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आगामी यात्राएँ

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Comments

  1. Hello pankaj ji if you pass through patna then called me on this number 8797447585.i am waiting for you.

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  2. kya aap ka koi youtube channel bhi hai kya ?

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चूडधार की जानकारी व नक्शा

चूडधार की यात्रा कथा तो पढ ही ली होगी। ट्रेकिंग पर जाते हुए मैं जीपीएस से कुछ डाटा अपने पास नोट करता हुआ चलता हूं। यह अक्षांस, देशान्तर व ऊंचाई होती है ताकि बाद में इससे दूरी-ऊंचाई नक्शा बनाया जा सके। आज ज्यादा कुछ नहीं है, बस यही डाटा है। अक्षांस व देशान्तर पृथ्वी पर हमारी सटीक स्थिति बताते हैं। मैं हर दस-दस पन्द्रह-पन्द्रह मिनट बाद अपनी स्थिति नोट कर लेता था। अपने पास जीपीएस युक्त साधारण सा मोबाइल है जिसमें मैं अपना यात्रा-पथ रिकार्ड नहीं कर सकता। हर बार रुककर एक कागज पर यह सब नोट करना होता था। इससे पता नहीं चलता कि दो बिन्दुओं के बीच में कितनी दूरी तय की। बाद में गूगल मैप पर देखा तो उसने भी बताने से मना कर दिया। कहने लगा कि जहां सडक बनी है, केवल वहीं की दूरी बताऊंगा। अब गूगल मैप को कैसे समझाऊं कि सडक तो चूडधार के आसपास भी नहीं फटकती। हां, गूगल अर्थ बता सकता है लेकिन अपने नन्हे से लैपटॉप में यह कभी इंस्टाल नहीं हो पाया।

लद्दाख बाइक यात्रा- 1 (तैयारी)

बुलेट निःसन्देह शानदार बाइक है। जहां दूसरी बाइक के पूरे जोर हो जाते हैं, वहां बुलेट भड-भड-भड-भड करती हुई निकल जाती है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि लद्दाख जाने के लिये या लम्बी दूरी की यात्राओं के लिये बुलेट ही उत्तम है। बुलेट न हो तो हम यात्राएं ही नहीं करेंगे। बाइक अच्छी हालत में होनी चाहिये। बुलेट की भी अच्छी हालत नहीं होगी तो वह आपको ऐसी जगह ले जाकर धोखा देगी, जहां आपके पास सिर पकडकर बैठने के अलावा कोई और चारा नहीं रहेगा। अच्छी हालत वाली कोई भी बाइक आपको रोहतांग भी पार करायेगी, जोजी-ला भी पार करायेगी और खारदुंग-ला, चांग-ला भी। वास्तव में यह मशीन ही है जिसके भरोसे आप लद्दाख जाते हो। तो कम से कम अपनी मशीन की, इसके पुर्जों की थोडी सी जानकारी तो होनी ही चाहिये। सबसे पहले बात करते हैं टायर की। टायर बाइक का वो हिस्सा है जिस पर सबसे ज्यादा दबाव पडता है और जो सबसे ज्यादा नाजुक भी होता है। इसका कोई विकल्प भी नहीं है और आपको इसे हर हाल में पूरी तरह फिट रखना पडेगा।

जेएनयू में सम्मान

12 मार्च को प्रकाश राय का फोन आया- ‘जाटराम, हम जेएनयू से बोल रहे हैं। हमारी एक संस्था है सिनेमेला , जो लघु फिल्मों को बढावा देती है और हर साल इनके लिये पुरस्कार भी दिये जाते हैं।’ मैंने सोचा कि ये लोग मुझे कोई कैमरा देंगे कि बेटा जा, अपनी यात्राओं की कोई वीडियो बना के ला। फिर उसे पुरस्कार के लिये नामित करेंगे। उन्होंने आगे कहा- ‘इस बार हम पहली बार कुछ अलग सा करने जा रहे हैं। किसी अन्य क्षेत्र के अच्छे फनकार को सम्मानित करेंगे। पहले ही सम्मान में तुम्हारा नम्बर लग गया है। आ जाना 15 तारीख को जेएनयू में। जो भी कार्यक्रम है, मैं फेसबुक पर बता दूंगा।’ शाम का कार्यक्रम था। अब मेरा काम था सबसे पहले अपनी ड्यूटी देखना। हमारे यहां ड्यूटी करने में बहुत सारी विशेष शर्तें भी होती हैं, जिनके कारण हर दूसरे तीसरे दिन ड्यूटी बदलती रहती है। देखा कि चौदह की रात दस बजे से पन्द्रह की सुबह छह बजे की नाइट ड्यूटी है, यानी पन्द्रह को पूरे दिन खाली और अगले दिन यानी सोलह को दोपहर बाद दो बजे से सायंकालीन ड्यूटी है। इसलिये किसी भी तरह के बदलाव की आवश्यकता नहीं थी। ड्यूटी से लौटकर सोना आवश्यक था। लेकिन उससे ...