Skip to main content

टीबी रेलवे स्टेशन

टीबी रेलवे स्टेशन राजस्थान में सादुलपुर से हनुमानगढ़ वाली लाइन पर स्थित है। यह लाइन अभी मीटर गेज है। किसी समय इस लाइन पर सीधे जयपुर से गाड़ियाँ आती थीं।
आजकल भारत में बड़ी तेजी से गेज परिवर्तन का काम चाल रहा है। इस इलाके में भी कभी मीटर गेज का जाल फैला था लेकिन अब केवल सादुलपुर-श्रीगंगानगर खंड ही बचा है। जयपुर-चुरू और सीकर-लोहारू खंड भी मीटर गेज हैं। बीकानेर मीटर गेज भी बदला जा चुका है लेकिन वहां अभी गाड़ियाँ नहीं चली हैं। श्रीगंगानगर से आगे वाले मीटर गेज को भी बंद किया जा चुका है।
इस मार्ग पर चार गाड़ियाँ चलती हैं। सभी सादुलपुर से श्रीगंगानगर जाती हैं।

Comments

  1. राजस्थान में रेत के टीबे बहुत हैं। एकवचन टीबा हुआ और उस का स्त्रीलिंग टीबी।

    ReplyDelete
  2. अच्छी जानकारी

    वैसे दिनेशराय द्विवेदी ने अच्छा समझाया

    ReplyDelete
  3. कुछ दिनों में मीटरगेज नहीं दिखेगा, सब एक जैसा।

    ReplyDelete
  4. इस स्टेशन का नाम पढ कर तो अजीब सा लगा... लेकिन दिनेश जी ने सही समझाया, लेकिन यह मीटर गेज क्या चीज होती हे? शायद दो लाईनो के बीच के फ़ांसले को मीटर गेज कहते होंगे ना ?

    ReplyDelete
  5. TB रेलवे स्टेशन...सुनकर कित्ता अजीब लगता है.

    ________________________
    'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.

    ReplyDelete
  6. अरे वह । ऐसे स्टेशन भी है हमारे हिंदुस्तान मे

    गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाए

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

स्टेशन से बस अड्डा कितना दूर है?

आज बात करते हैं कि विभिन्न शहरों में रेलवे स्टेशन और मुख्य बस अड्डे आपस में कितना कितना दूर हैं? आने जाने के साधन कौन कौन से हैं? वगैरा वगैरा। शुरू करते हैं भारत की राजधानी से ही। दिल्ली:- दिल्ली में तीन मुख्य बस अड्डे हैं यानी ISBT- महाराणा प्रताप (कश्मीरी गेट), आनंद विहार और सराय काले खां। कश्मीरी गेट पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। आनंद विहार में रेलवे स्टेशन भी है लेकिन यहाँ पर एक्सप्रेस ट्रेनें नहीं रुकतीं। हालाँकि अब तो आनंद विहार रेलवे स्टेशन को टर्मिनल बनाया जा चुका है। मेट्रो भी पहुँच चुकी है। सराय काले खां बस अड्डे के बराबर में ही है हज़रत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन। गाजियाबाद: - रेलवे स्टेशन से बस अड्डा तीन चार किलोमीटर दूर है। ऑटो वाले पांच रूपये लेते हैं।

ट्रेन में बाइक कैसे बुक करें?

अक्सर हमें ट्रेनों में बाइक की बुकिंग करने की आवश्यकता पड़ती है। इस बार मुझे भी पड़ी तो कुछ जानकारियाँ इंटरनेट के माध्यम से जुटायीं। पता चला कि टंकी एकदम खाली होनी चाहिये और बाइक पैक होनी चाहिये - अंग्रेजी में ‘गनी बैग’ कहते हैं और हिंदी में टाट। तो तमाम तरह की परेशानियों के बाद आज आख़िरकार मैं भी अपनी बाइक ट्रेन में बुक करने में सफल रहा। अपना अनुभव और जानकारी आपको भी शेयर कर रहा हूँ। हमारे सामने मुख्य परेशानी यही होती है कि हमें चीजों की जानकारी नहीं होती। ट्रेनों में दो तरह से बाइक बुक की जा सकती है: लगेज के तौर पर और पार्सल के तौर पर। पहले बात करते हैं लगेज के तौर पर बाइक बुक करने का क्या प्रोसीजर है। इसमें आपके पास ट्रेन का आरक्षित टिकट होना चाहिये। यदि आपने रेलवे काउंटर से टिकट लिया है, तब तो वेटिंग टिकट भी चल जायेगा। और अगर आपके पास ऑनलाइन टिकट है, तब या तो कन्फर्म टिकट होना चाहिये या आर.ए.सी.। यानी जब आप स्वयं यात्रा कर रहे हों, और बाइक भी उसी ट्रेन में ले जाना चाहते हों, तो आरक्षित टिकट तो होना ही चाहिये। इसके अलावा बाइक की आर.सी. व आपका कोई पहचान-पत्र भी ज़रूरी है। मतलब...

पराशर झील- जानकारी और नक्शा

पराशर झील हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले में समुद्र तल से करीब 2600 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां जाने से कम से कम चार रास्ते हैं: 1. सडक मार्ग से: पराशर झील तक पक्की मोटर रोड बनी हुई है यानी अपनी गाडी से या टैक्सी से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। मण्डी के बस अड्डे से जब कुल्लू की तरफ चलते हैं तो हमारे बायें तरफ ब्यास नदी बहती है। मण्डी शहर से बाहर निकलने से पहले ब्यास पर एक पुल आता है। कुल्लू वाली सडक को छोडकर पुल पार करना पडता है। पुल पार करके यह रोड जोगिन्दर नगर होते हुए कांगडा चली जाती है। इसी कांगडा वाली रोड पर थोडा आगे बढें तो सीधे हाथ की ओर एक और सडक निकलती दिखाई देती है। यह कटौला होते हुए बजौरा चली जाती है और उसी मण्डी-कुल्लू मुख्य राजमार्ग में जा मिलती है। इस सडक पर मण्डी से कटौला तक बहुत सारी बसें भी चलती हैं।