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Showing posts with the label Diary

घुमक्कड पत्रिका- 2

1. सम्पादकीय 2. लेख A. ब्लॉगिंग: एकल या सामूहिक B. किसी ब्लॉग को कैसे फॉलो करें? 3. यात्रा-वृत्तान्त A. पहाड तो आपके अपने हैं, इन्हें क्यों गन्दा करते हो? (अंशुल ग्रोवर) B. घुमक्कड और घुमक्कडी से साक्षात्कार (डॉ. सुमित शर्मा) 4. ब्लॉग अपडेट

घुमक्कड पत्रिका- 1

1. सम्पादकीय 2. लेख A. घुमक्कडी क्या है और कैसे घुमक्कडी करें? B. असली जीटी रोड 3. यात्रा-वृत्तान्त A. रानीखेत-बिनसर यात्रा B. सावन में ज्योतिर्लिंग ओमकारेश्वर की परिक्रमा व दर्शन 4. ब्लॉग अपडेट

डायरी के पन्ने- 33

नोट: डायरी के पन्ने यात्रा-वृत्तान्त नहीं हैं। 1. हमारा एक व्हाट्स एप ग्रुप है- `घुमक्कडी... दिल से'। इसमें वे लोग शामिल हैं जो घूमते हैं और फिर उसे ब्लॉग पर लिखते भी हैं। लेकिन इसमें कुछ ऐसे भी लोग हैं जो साल में एकाध यात्रा-पोस्ट डाल देते हैं। इनमें दर्शन कौर धनोए प्रमुख हैं। कुछ तो ऐसे भी लोग हैं जो न लिखते हैं और न ही कहीं घूमने जाते हैं। ये लोग बेवजह आकर बेकार की बातें करते थे। मुझे इन लोगों से आपत्ति थी और एक बार ग्रुप छोड भी दिया था लेकिन एडमिन साहब अपने बेहद नजदीकी हैं, इसलिये पुनः शामिल हो गया। एक दिन प्रदीप चौहान ने अपने ब्लॉग का लिंक शेयर किया- safarhaisuhana.blogspot.in । उधर रीतेश गुप्ता जी के ब्लॉग का यूआरएल है- safarhainsuhana.blogspot.in । जाहिर है कि दोनों में एक N का फर्क है। रीतेश गुप्ता भी इस ग्रुप में शामिल हैं। प्रदीप ने हम सबसे अपना ब्लॉग पढने और टिप्पणी करने की गुजारिश की थी। मेरा दूसरों के यात्रा-वृत्तान्त पर टिप्पणी करने का कडवा अनुभव रहा है, इसलिये आजकल मैं न कोई यात्रा ब्लॉग पढता हूं और न ही टिप्पणी करता हूं; एकाध को छोडकर। मैं जब कोई यात्रा-वृत्तान्...

डायरी के पन्ने-32

ध्यान दें: डायरी के पन्ने यात्रा-वृत्तान्त नहीं हैं। इस बार डायरी के पन्ने नहीं छपने वाले थे लेकिन महीने के अन्त में एक ऐसा घटनाक्रम घटा कि कुछ स्पष्टीकरण देने के लिये मुझे ये लिखने पड रहे हैं। पिछले साल जून में मैंने एक पोस्ट लिखी थी और फिर तीन महीने तक लिखना बन्द कर दिया। फिर अक्टूबर में लिखना शुरू किया। तब से लेकर मार्च तक पूरे छह महीने प्रति सप्ताह तीन पोस्ट के औसत से लिखता रहा। मेरी पोस्टें अमूमन लम्बी होती हैं, काफी ज्यादा पढने का मैटीरियल होता है और चित्र भी काफी होते हैं। एक पोस्ट को तैयार करने में औसतन चार घण्टे लगते हैं। सप्ताह में तीन पोस्ट... लगातार छह महीने तक। ढेर सारा ट्रैफिक, ढेर सारी वाहवाहियां। इस दौरान विवाह भी हुआ, वो भी दो बार। आप पढते हैं, आपको आनन्द आता है। लेकिन एक लेखक ही जानता है कि लम्बे समय तक नियमित ऐसा करने से क्या होता है। थकान होने लगती है। वाहवाहियां अच्छी नहीं लगतीं। रुक जाने को मन करता है, विश्राम करने को मन करता है। इस बारे में मैंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा भी था कि विश्राम करने की इच्छा हो रही है। लगभग सभी मित्रों ने इस बात का समर्थन किया था।