चूडधार की यात्रा कथा तो पढ ही ली होगी। ट्रेकिंग पर जाते हुए मैं जीपीएस से कुछ डाटा अपने पास नोट करता हुआ चलता हूं। यह अक्षांस, देशान्तर व ऊंचाई होती है ताकि बाद में इससे दूरी-ऊंचाई नक्शा बनाया जा सके। आज ज्यादा कुछ नहीं है, बस यही डाटा है। अक्षांस व देशान्तर पृथ्वी पर हमारी सटीक स्थिति बताते हैं। मैं हर दस-दस पन्द्रह-पन्द्रह मिनट बाद अपनी स्थिति नोट कर लेता था। अपने पास जीपीएस युक्त साधारण सा मोबाइल है जिसमें मैं अपना यात्रा-पथ रिकार्ड नहीं कर सकता। हर बार रुककर एक कागज पर यह सब नोट करना होता था। इससे पता नहीं चलता कि दो बिन्दुओं के बीच में कितनी दूरी तय की। बाद में गूगल मैप पर देखा तो उसने भी बताने से मना कर दिया। कहने लगा कि जहां सडक बनी है, केवल वहीं की दूरी बताऊंगा। अब गूगल मैप को कैसे समझाऊं कि सडक तो चूडधार के आसपास भी नहीं फटकती। हां, गूगल अर्थ बता सकता है लेकिन अपने नन्हे से लैपटॉप में यह कभी इंस्टाल नहीं हो पाया।
नीरज मुसाफिर का यात्रा ब्लॉग

पढ़ा आज के अखबार में। सुन्दर।
ReplyDeleteविजयनगर का अंत मुग़लों, चोल और मराठाओं के आक्रमण से नहीं हुआ था। अहमदनगर, बीजापुर, बेरार, गोलकोण्डा और बीदर के सुल्तानों ने मिलकर हमला किया था। बड़ी सेना होने पर भी अंत में अपने ही कुछ मुस्लिम सरदारों द्वारा धोखा दिया जाने पर विजयनगर की हार हुई। तलीकोटा के युद्ध के बारे में पढ़ें।
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