर पुलगा तक तो बस सेवा है, आगे शेष 10 किलोमीटर पैदल चलना पडता है। पुलगा से तीन-साढे तीन किलोमीटर आगे नकथान गांव है, जो पार्वती घाटी का आखिरी गांव है। इसके बाद इस घाटी में कोई मानव बस्ती नहीं है। नकथान से निकलते ही मैं एक काफिले के साथ हो लिया। उनमें सात-आठ जने थे। सभी के पास खोदने-काटने के औजार थे। यहां से आगे ज्यादा चढाई नहीं है। कुछ दूर ही रुद्रनाग है। यहां टेढी-मेढी चट्टानों से होकर पानी नीचे आता है यानी झरना है। यह जगह स्थानीय लोगों के लिये बेहद श्रद्धा की जगह है। देवता भी यहां दर्शन करने को आते हैं। इसका सम्बन्ध शेषनाग से जोडा जाता है। यह जगह बडी ही मनमोहक है। काफी बडा घास का मैदान भी है। पास में ही पार्वती नदी पर शानदार झरना भी है।

चूडधार यात्रा- 2

इस यात्रा-वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें । 9 मई 2014, शुक्रवार आलू के परांठे खाने की इच्छा थी लेकिन इस समय यहां आलू न होने के कारण यह पूरी न हो सकी। इसलिये सादे परांठों से ही काम चलाना पडा। अभी हवा नहीं चल रही थी और मौसम भी साफ था लेकिन हो सकता है कि कुछ समय बाद हवा भी चलने लगे और मौसम भी बिगडने लगे। निकलने से पहले चेहरे पर थोडी सी क्रीम लगा ली। ट्रैकिंग पोल जो अभी तक बैग में ही था, अब बाहर निकाल लिया। आज मुझे बर्फ में एक लम्बा सफर तय करना है। साढे आठ बजे चल पडा। तीसरी से चूडधार की दूरी छह किलोमीटर है लेकिन खतरनाक रास्ता होने के कारण मैं इसे चार घण्टे में पार कर लेने की सोच रहा था। तीन घण्टे वापस आने में लगेंगे। यानी शाम चार बजे तक यहां लौट आऊंगा। नोहराधार से कल यहां तक आने में पांच घण्टे लगे थे, तीन घण्टे में यहां से नोहराधार जा सकता हूं। इसलिये आज रात को नोहराधार में ही रुकने की कोशिश करूंगा।