डलहौजी का क्या यात्रा वृत्तान्त लिखूं? इतना प्रसिद्ध पर्यटक स्थान... मैं यहां पहली बार गया। आप सभी जा चुके होंगे। ऐसे स्थानों पर पहली बात कि मेरा जाने का ही मन नहीं करता और दूसरी बात कि वापस आकर यात्रा वृत्तान्त लिखने का भी मन नहीं करता। लेकिन कुछ तो लिखना पडेगा। विवाह हुआ, हम दो हो गये। तो क्या हुआ? घुमक्कडी मेरा पहला प्रेम है, शौक है, इसे नहीं छोडा जा सकता। घरवाली को यह सब समझाने की आवश्यकता ही नहीं पडी। उसने पहले ही कह दिया था कि जहां तू, वहां मैं। वह मेरे लेख भी पढती है, इसका अर्थ है कि घूमने की इच्छा उसकी भी होती है। अब मुझे देखना था कि इसकी सीमा कहां तक है? किस तरह की यात्रा में यह बोर होगी। मुझे रेलयात्राएं भी करनी हैं, बस यात्राएं भी करनी हैं, ट्रेकिंग भी करनी है और ऊल-जलूल स्थानों पर भी जाना है। भूखा भी रहना है, कई कई दिन का एक ही दिन में भी खाना है, जगना भी है, खूब सोना भी है। साफ सुथरे कपडे पहनने हैं तो एक ही जोडी कपडों में दस दिन भी निकालने हैं। उसकी सीमा कहां तक है, यही मुझे देखना था। फिर कुछ उसे परिवर्तित होना है, कुछ मुझे।
राजस्थान में रेत के टीबे बहुत हैं। एकवचन टीबा हुआ और उस का स्त्रीलिंग टीबी।
ReplyDeleteअच्छी जानकारी
ReplyDeleteवैसे दिनेशराय द्विवेदी ने अच्छा समझाया
कुछ दिनों में मीटरगेज नहीं दिखेगा, सब एक जैसा।
ReplyDeleteई केइसा नाम है भैया :-)
ReplyDeleteइस स्टेशन का नाम पढ कर तो अजीब सा लगा... लेकिन दिनेश जी ने सही समझाया, लेकिन यह मीटर गेज क्या चीज होती हे? शायद दो लाईनो के बीच के फ़ांसले को मीटर गेज कहते होंगे ना ?
ReplyDeleteTB रेलवे स्टेशन...सुनकर कित्ता अजीब लगता है.
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'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.
अरे वह । ऐसे स्टेशन भी है हमारे हिंदुस्तान मे
ReplyDeleteगणतन्त्र दिवस की शुभकामनाए