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दैनिक जागरण... 25 नवंबर 2018







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घुमक्कड पत्रिका- 1

1. सम्पादकीय 2. लेख A. घुमक्कडी क्या है और कैसे घुमक्कडी करें? B. असली जीटी रोड 3. यात्रा-वृत्तान्त A. रानीखेत-बिनसर यात्रा B. सावन में ज्योतिर्लिंग ओमकारेश्वर की परिक्रमा व दर्शन 4. ब्लॉग अपडेट

लद्दाख साइकिल यात्रा का आगाज़

दृश्य एक: ‘‘हेलो, यू आर फ्रॉम?” “दिल्ली।” “व्हेयर आर यू गोइंग?” “लद्दाख।” “ओ माई गॉड़! बाइ साइकिल?” “मैं बहुत अच्छी हिंदी बोल सकता हूँ। अगर आप भी हिंदी में बोल सकते हैं तो मुझसे हिन्दी में बात कीजिये। अगर आप हिंदी नहीं बोल सकते तो क्षमा कीजिये, मैं आपकी भाषा नहीं समझ सकता।” यह रोहतांग घूमने जा रहे कुछ आश्चर्यचकित पर्यटकों से बातचीत का अंश है। दृश्य दो: “भाई, रुकना जरा। हमें बड़े जोर की प्यास लगी है। यहाँ बर्फ़ तो बहुत है, लेकिन पानी नहीं है। अपनी परेशानी तो देखी जाये लेकिन बच्चों की परेशानी नहीं देखी जाती। तुम्हारे पास अगर पानी हो तो प्लीज़ दे दो। बस, एक-एक घूँट ही पीयेंगे।” “हाँ, मेरे पास एक बोतल पानी है। आप पूरी बोतल खाली कर दो। एक घूँट का कोई चक्कर नहीं है। आगे मुझे नीचे ही उतरना है, बहुत पानी मिलेगा रास्ते में। दस मिनट बाद ही दोबारा भर लूँगा।” यह रोहतांग पर बर्फ़ में मस्ती कर रहे एक बड़े-से परिवार से बातचीत के अंश हैं।

लद्दाख साइकिल यात्रा- सातवां दिन- जिंगजिंगबार से सरचू

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें । 10 जून 2013 सुबह साढे पांच बजे आंख खुल गई। मेरठ से आया कुनबा जब जाने की तैयारी करने लगा तो शोर हुआ। मैं भी जग गया। तम्बू से बाहर निकला, सामने सचिन खडा था। पता चला वो भी बहुत थका है। वह कल जिस्पा में रुका था, गेमूर से 5-6 किलोमीटर आगे। एक ही दिन में 1000 मीटर चढने से उसकी भी हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी। यहां से सूरजताल 13 किलोमीटर व बारालाचा 16 किलोमीटर है। यानी 16 किलोमीटर तक हमें ऊपर चढना है। नाश्ता करके साढे सात बजे निकल पडे। आज 47 किलोमीटर दूर सरचू पहुंचना है। यहां से निकलते ही चढाई शुरू हो गई, हालांकि ज्यादा तीव्र चढाई नहीं थी। सडक भी अच्छी है। कुछ आगे चलकर एक नाला पार करना पडा। इसमें काफी पानी था लेकिन ज्यादा फैला होने के कारण उतना तेज बहाव नहीं था। पार करने के बाद काफी देर तक अपने पैर ढूंढते रहे।