Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Konkan

दक्षिण भारत यात्रा के बारे में

कई बार हम जो चाहते हैं, वैसा नहीं होता। इस बार हमारे साथ भी वैसा ही हुआ। हम असल में दक्षिण भारत की यात्रा नहीं करना चाहते थे, बल्कि पूर्वोत्तर में पूरी सर्दियाँ बिता देना चाहते थे। लेकिन दूसरी तरफ हम दक्षिण से भी बंधे हुए थे। सितंबर 2018 में जब हम कोंकण यात्रा पर थे, तो अपनी मोटरसाइकिल गोवा में ही छोड़कर दिल्ली लौट आए थे। अब चाहे हमारी आगामी यात्रा पूर्वोत्तर की हो या कहीं की भी हो, हमें गोवा जरूर जाना पड़ता - अपनी मोटरसाइकिल लेने। दक्षिण तो मानसून में भी घूमा जा सकता है, लेकिन पूर्वोत्तर घूमने का सर्वोत्तम समय होता है सर्दियाँ। सिक्किम और अरुणाचल के ऊँचे क्षेत्रों को छोड़ दें, तो पूरा पूर्वोत्तर सर्दियों में ही घूमना सर्वोत्तम होता है। पिछले साल से ही हमारी योजना इस फरवरी में अरुणाचल में विजयनगर जाने की थी और हम इसके लिए तैयार भी थे। एक साल की छुट्टियाँ भी इसीलिए ली गई थीं, ताकि पूर्वोत्तर को अधिक से अधिक समय दे सकें और भारत के इस गुमनाम क्षेत्र को हर मौसम में हर कोण से देख सकें और आपको दिखा भी सकें। लेकिन हम बंधे हुए थे गोवा से। भले ही विजयनगर जाने में मोटरसाइकिल का बह...

गोवा में दो दिन - पलोलम बीच

25 सितंबर 2018 सुबह जब चले थे, तो परिचित ने पूछा - “आज कहाँ जाओगे?” “देखते हैं। कल नॉर्थ गोवा घूम लिया, आज शायद साउथ गोवा जाएँगे।” “अरे कुछ नहीं है साउथ गोवा में। वहाँ कुछ भी नहीं है। सबकुछ नॉर्थ गोवा में ही है। तुम भी अजीब लोग हो। साउथ गोवा जा रहे हो? जो बात नॉर्थ में है, वो साउथ में थोड़े ही है?” “इसका मतलब हमें साउथ गोवा ही जाना चाहिए।” मैंने दीप्ति से कहा और उसने एकदम हाँ कर दी।

गोवा में दो दिन - जंगल और पहाड़ों वाला गोवा

25 सितंबर 2018 अक्सर हम सोचते हैं कि गोवा में केवल बीच ही हैं, केवल समुद्री एक्टिविटी ही हैं। ये बीच, वो बीच, ये एक्टिविटी, वो एक्टिविटी और गोवा खत्म। जबकि ऐसा नहीं है। यहाँ पश्चिमी घाट के बहुत ऊँचे-ऊँचे पर्वत हैं और ऊँचाई से गिरते जलप्रपात भी हैं। और इनसे भी ज्यादा... घने जंगल भी हैं। तो आज हम दूधसागर जलप्रपात की ओर चल दिए। कई साल पहले जब मैं दूधसागर गया था, तो रेलवे लाइन के साथ-साथ चला गया था। तब इतनी सख्ताई नहीं थी। जबकि अब बहुत सख्ताई है। दूधसागर का सबसे शानदार नजारा केवल रेलवे लाइन से ही दिखता है। इस कारण रेलवे लाइन पर इतनी भीड़ जमा हो जाया करती थी कि रेल यातायात बाधित होता था। कई बार दुर्घटनाएँ भी हो जाया करती थीं। तो रेलवे ने अब रेलवे ट्रैक के साथ-साथ पैदल जाने पर रोक लगा दी है। लेकिन यहाँ एक चक्कर और भी है। दूधसागर जलप्रपात भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंदर है। यहाँ जाने के लिए वन कानून लागू होता है। और शायद आपको पता हो कि ज्यादातर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सेंचुरी मानसून में पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं। फिर भी हम दूधसागर की ओर चल दिए। इसके लिए हमें सबसे पहले पहुँचना था ...

गोवा में दो दिन - ओल्ड गोवा और कलंगूट, बागा बीच

24 सितंबर 2018 आज हमारा गोवा में पहला दिन था और हम अपने एक परिचित के यहाँ थे। परिचित वैसे तो मूलरूप से यूपी में मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं, लेकिन कई सालों से गोवा में रहते-रहते अब गोवा निवासी ही हो गए हैं। हम इस यात्रा की कुछ भी तैयारी करके नहीं आए थे, तो उन्होंने हमारा कार्यक्रम इस प्रकार बनाया... “सबसे पहले ऐसे-ऐसे जाओ, ऐसे-ऐसे जाओ और सबसे पहले पहुँचो बोम जीसस। वह ओल्ड गोवा में है और ओल्ड गोवा का अलग ही चार्म है। फिर उधर से कलंगूट बीच जाओ। गोवा में जो भी कुछ है, सब कलंगूट पर ही है। बार, क्लब, कैसीनो सभी वहीं हैं। फलां कैसीनो बड़ा जोरदार है और पूरे गोवा में तो छोड़िए, पूरी दुनिया में उसकी टक्कर का कैसीनो मिलना मुश्किल है।” बाहर झाँककर देखा, तो घनी बसी कालोनी में नारियल के ही झुरमुट नजर आए। किसी शहर में कितनी हरियाली हो सकती है, आज हम देख रहे थे।

सतारा से गोवा का सफर वाया रत्‍नागिरी

22 सितंबर 2018 वैसे तो सतारा से कोल्हापुर और बेलगाम होते हुए गोवा लाभग 350 किलोमीटर दूर है, लेकिन हम यहाँ नए-नए रास्तों पर घूमने आए थे। समय की हमारे पास कोई पाबंदी नहीं थी। अभी भी कई दिनों की छुट्टियाँ बाकी थीं और हमारे सामने जो भी कुछ था, वह सब नया ही था। हम कभी भी इस क्षेत्र में नहीं आए थे। इसलिए चार-लेन की सड़क से कोल्हापुर होते हुए जाना रद्द करके रत्‍नागिरी और सिंधुदुर्ग होते हुए जाना तय किया। हम इतने दिनों से दो-लेन और सिंगल लेन की सड़कों पर घूम रहे थे। आज बड़े दिनों बाद चार-लेन की सड़क मिली। यह एन.एच. 48 था जो मुंबई-चेन्नई हाइवे भी कहा जाता है। यह भारत के सबसे शानदार हाइवे में से एक है। सतारा से कराड़ तक ही हमें इस पर चलना था और फिर रत्नागिरी की ओर मुड़ जाना था।

श्रीवर्धन बीच और हरिहरेश्वर बीच

20 सितंबर 2018 हमें नहीं पता था कि श्रीवर्धन इतना बड़ा है। कल हम जब यहाँ आए थे तो अंधेरा हो चुका था और गूगल मैप बता रहा था कि बस, इससे आगे कोई सड़क नहीं है। एक चौराहे पर खड़े होकर चारों ओर देखा, कोई नहीं दिखाई दिया। क्या यही है श्रीवर्धन? प्रतीक ने बताया था कि यहाँ होटल मिल जाएँगे। कहाँ हैं होटल? चलो, एक बार समुद्र की ओर चलकर देखते हैं। तो 600 रुपये का यह कमरा मिल गया। कमरा भी तब मिला, जब हमारे आवाज लगाने पर मालिक अपने घर से बाहर निकला - “आधा घंटा रुकिए, मैं सफाई कर देता हूँ।” “और इन मच्छरों का क्या करें? क्या ये भी आधा घंटा रुक जाएँगे? आप एक काम कीजिए, कमरा जैसा भी है, वैसा ही दे दीजिए। हमें कोई दिक्कत नहीं होगी।” “नहीं जी, ऐसा कैसे हो सकता है? बस, थोड़ा-सा टाइम दो मुझे।’’ “सामान तो रख लेने दो। आप सफाई करते रहना।” इसी दौरान मुझे समय मिल गया कमरे के अंदर घुसने का। ऐसा लगता था जैसे कोई अभी-अभी कमरा खाली करके गया हो। बिस्तर पर सिलवटें पड़ी हुई थीं, बस। लेकिन आधे घंटे बाद ऐसा लग रहा था जैसे कमरा अभी-अभी बनाकर रेडी किया है और हम पहले ही कस्टमर हैं। एकदम नई-नकोर चादरें और सेंट की खुशबू से कमरा म...

कोंकण में एक गुमनाम बीच पर अलौकिक सूर्यास्त

19 सितंबर 2018 मुंबई से गोवा जाने के यूँ तो बहुत सारे रास्ते हैं। सबसे तेज रास्ता है पुणे होकर, जिसमें लगभग सारा रास्ता छह लेन, फोर लेन है। दूसरा रास्ता है मुंबई-गोवा हाइवे, जो कोंकण के बीचोंबीच से होकर गुजरता है, खासकर रेलवे लाइन के साथ-साथ। और तीसरा रास्ता यह हो सकता है, जो एकदम समुद्र तट के साथ-साथ चलता है। यह तीसरा रास्ता कोई हाइवे नहीं है, केवल मान-भर रखा है कि अगर समुद्र के साथ-साथ चलते रहें तो गोवा पहुँच ही जाएँगे। यह आइडिया भी हमें उस दिन प्रतीक ने ही दिया था। उसी ने बताया था कि इस रास्ते पर मुंबई से गोवा के बीच पाँच स्थानों पर नाव से क्रीक पार करनी पड़ेगी। अन्यथा लंबा चक्कर काटकर आओ। उसी ने बताया था दिवेआगर बीच के बारे में और शेखाड़ी होते हुए श्रीवर्धन जाने के बारे में भी। शेखाड़ी बड़ी ही शानदार लोकेशन पर स्थित है। लेकिन इस शानदार गाँव के बारे में एक नकारात्मक खबर भी है। मुंबई ब्लास्ट में प्रयुक्त हुए हथियार और विस्फोटक समुद्री मार्ग से यहीं पर लाए गए थे और उन्हें ट्रकों में भरकर मुंबई पहुँचाया गया था। खबर यह रही । लेकिन जैसे ही शेखाड़ी पार किया, हम किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए कि रुकें...

दिवेआगर बीच: खूबसूरत, लेकिन गुमनाम

19 सितंबर 2018 हमें दिवेआगर बीच बहुत अच्छा लगा। चार किलोमीटर लंबा और काली रेत का यह बीच है। यहाँ ठहरने के लिए होमस्टे और होटल भी बहुत सारे हैं। यानी गुमनाम-सा होने के बावजूद भी यह उतना गुमनाम नहीं है। मुंबई से इसकी दूरी लगभग 150 किलोमीटर है और यहाँ होटलों की संख्या देखकर मुझे लगता है कि वीकेंड पर बहुत सारे यात्री आते होंगे। हम उत्तर भारतीयों ने तो गोवा के अलावा किसी अन्य स्थान का नाम ही नहीं सुना है, तो मेरी यह पोस्ट उत्तर भारतीयों के लिए है। घूमना सीखिए... चार किलोमीटर लंबे इस बीच पर आज अभी हमारे अलावा कोई भी नहीं था। साफ सुथरा, काली रेत का बीच और ढलान न के बराबर होने के कारण बड़ी दूर तक समुद्र का पानी उस तरह फैला था कि न तो उसमें पैर भीगते थे और न ही वह सूखा दिखता था। ऐसा लगता था जैसे काँच पर खड़े हों। हर तरफ समुद्री जीवों के अवशेष थे और पक्षी उन्हें खाने के लिए मंडरा रहे थे। केवल पक्षी ही नहीं, केकड़े भी खूब दावत उड़ा रहे थे। इसी रेत में ये बिल बनाकर रहते हैं और किसी खतरे का आभास होते ही टेढ़ी चाल से दौड़ते हुए बिल में जा दुबकते हैं। इन्हें टेढ़े-टेढ़े दौड़ते देखना भी खासा मजेदार होता है। ...

जंजीरा किले के आसपास की खूबसूरती

19 सितंबर 2018 उस दिन मुंबई में अगर प्रतीक हमें न बताता, तो हम पता नहीं आज कहाँ होते। कम से कम जंजीरा तो नहीं जाते और दिवेआगर तो कतई नहीं जाते। और न ही श्रीवर्धन जाते। आज की हमारी जो भी यात्रा होने जा रही है, वह सब प्रतीक के कहने पर ही होने जा रही है। सबसे पहले चलते हैं जंजीरा। इंदापुर से जंजीरा की सड़क एक ग्रामीण सड़क है। कहीं अच्छी, कहीं खराब। लेकिन आसपास की छोटी-छोटी पहाड़ियाँ खराब सड़क का पता नहीं चलने दे रही थीं। हरा रंग कितने प्रकार का हो सकता है, यह आज पता चल रहा था। रास्ते में एक नदी मिली। इस पर पुल बना था और पानी लगभग ठहरा हुआ था। यहाँ से समुद्र ज्यादा दूर नहीं था और ऊँचाई भी ज्यादा नहीं थी, इसलिए पानी लगभग ठहर गया था। ऐसी जगहों को ‘क्रीक’ भी कहते हैं। दोनों तरफ वही छोटी-छोटी पहाड़ियाँ थीं और नजारा भी वही मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। जंजीरा गाँव एक गुमसुम-सा गाँव है। गूगल मैप के अनुसार सड़क समाप्त हो गई थी और यहीं कहीं जंजीरा किले तक जाने के लिए जेट्टी होनी चाहिए थी, लेकिन हमें मिल नहीं रही थी। अपने घर के बाहर बैठे एक बुजुर्ग ने हमारे रुकते ही हमारी मनोदशा समझ ली और बिना कुछ बोले एक...