जोधपुर- मुनाबाव रेल लाइन

July 13, 2011
बात पिछले साल अक्टूबर की है। अपनी रेल यात्राओं के सिलसिले को आगे बढाते हुए मैं जोधपुर पहुंच गया। वैसे मुझे जोधपुर में कोई काम था भी नहीं बस जैसलमेर और मुनाबाव तक की लाइनों पर पैसेंजर ट्रेन में घूमना था। जैसलमेर की कहानी फिर कभी सुनाई जायेगी, आज मुनाबाव चलते हैं।
जहां तक मुझे जानकारी है, कुछ साल पहले तक पूरे राजस्थान में मीटर गेज लाइनों का जाल बिछा हुआ था। यहां तक कि राजस्थान के बिल्कुल बीचोंबीच से गुजरने वाली दिल्ली- जयपुर- अजमेर- अहमदाबाद लाइन भी मीटर गेज ही थी। जोधपुर भी पूरी तरह मीटर गेज स्टेशन ही था। आजादी से पहले एक मीटर गेज लाइन यहां से बाडमेर होते हुए हैदराबाद जाती थी। यह हैदराबाद आज पाकिस्तान में है। भारत में किन्हीं भी दो स्टेशनों के नाम एक जैसे नहीं रखे जाते। यही कारण है कि आज आंध्र प्रदेश में जो हैदराबाद है उसके स्टेशन का नाम हैदराबाद डेक्कन है। जबकि 'हैदराबाद' पाकिस्तान में चले गये हैदराबाद का है।

आजादी हुई, बंटवारा हुआ, रेलवे लाइनें भी बंट गईं। इसी जोधपुर- हैदराबाद लाइन पर दो स्टेशन थे- मुनाबाव और खोखरापार। खोखरापार चला गया पाकिस्तान में और मुनाबाव भारत में रह गया। टाइम बदला, मीटर गेज ब्रॉड में बदल गई। मुनाबाव तक भी ब्रॉड गेज की लहर चली और वह भी बडा बन गया। हालांकि पाकिस्तान की तरफ मीटर गेज ही रहा। बाद में सीमा के आरपार थार एक्सप्रेस चलाने की बात आई तो पाकिस्तान अपने यहां की लाइन को भी बडी बनाने लगा और थार एक्सप्रेस चल पडी। इस प्रकार यह लाइन अमृतसर- लाहौर के बाद भारत- पाकिस्तान के बीच दूसरी लाइन बन गई।
अब मेरी बात। मैं जोधपुर में शाम को था। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार शाम को बाडमेर जाने वाली पैसेंजर (54813) से सुबह चार बजे तक बाडमेर पहुंच गया। बाडमेर से मुनाबाव के लिये एकमात्र पैसेंजर (54881) सुबह साढे सात बजे चलती है। बाडमेर से चलकर जसाई, खडीन (यह स्टेशन बन्द हो चुका है), भाचभर, रामसर, गागरिया, गडरा रोड, लीलमा, जैसिन्दर होते हुए आखिर में आता है मुनाबाव। मुनाबाव की समुद्र तल से ऊंचाई 79.27 मीटर है।
इनमें गडरा रोड की कहानी कुछ स्पेशल है। जहां भी किसी स्टेशन के नाम के साथ रोड शब्द जुडता है तो इसका मतलब है कि वो स्टेशन उस रोड वाले शहर या गांव से कुछ किलोमीटर दूर है। वहां जाने के लिये यहां से रोड जाती है। जैसे कि बागपत रोड जो बागपत से करीब चार किलोमीटर दूर है, मेडता रोड जो मेडता से 14 किलोमीटर दूर है, आबू रोड जो आबू से करीब तीस किलोमीटर दूर है आदि। तो जी, गडरा रोड भी कुछ ऐसा ही है। यहां से कुछ किलोमीटर दूर गडरा शहर या कस्बा है। लेकिन आज गडरा रोड स्टेशन पर उतरकर कोई भी गडरा नहीं पहुंच सकता। क्योंकि गडरा पाकिस्तान में चला गया है। गडरा रोड स्टेशन और कस्बे के बीच से सीमा रेखा खिंच गई है। नाम का ही गडरा रोड रह गया है। वैसे इसी तरह का एक स्टेशन नेपालगंज रोड भी है। नेपालगंज शहर नेपाल में है जबकि स्टेशन भारत में।
इसी तरह लीलमा की भी अलग कहानी है। अच्छा खासा स्टेशन, बाकायदा गाडी रुकती है, सवारियां चढती हैं लेकिन इसके साथ भी एक पंगा है। बेचारे का जिक्र किसी भी रेलवे साइट में नहीं है। erail.in को ले लो या indiarailinfo.com को, भारतीय रेल की वेबसाइट पर तो कोई मतलब ही नहीं है, इसका कहीं नाम नहीं है। कुछ महीनों पहले जब मैं जाट पहेलियां पूछता था, तो बंटी चोर अस्तित्व में आया था। वो पहेलियों के जवाब जगजाहिर करके पहेलियों का सत्यानाश करता था। उस समय बंटी को धूल चटाने वाला, दिन में तारे दिखाने वाला यह लीलमा ही था।
मुनाबाव सीमावर्ती स्टेशन है तो सेना के जवान भी इसका खूब इस्तेमाल करते हैं। यहां से बॉर्डर दो किलोमीटर दूर है। मेरा मकसद बॉर्डर देखना नहीं था। इसी ट्रेन से वापस चले आना था। लगे हाथों बाडमेर से जोधपुर तक की रेल यात्रा भी कर ली जाये। बाडमेर से चलकर जोधपुर तक ये स्टेशन पडते हैं- उतरलाई, कवास, बनिया सांडा धोरा, बायतु, भीमरलाई, गोल, तिलवाडा, खेड टेम्पल, बालोतरा, जानियाना, पारलू, समदडी जंक्शन, अजीत, मियां का बाडा, दुंदाडा, दूदिया, सतलाना, लूनी जंक्शन, हनवन्त, सालावास, बासनी और भगत की कोठी। आज के लिये इतना ही।











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14 Comments

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July 13, 2011 at 11:47 AM delete

पक्के घुमक्कड़ |
बधाई ||

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July 13, 2011 at 12:00 PM delete

:)
Aap Banjar mein rukiye, Shoja mein mat rukiye, wahan hotel thode se mehenge bhi hain aur doosra banjar rukne ka alag hi maja hai wahan jaake/rukke aapko aisa lagega ki jaise aap koi alien hain aur sab log aap hi ko ghorenge, mera do baar ka experience hai. ;)
Aur raghupur fort jaana jarur, aap jaise experienced aadmi ko sirf ek ghanta lagega chadhne mein, agar kismat achhi hui to Pin Trek ke darshan ho jaaenge, kismat-dhoop.
Jai Srikhand Mahadev!

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July 13, 2011 at 12:45 PM delete

bhai is side to mujhko b le chalte.. aur jab border 2 km dur hi tha tab to aapne trip ka satyanash sa kar diya.. are pakistan waalo ko b jaat bhai k darshan ho jaate.
mujhe b is side m pakistan ka border dekhna h, b.ed karne ke liye jodhpur ja raha hu sayad waha tak b pauch jau.
vaise b.ed karne ke liye kon sa jila thik rahega? jodhpur, bikaner, udaipur (in 3no main govt college h) baki pvt to kahi se b ho jayegi.
please suggest.. :)

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July 13, 2011 at 2:02 PM delete

नीरज भाई मान गए आप को आप भी इतनी अच्छी जानकारी कैसे प्राप्त कर लेते हो और हम तक पंहुचा देते हो ये शहर पहले भारत में था अब पाकिस्तान मे चला गया वगैरा -वगैरा .....और सभी स्टेशन का फोटो भी लेते हो .. धन्यवाद् ...

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July 13, 2011 at 6:14 PM delete

बटवारे ने ट्रेन का प्रवाह भी रोक दिया था।

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July 13, 2011 at 9:25 PM delete

रोचकता और जानकारी का अनूठा संगम होती हैं आपकी पोस्ट्स.

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July 13, 2011 at 10:38 PM delete

मुनाबाब के बारे में जान कर अच्छा लगा। जोधपुर तो आना जाना रहता है। बाड़मेर भी हो आए हैं। लेकिन बस से, ट्रेन से नहीं।

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July 14, 2011 at 1:26 PM delete

Neeraj ji, is jaankari ke liye aapka dhanyavad..

Maine bhi kuch likhane prayas kiya hain, samay mile to gaur karna...

http://www.ghumakkar.com/2011/07/14/%E0%A4%86%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%AC%E0%A5%82-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AE/

dhanyavad

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July 15, 2011 at 12:22 AM delete

शायद इसी लाईन पर एक स्टेशन है जहाँ फ़ाटक पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं है और फ़ाटक से पहले ट्रेन को रोककर ट्रेन का गार्ड जाकर फ़ाटक गिराता है, फ़िर फ़ाटक पार करके ट्रेन रुकती है। गार्ड साहब फ़ाटक खोलते हैं और उसके बाद कहीं ट्रेन चलती है। पढ़ा था कभी, अब मालूम नहीं व्यवस्था बदल गई है या वैसे ही है।

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July 18, 2011 at 3:12 AM delete

बहुत सही...घूमते रहो....

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August 4, 2011 at 3:10 PM delete

चित्रों ने पूरी यात्रा बयाँ कर दी | हमारे यंहा भी अभी तक मीटर गेज लाइन ही है|

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December 24, 2011 at 3:28 PM delete

just try fastest pnr status cheking at railway123.com

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Anonymous
October 17, 2015 at 4:35 PM delete

Bhai Sahab, Main Bhi Dec 2015 main is Route ko karne ki yojna banai hai aap se Anurodh kripya batayen ko kya kisi prakar ki permission to nahi leni padti hai Munabao ke liye. Sarju Prasad Mishra sarjuprasadmishra@gmail.com

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October 17, 2015 at 10:51 PM delete

नहीं सरजू प्रसाद जी, मुनाबाव जाने के लिये किसी परमिशन की जरुरत नहीं है। बस ट्रेन का टिकट लो और बैठ जाओ। पैसेंजर ट्रेन है और सभी जनरल डिब्बे हैं। भीड नहीं होती।

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