Skip to main content

राज ठाकुर का गाँव: बीजल



शांघड़ में थे, तो बड़ी देर तक राज ठाकुर को फोन करता रहा, लेकिन उसने उठाया नहीं। उसने आज हमें अपने घर पर बुलाया था - लंच के लिए और हमने उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया था। निमंत्रण इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि लंच करके हमें वहाँ से चले जाना था। अगर चले जाने की बात न होती, तो आमंत्रण लिखता। उसके घर में कुछ काम चल रहा है, इसलिए वह अतिथियों का अच्छा सत्कार नहीं कर पाएगा, इसका उसे डर था और इसीलिए वह हमें ठहराने से मना कर रहा था।
आधे घंटे बाद जब उसका फोन आया, तो मेरा उत्तर था - “भाई जी, आपने फोन नहीं उठाया और हम बंजार पहुँच गए हैं। अब फिर कभी आएँगे।”
“ओहो... मुझे पता नहीं चला... मोबाइल खराब हो गया है... देख लो अगर आ सको तो...”
“नहीं आ सकते...”
“ये क्या हो गया मुझसे! ये तो बड़ी भारी गलती हो गई...”
“अच्छा, अच्छा ठीक है... आ रहे हैं आधे घंटे में... अभी शांघड़ से चले हैं... और अबकी बार फोन उठा लेना।”
रोपा में कमल जी को अलविदा कहा, क्योंकि उन्हें आज शिमला जाना था। लेकिन शाम को पता चला कि वे कसोल चले गए। मैं नशे से मीलों, कोसों, प्रकाश वर्षों दूर रहता हूँ, इसलिए मुझे कसोल और मलाणा कतई पसंद नहीं हैं और जो लोग कसोल जाते हैं, वे छँटे हुए नशेड़ी दिखाई पड़ते हैं। वैसे कमल जी ऐसे तो नहीं थे।


रोपा से बीजल की सड़क इतनी ऊबड़-खाबड़ है कि इस पर मोटरसाइकिलें कैसे चढ़ गईं, न हम जानते हैं और न ही खुद मोटरसाइकिलें। अजीत जी कल से मनु ऋषि के रास्ते को ‘ऑफ रोड़’ कहकर अपने बुलेट ग्रुप में प्रचारित कर रहे हैं और लोगों को उकसा रहे हैं, लेकिन बीजल के बारे में मैंने यह कहते सुना है कि खबरदार अगर बीजल की ऑफ रोड की तो... ऑफ रोड की बाप है यह सड़क।
3 किलोमीटर के इस रास्ते में आप 300 मीटर ऊपर चढ़ जाते हैं और ठेठ पत्थरों से होते हुए। लेकिन अजीत जी की 500 सी.सी. की बुलेट एक ताकतवर और मजबूत बाइक है, इसलिए चढ़ गई... और मेरी 150 सी.सी. की डिस्कवर खुद को कम नहीं मानती, इसलिए चढ़ गई।

खैर, राज के घर पर पहुँचे। वाकई काम चल रहा था और वह यात्रियों के ठहरने के लिए इसे एक होम-स्टे में तब्दील कर रहा था। इस निर्माणाधीन होम-स्टे का जायजा लिया और...
“नीरज...”
“हाँ जी...”
“एक काम करते हैं...”
“डन...”

और निमंत्रण को आमंत्रण में बदल दिया।
“राज भाई, आज हम यहीं रुकेंगे...”
“लेकिन...”
“लेकिन-वेकिन कुछ नहीं... वो कमरा बेस्ट है... नीचे दरी बिछाकर एक-एक कंबल दे दो... हमारा काम चल जाएगा...”

फिर बादल घिर आए और बारिश होने लगी, जिसने पक्का कर दिया कि हम आज यहाँ से वापस नहीं जाएँगे।

और हमारा यहाँ रुकना तब सफल हो गया, जब बारिश रुकी और सामने घाटी में शानदार इंद्रधनुष बन गया। यह लगातार और चमकीला होता गया और आखिरकार दो इंद्रधनुष बन गए। दो इंद्रधनुष पहले कभी नहीं देखे थे और कुदरत के इस चमत्कार के सामने मैं नतमस्तक था। लगभग एक घंटे तक इंद्रधनुष बना रहा और मैं कभी फोटो खींचने लगता, कभी वीडियो बनाने लगता, तो कभी गुमसुम होकर इसे बस देखता रहता। दीप्ति होती, तो पागल हो जाती...

सेब के पेड़ों पर अभी सेब पकने शुरू नहीं हुए थे, लेकिन खुबानियाँ पकने भी लगी थीं और झड़ने भी लगी थीं। ये लोग खुबानियों को बेचते नहीं हैं। जितनी खा सकते हैं, खाते हैं और बाकी के बीजों का तेल निकालकर भोजन पकाने के काम में लाते हैं।

खैर, यहाँ हमारा बहुत अच्छा समय कटा। राज का होम-स्टे तैयार हो जाएगा, तो उसके बारे में आपको भी बताऊँगा और वहाँ जाने को प्रेरित भी करूँगा।




बारिश रुकते ही इंद्रधनुष बनना शुरू हो गया...












खुबानी से लदा पेड़...








Comments

  1. बहुत अच्छा। वैसे राज भाई का गाँव कहां पर है जी।

    ReplyDelete
  2. अतिसुन्दर। इन्द्रधनुष को कैमरे में कैद करना वाकयी लाजवाब है।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

लद्दाख बाइक यात्रा- 1 (तैयारी)

बुलेट निःसन्देह शानदार बाइक है। जहां दूसरी बाइक के पूरे जोर हो जाते हैं, वहां बुलेट भड-भड-भड-भड करती हुई निकल जाती है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि लद्दाख जाने के लिये या लम्बी दूरी की यात्राओं के लिये बुलेट ही उत्तम है। बुलेट न हो तो हम यात्राएं ही नहीं करेंगे। बाइक अच्छी हालत में होनी चाहिये। बुलेट की भी अच्छी हालत नहीं होगी तो वह आपको ऐसी जगह ले जाकर धोखा देगी, जहां आपके पास सिर पकडकर बैठने के अलावा कोई और चारा नहीं रहेगा। अच्छी हालत वाली कोई भी बाइक आपको रोहतांग भी पार करायेगी, जोजी-ला भी पार करायेगी और खारदुंग-ला, चांग-ला भी। वास्तव में यह मशीन ही है जिसके भरोसे आप लद्दाख जाते हो। तो कम से कम अपनी मशीन की, इसके पुर्जों की थोडी सी जानकारी तो होनी ही चाहिये। सबसे पहले बात करते हैं टायर की। टायर बाइक का वो हिस्सा है जिस पर सबसे ज्यादा दबाव पडता है और जो सबसे ज्यादा नाजुक भी होता है। इसका कोई विकल्प भी नहीं है और आपको इसे हर हाल में पूरी तरह फिट रखना पडेगा।

ट्रेन में बाइक कैसे बुक करें?

अक्सर हमें ट्रेनों में बाइक की बुकिंग करने की आवश्यकता पड़ती है। इस बार मुझे भी पड़ी तो कुछ जानकारियाँ इंटरनेट के माध्यम से जुटायीं। पता चला कि टंकी एकदम खाली होनी चाहिये और बाइक पैक होनी चाहिये - अंग्रेजी में ‘गनी बैग’ कहते हैं और हिंदी में टाट। तो तमाम तरह की परेशानियों के बाद आज आख़िरकार मैं भी अपनी बाइक ट्रेन में बुक करने में सफल रहा। अपना अनुभव और जानकारी आपको भी शेयर कर रहा हूँ। हमारे सामने मुख्य परेशानी यही होती है कि हमें चीजों की जानकारी नहीं होती। ट्रेनों में दो तरह से बाइक बुक की जा सकती है: लगेज के तौर पर और पार्सल के तौर पर। पहले बात करते हैं लगेज के तौर पर बाइक बुक करने का क्या प्रोसीजर है। इसमें आपके पास ट्रेन का आरक्षित टिकट होना चाहिये। यदि आपने रेलवे काउंटर से टिकट लिया है, तब तो वेटिंग टिकट भी चल जायेगा। और अगर आपके पास ऑनलाइन टिकट है, तब या तो कन्फर्म टिकट होना चाहिये या आर.ए.सी.। यानी जब आप स्वयं यात्रा कर रहे हों, और बाइक भी उसी ट्रेन में ले जाना चाहते हों, तो आरक्षित टिकट तो होना ही चाहिये। इसके अलावा बाइक की आर.सी. व आपका कोई पहचान-पत्र भी ज़रूरी है। मतलब...

जांस्कर यात्रा- दिल्ली से कारगिल

तैयारी अगस्त में भारत में मानसून पूरे जोरों पर होता है। हिमालय में तो यह काल बनकर बरसता है। मानसून में घुमक्कडी के लिये सर्वोत्तम स्थान दक्षिणी प्रायद्वीप माना जाता है लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां बेफिक्र होकर मानसून में घूमने जाया जा सकता है। वो जगह है लद्दाख। लद्दाख मूलतः एक मरुस्थल है लेकिन अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण यहां ठण्ड पडती है। हिमालय के पार का भूभाग होने के कारण यहां बारिश नहीं पडती- न गर्मियों में और न सर्दियों में। मानसून हो या पश्चिमी विक्षोभ; हिमालय सबकुछ रोक लेता है और लद्दाख तक कुछ भी नहीं पहुंचता। जो बहुत थोडी सी नमी पहुंचती भी है वो नगण्य होती है। जांस्कर भी राजनैतिक रूप से लद्दाख का ही हिस्सा है और कारगिल जिले में स्थित है। जांस्कर का मुख्य स्थान पदुम है। अगर आप जम्मू कश्मीर राज्य का मानचित्र देखेंगे तो पायेंगे कि हिमाचल प्रदेश की सीमा पदुम के काफी नजदीक है। पदुम जाने के लिये केवल एक ही सडक है और वो कारगिल से है। बाकी दिशाओं में आने-जाने के लिये अपने पैरों व खच्चरों का ही सहारा होता है। चूंकि जांस्कर की ज्यादातर आबादी बौद्ध है इसलिये इनका सिन्धु घाटी में स्थित ...