Monday, August 23, 2010

अमरनाथ यात्रा- पिस्सू घाटी से शेषनाग

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अमरनाथ यात्रा की पैदल चढाई चन्दनवाडी से शुरू होती है। चन्दनवाडी पहलगाम से सोलह किलोमीटर आगे है। चन्दनवाडी से कठिन चढाई चढकर यात्री पिस्सू टॉप पहुंचते हैं। पिस्सू टॉप तक का रास्ता काफी मुश्किल है, आगे का रास्ता कुछ कम मुश्किल है। कुछ दूर तक तो उतराई ही है। अधिकतर यात्री चन्दनवाडी से यहां तक खच्चर से आते हैं। आगे की यात्रा पैदल करते हैं। लेकिन कुछ यात्री ऐसे भी होते हैं, जो पिस्सू टॉप तक पैदल आते हैं और इस मुश्किल चढाई में उनका मामला गडबड हो जाता है। आगे चलने लायक नहीं रहते। इसलिये उन्हे आगे के अपेक्षाकृत सरल रास्ते में खच्चर करने पडते हैं। हमारे दल में मनदीप भी ऐसा ही था। पिस्सू टॉप तक पहुंचने में ही पैर जवाब दे गये और आगे शेषनाग के लिये खच्चर करना पडा।
यह इलाका समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर है, इसलिये सूर्य की किरणें बहुत तीखी लगती हैं। उनसे बचने के लिये कोल्ड क्रीम लगानी पडती है। कोल्ड क्रीम मनदीप के पास थी, लेकिन उसके खच्चर पर जाने से पहले ही सभी ने अपने-अपने मुंह पोत लिये थे। यहां भी शहंशाह भागमभाग में लगा था। बिल्लू की हालत भी काफी खराब थी। इसके बावजूद भी उसने खच्चर नहीं किया, फलस्वरूप सबसे पीछे चल रहा था। बाकी मैं, कालू और धर्मबीर साथ-साथ थे।
हिमालय की ऊंचाइयों में एक खास बात है कि यहां दोपहर बाद मौसम खराब होने लगता है। दो बजे के बाद यहां भी मौसम बदलने लगा। जहां थोडी देर पहले तीखी धूप पड रही थी, अब बाद्ल छा गये। बादल छाते ही कडकडाती ठण्ड लगनी शुरू हो गयी। नीचे की तरफ से काले बादल भी दिखने लगे। अब हम समझ गये कि कुछ देर बाद बारिश भी हो सकती है। इसलिये हमने अपनी चलने की स्पीड तेज कर दी। मन में था कि बारिश होने से पहले शेषनाग पहुंच जाये।
लेकिन हमारे शेषनाग पहुंचने से पहले ही बारिश भी हो गयी। रेनकोट साथ लाये थे, इसलिये बच गये। नहीं तो किसी बडे से पत्थर के नीचे बैठना पडता। यात्रा में काफी संख्या में साधु आते हैं। इनमें से ज्यादातर बहुत कम कपडों में होते हैं। कोई-कोई तो नंगे पैर होता है। बारिश हुई तो सभी पत्थरों के नीचे बैठ गये। इन बडे-बडे पत्थरों से तेज हवा से भी बचाव हो रहा था और बारिश से भी।
खैर, बारिश होती रही और हम शेषनाग झील के पास जा पहुंचे। यह चन्दनवाडी से 15-16 किलोमीटर दूर है। चन्दनवाडी के बाद रात बिताने का इन्तजाम यही पर है। इसलिये चन्दनवाडी से निकलने के बाद हर एक यात्री को शेषनाग पहुंचना ही पडता है।

PISSOO TOP
अब हम पिस्सू टॉप से निकल चुके हैं। पीछे मुडकर देखने पर ऐसा दिखता है पिस्सू टॉप।

MANDEEP AND ME
अब हम पिस्सू टॉप से निकल चुके हैं। पीछे मुडकर देखने पर ऐसा दिखता है पिस्सू टॉप।
दो लठधारी जाट। मनदीप और मैं।
PITTHOO
बोझा ढोने का सारा काम इन स्थानीय मुसलमानों का ही है।

SHOO-SHOO
अबे, कहां खडा होकर शू-शू कर रहा है।

AMARNATH YATRA
आज का लक्ष्य है- शेषनाग।

SURAKSHA CHAUKI
यह है यहां की सुरक्षा चौकी। चौकी के पीछे चारों तरफ बरफ है।

MANDEEP
जब मनदीप के घुटने जवाब दे गये तो बेचारे को खच्चर करना पडा। फोटू खिंचवाने में शर्म आयी तो मुंह ढक लिया।

NATURE
रास्ते में पडने वाले दृश्य मन मोह लेते हैं।

SHEEP
पहलगाम के गडरिये इतनी दूर तक भेड चराने आते हैं। सर्दियां खत्म होने के बाद बरफ पिघलती है तो जमीन पर घास उगने लगती है।
इसी तरह के किसी गडरिये बूटा मलिक ने अमरनाथ गुफा की खोज की थी।

NATURE 2
A SADHU
साधु भी बडी संख्या में अमरनाथ जाते हैं।

JOJPAL
सामने है जोजपाल। यह असल में एक चरागाह है। लेकिन आजकल यहां भण्डारे लगे हुए हैं।

EATING PAKAUDI
चाय पकौडी का मजा लो और आगे बढो।

WAITING FOR FOOD
भण्डारों के बाहर स्थानीय लोगों का जमावडा लगा रहता है। इसका कारण है कि भण्डारों में इन लोगों को आने नहीं दिया जाता। कहीं कहीं इनका टाइम निर्धारित होता है कि इस समय के बाद आओ। कहीं –कहीं तो इनके लिये मुख्य भण्डारे की बगल में एक छोटा सा भण्डारा होता है जहां इन्हे चाय, रोटी, सब्जी मिल जाते हैं। जबकि यात्रियों के लिये एक से एक बढकर आइटम होता है।

AMARNATH YATRI
जय बाबा बर्फानी

WATER
पूरी यात्रा के पैदल मार्ग में जम्मू-कश्मीर पुलिस नहीं दिखी। जबकि सीआरपी, बीएसएफ व सेना जगह-जगह यात्रियों की सेवा में लगी थी। यहां सुरक्षा बल पानी पिला रहे हैं।

YATRA
NEAR A WATERFALL
इस झरने तक आते-आते मौसम खराब होने लगा था।

NEERAJ
जल्दबाजी में एक फोटू खिंचवाया और भाग चले।

LIDDAR RIVER
दूर नीचे जाती लिद्दर। लिद्दर नदी शेषनाग झील से ही निकलती है।

GREAT AMARNATH YATRA
AMARNATH YATRA 2
SHESHNAG
और वो दिख गयी शेषनाग झील।
झील के उस ओर बायीं तरफ तम्बू नगरी बसी है। आज रात्रि विश्राम वहीं पर होगा।

अगला भाग: शेषनाग झील

अमरनाथ यात्रा
1. अमरनाथ यात्रा
2. पहलगाम- अमरनाथ यात्रा का आधार स्थल
3. पहलगाम से पिस्सू घाटी
4. अमरनाथ यात्रा- पिस्सू घाटी से शेषनाग
5. शेषनाग झील
6. अमरनाथ यात्रा- महागुनस चोटी
7. पौषपत्री का शानदार भण्डारा
8. पंचतरणी- यात्रा की सुन्दरतम जगह
9. श्री अमरनाथ दर्शन
10. अमरनाथ से बालटाल
11. सोनामार्ग (सोनमर्ग) के नजारे
12. सोनमर्ग में खच्चरसवारी
13. सोनमर्ग से श्रीनगर तक
14. श्रीनगर में डल झील
15. पटनीटॉप में एक घण्टा

14 comments:

  1. सर्दी नहीं लगी.. जैकेट नही टांगा?

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  2. जय बर्फानी बाबा!!!

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  3. रोचक यात्रा वृत्तांत. फोटू तो गजब के हैं.

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  4. बहुत ही सुन्दर और मनमोहक फोटो है । और लेखन का तो जवाब ही नहीं। । पढ़ते-पढ़ते लगा कि हम भी उन रास्तों पर चल रहे है।

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  5. जाट तो खुद ही लट्ठ होते हैं, इन्हें लट्ठ धारण करने की क्या जरुरत थी। :)

    प्रणाम

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  6. बहुत ही लाजवाब चित्र और रोचक विवरण.

    रामराम.

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  7. अरे नीरज क्यो दिल दुखा रहा है, इतने सुंदर सुंदर चित्र दिखा कर, सच कहूं तो दिल करता है कि अभी उड कर आ जाऊ, बहुत मनमोहक लगे सभी चित्र, धन्यवाद

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  8. बहुत ही सुन्दर और जीवन्त चित्र।

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  9. यात्रा जितनी कठिन होती है फोटुएं उतनी ही सुंदर आती हैं।
    यह भी एक रहस्य ही है :-)

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  10. भण्डारों के बाहर स्थानीय लोगों का जमावडा लगा रहता है। इसका कारण है कि भण्डारों में इन लोगों को आने नहीं दिया जाता। कहीं कहीं इनका टाइम निर्धारित होता है कि इस समय के बाद आओ। कहीं –कहीं तो इनके लिये मुख्य भण्डारे की बगल में एक छोटा सा भण्डारा होता है जहां इन्हे चाय, रोटी, सब्जी मिल जाते हैं। जबकि यात्रियों के लिये एक से एक बढकर आइटम होता है।
    any specific reason for this.....

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  11. बड़े ही खूबसूरत दृश्य दिखा रहे हैं आप अपने कैमरे से!

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  12. फोटो मनमोहक है

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