Skip to main content

‘कुमारहट्टी से जानकीचट्टी’ यात्रा की वीड़ियो

पिछले दिनों हमारी “कुमारहट्टी से जानकीचट्टी” यात्रा-श्रंखला प्रकाशित हुई। इस दौरान फ़ेसबुक पेज पर कुछ वीड़ियो भी अपलोड़ कीं। उन्हीं वीड़ियो को यहाँ ब्लॉग पर भी प्रकाशित किया जा रहा है। यदि आपने फेसबुक पेज पर वीड़ियो न देखी हों, तो यहाँ देख सकते हैं।


















इस यात्रा के सभी भाग:
1. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी
2. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग दो
3. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग तीन (त्यूणी और हनोल)
4. बाइक यात्रा: कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग चार (हनोल से पुरोला)
5. बाइक यात्रा: पुरोला से खरसाली
6. बाइक यात्रा: खरसाली से दिल्ली
7. ‘कुमारहट्टी से जानकीचट्टी’ यात्रा की वीडियो



Comments

  1. देखकर ही रोमांच हो आया, बहुत शानदार.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

    ReplyDelete
  2. Dhanywad is khoobsurat yatra ke liye

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

आसमानी बिजली के कुछ फोटो

बरसात में जब बिजली चमकती है तो सेकंड के सौवें हिस्से में सबकुछ हो जाता है। पता नहीं लोगबाग इतनी फुर्ती से इनके फोटो कैसे खींच लेते हैं? मैंने भी कोशिश की लेकिन जब तक क्लिक करता, तब तक दो सेकंड बीत जाते। कडकती बिजली के लिये तो दो सेकंड बहुत ज्यादा होते हैं। मुझे हमेशा अन्धेरी रात ही दिखाई देती। इलाज निकला। कैमरे को ट्राइपॉड पर वीडियो मोड में लगाकर छोड दिया और अन्दर जाकर डिनर करने लगा। वापस आया तो करीब बीस मिनट की वीडियो हाथ लग चुकी थी। इसमें बहुत बढिया बिजली कडकती व गिरती भी कैद हो गई। दो-तीन बार ऐसा किया। आखिरकार उन वीडियो से कुछ फोटो हाथ लगे हैं, क्वालिटी बेशक उतनी अच्छी नहीं है लेकिन बिजली अच्छी लग रही है।

गंडीकोटा: भारत का ग्रैंड कैन्योन

15 फरवरी 2019 जिस समय हम्पी का विजयनगर साम्राज्य अपने पूरे वैभव पर था, उसी समय हम्पी से कुछ ही दूर एक छोटा-सा साम्राज्य बना हुआ था, जिसकी राजधानी गंडीकोटा थी। फिर दिल्ली सल्तनत ने जब दक्कन पर आक्रमण करने शुरू किए तो न हम्पी टिक पाया और न ही गंडीकोटा। हाँ, इस सल्तनत के खिलाफ लड़ने को हम्पी और गंडीकोटा एक जरूर हुए, लेकिन खुद को नहीं बचा पाए। आज हम्पी भी खंडहर हो गया है और गंडीकोटा भी। गंडीकोटा आंध्र प्रदेश में है। लेकिन यह उन खंडहरों और किले के लिए उतना नहीं जाना जाता, जितना अपने अद्‍भुत प्राकृतिक नजारे के लिए। यहाँ पेना नदी बहुत गहरी बहती है - सीधी खड़ी चट्टानों के बीच। इसलिए इसे भारत का ग्रैंड कैन्योन भी कहा जाता है। नदी के दोनों किनारे 100-100 मीटर तक एकदम खड़े हैं। असल में ग्रांड कैन्योल अमरीका में है। वहाँ कोलोराडो नदी इसी तरह का कटान करती है और काफी प्रसिद्ध हो गई है। अब हम उतनी आसानी से अमरीका तो नहीं जा सकते, तो क्या हुआ? हमारे पास भी अपना ग्रांड कैन्योन है। दक्कन का पठार मुख्यतः मैदानी ही है, लेकिन कहीं-कहीं छोटी-छोटी पहाड़ियाँ भी हैं। यहाँ भी एक पहाड़ी श्रंखला...

लद्दाख बाइक यात्रा- 6 (श्रीनगर-सोनमर्ग-जोजीला-द्रास)

11 जून 2015 सुबह साढे सात बजे उठे। मेरा मोबाइल तो बन्द ही था और कोठारी साहब का पोस्ट-पेड नम्बर हमारे पास नहीं था। पता नहीं वे कहां होंगे? मैं होटल के रिसेप्शन पर गया। उसे अपनी सारी बात बताई। उससे मोबाइल मांगा ताकि अपना सिम उसमें डाल लूं। मुझे उम्मीद थी की कोठारी साहब लगातार फोन कर रहे होंगे। पन्द्रह मिनट भी सिम चालू रहेगा तो फोन आने की बहुत प्रबल सम्भावना थी। लेकिन उसने मना कर दिया। मैंने फिर उसका फोन ही मांगा ताकि नेट चला सकूं और कोठारी साहब को सन्देश भेज सकूं। काफी ना-नुकुर के बाद उसने दो मिनट के लिये अपना मोबाइल मुझे दे दिया। बस, यही एक गडबड हो गई। होटल वाले का व्यवहार उतना अच्छा नहीं था और मुझे उससे प्रार्थना करनी पड रही थी। यह मेरे स्वभाव के विपरीत था। अब जब उसने अपना मोबाइल मुझे दे दिया तो मैं चाहता था कि जल्द से जल्द अपना काम करके उसे मोबाइल लौटा दूं। इसी जल्दबाजी में मैंने फेसबुक खोला और कोठारी साहब को सन्देश भेजा- ‘सर, नौ साढे नौ बजे डलगेट पर मिलो। आज द्रास रुकेंगे।’ जैसे ही मैसेज गया, मैंने लॉग आउट करके मोबाइल वापस कर दिया। इसी जल्दबाजी में मैं यह देखना भूल गया कि कोठारी साहब...