9 फरवरी 2018 रात तक हमारा इरादा चेरापूंजी पहुँचने का था। वैसे तो चेरापूंजी यहाँ से लगभग 80 किलोमीटर दूर है, लेकिन हमने एक लंबे रास्ते से जाने का इरादा किया। डौकी पुल पार करने के दो किलोमीटर बाद यह मुख्य सड़क तो सीधी चली जाती है और एक सड़क बाएँ जाती है, जो रिवाई होते हुए आगे इसी मुख्य सड़क में मिल जाती है। रिवाई के पास ही मावलिननोंग गाँव है, जो एशिया का सबसे साफ-सुथरा गाँव माना जाता है। इसके आसपास भी कुछ दर्शनीय स्थान हैं। उन्हें देखते हुए हम चेरापूंजी जाएँगे। तो रिवाई का यह रास्ता बांग्लादेश सीमा के एकदम साथ-साथ चलता है। रास्ता तो पहाड़ पर है, लेकिन बीस-तीस मीटर नीचे ही पहाड़ समाप्त हो जाता है और मैदान शुरू हो जाता है। मैदान पूरी तरह बांग्लादेश में है और पहाड़ भारत में। अर्थात् हम अंतर्राष्ट्रीय सीमा से केवल बीस-तीस मीटर दूर ही चल रहे थे। यहीं सड़क से जरा-सा नीचे सोंग्रामपुंजी जलप्रपात भी है। चूँकि जलप्रपात एकदम सीमा पर है, तो बांग्लादेशी खूब आते हैं यहाँ। इस जलप्रपात की गिनती बांग्लादेश के प्रमुख प्रपातों में होती है। और थोड़ा आगे चलने पर बोरहिल प्रपात मिला। एकाध बूंद ही पानी टपक रहा था इस स...
नीरज मुसाफिर का यात्रा ब्लॉग