इस यात्रा-वृत्तांत को आरंभ से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें । 27 अगस्त 2017 नागपुर-इटारसी पैसेंजर 51829 इस मार्ग से मैं पता नहीं कितनी बार यात्रा कर चुका हूँ, लेकिन पहली यात्रा हमेशा याद रहेगी। उस समय मुझे हैदराबाद जाना था और मैंने दक्षिण एक्सप्रेस इसलिए चुनी थी क्योंकि इसके सबसे ज्यादा ठहराव थे। रात निज़ामुद्दीन से चलकर झाँसी तक सुबह हो गयी थी। फिर झाँसी से नागपुर तक मैंने कभी खिड़की पर, तो कभी दरवाजे पर ही यात्रा की व रास्ते मे आने वाले छोटे-बड़े सभी स्टेशन व उनकी ऊँचाई नोट कर ली थी। उस समय मेरे पास कैमरा नहीं हुआ करता था और मुझे रेलयात्राओं में यही सब नोट करने व उनका रिकार्ड रखने का शौक था। तो उसी दिन इटारसी से नागपुर का मार्ग भी देखा। तसल्ली से। सतपुड़ा के पहाड़ों को पार करना होता है और इन्हें देखकर आनंद आ गया था। तभी सोच लिया था कि इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेन से भी यात्रा करूँगा। आज वो मौका मिला। मौके तो पहले भी मिले थे, लेकिन मानसून की बात ही अलग है। आप किसी ऐसे मार्ग पर यात्रा कर रहे हों, तो मानसून तक इंतजार कर लेना ठीक रहता है।
नीरज मुसाफिर का यात्रा ब्लॉग