8 मार्च 2019 हम ऊटी में थे और आज पूरे दिन ऊटी में ही रहने वाले थे। ऊटी के कुछ दर्शनीय स्थलों की लिस्ट दीप्ति ने बना रखी थी और मुझे भी उन स्थलों पर जाना ही था। मुझे पहली नजर में ऊटी पसंद नहीं आया था, पता नहीं क्यों। तो लिस्ट के अनुसार जहाँ-जहाँ भी गए, सभी जगहें दीप्ति को नापसंद होती चली गईं। और उसे ऊटी के भीड़-भरे टूरिस्ट स्पॉट्स भला पसंद भी क्यों आएँगे! पहले ‘रोज गार्डन’ गए, लेकिन वहाँ एक ही क्यारी में कुछ फूल खिले थे। कर्मचारी कह रहे थे कि सभी फूल देखने अप्रैल में आना। ऊटी लेक गए, तो यह देखकर हैरान रह गए कि अलग-अलग नाव ठेकेदारों ने झील के भी अपने-अपने हिस्से बाँट रखे हैं। मोटर बोट पैडल बोट के हिस्से में नहीं जा सकती और पैडल बोट चप्पू वाले हिस्से में नहीं जा सकती। यहाँ तक कि आप झील के किनारे पर भी तभी बैठ पाएँगे, जब आपने उस हिस्से वाली बोट का टिकट लिया हो। यहाँ से भी वापस भाग लिए। वापस होटल आए और “हाय गर्मी, हाय गर्मी” कहते सो गए। हालाँकि ऊटी में गर्मी नहीं थी।
नीरज मुसाफिर का यात्रा ब्लॉग