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दैनिक जागरण... 25 नवंबर 2018







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डायरी के पन्ने- 5

1 अप्रैल 2013, सोमवार 1. महीने की शुरूआत में ही उंगली कटने से बच गई। पडोसियों के यहां एसी लगना था। सहायता के लिये मुझे बुला लिया। मैं सहायता करने के साथ साथ वहीं जम गया और मिस्त्री के साथ लग गया। इसी दौरान प्लाई काटने के दौरान आरी हाथ की उंगली को छूकर निकल गई। ज्यादा गहरा घाव नहीं हुआ। 2 अप्रैल 2013, मंगलवार 1. सुबह चार बजे ही नटवर दिल्ली आ गया। हम हिमाचल की ओर कूच कर गये। शाम होने तक धर्मशाला पहुंच गये।

आसमानी बिजली के कुछ फोटो

बरसात में जब बिजली चमकती है तो सेकंड के सौवें हिस्से में सबकुछ हो जाता है। पता नहीं लोगबाग इतनी फुर्ती से इनके फोटो कैसे खींच लेते हैं? मैंने भी कोशिश की लेकिन जब तक क्लिक करता, तब तक दो सेकंड बीत जाते। कडकती बिजली के लिये तो दो सेकंड बहुत ज्यादा होते हैं। मुझे हमेशा अन्धेरी रात ही दिखाई देती। इलाज निकला। कैमरे को ट्राइपॉड पर वीडियो मोड में लगाकर छोड दिया और अन्दर जाकर डिनर करने लगा। वापस आया तो करीब बीस मिनट की वीडियो हाथ लग चुकी थी। इसमें बहुत बढिया बिजली कडकती व गिरती भी कैद हो गई। दो-तीन बार ऐसा किया। आखिरकार उन वीडियो से कुछ फोटो हाथ लगे हैं, क्वालिटी बेशक उतनी अच्छी नहीं है लेकिन बिजली अच्छी लग रही है।

सराहन से दारनघाटी

8 मई 2015 आराम से सोकर उठे। आज जाना है हमें दारनघाटी। दारनघाटी हमारे इधर आने की एक बडी वजह थी। रास्ता बहुत खराब मिलने वाला है। सराहन में इसके बारे में पूछताछ की तो सुझाव मिला कि मशनू से आप दारनघाटी चढ जाना। फिर दारनघाटी से आगे तकलेच मत जाना, बल्कि वापस मशनू ही आ जाना और वहां से रामपुर उतर जाना। क्योंकि एक तो मशनू से दारनघाटी का पूरा रास्ता बहुत खराब है और उसके बाद तकलेच तक चालीस किलोमीटर का रास्ता भी ठीक नहीं है। यह हमें बताया गया। भीमाकाली के दर्शन करके और श्रीखण्ड महादेव पर एक दृष्टि डालकर सवा दस बजे हम सराहन से प्रस्थान कर गये। चार किलोमीटर तक तो ज्यूरी की तरफ ही चलना पडता है फिर घराट से मशनू की तरफ मुड जाना होता है। मशनू यहां से बीस किलोमीटर है। दस किलोमीटर दूर किन्नू तक तो रास्ता बहुत अच्छा है, फिर बहुत खराब है। रास्ता सेब-पट्टी से होकर है तो जाहिर है कि मौसम बहुत अच्छा था। सेब-पट्टी 2000 मीटर से ऊपर होती है। चारों तरफ सेब के बागान थे। अभी कहीं फूल लगे थे, कहीं नन्हें-नन्हें सेब आ गये थे। कहीं सेब के पेडों के ऊपर जाल लगा रखा था ताकि आंधी तूफान से ज्यादा नुकसान न हो। दो महीने बाद ...