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पुस्तक-चर्चा: हिमाचल के शिखरों में रोमांचक सफर

इस पुस्तक की तारीफ़ कैसे करूँ, कुछ समझ नहीं पा रहा। यात्रा-वृत्तांत विधा का यह एक हीरा है। आपको यदि यात्रा-वृत्तांत पसंद हैं, तो यह पुस्तक आपके पास होनी ही चाहिये। लेखक कुल्लू-निवासी डॉ. सूरत ठाकुर आपको हिमाचल के अप्रचलित स्थानों पर ट्रैकिंग कराते हैं। ऐसे स्थान कि आज इंटरनेट के जमाने में भी ढूंढ़े से नहीं मिलेंगे।

चलिये, प्रत्येक चैप्टर का आपको परिचय करा देते हैं:
1. भृगुतुंग से मलाणा
यात्रा अगस्त 1983 में की। इन्होंने अपनी यात्रा मनाली से गुलाबा बस से और उसके बाद पैदल शुरू की। गुलाबा से दशौर झील, भृगु झील, वशिष्ठ, मनाली, नग्गर, चंद्रखणी जोत और मलाणा। रास्ते में पड़ने वाले सभी गाँवों, स्थानों का अच्छा वर्णन।
2. पार्वती के अंग-संग
यात्रा सितंबर 1987 में की। लेखक अपने दल के साथ पहले पहुँचते हैं कुल्लू से बिजली महादेव, फिर मणिकर्ण, खीरगंगा और मानतलाई झील। और केवल पहुँचते नहीं हैं, लिखने का अंदाज़ एकदम अलग है। स्थानीय कुल्लू निवासी होने का पूरा फायदा उठाया है ठाकुर साहब ने और प्रत्येक मामले में अपनी अच्छी पकड़ दिखायी है।
3. डोडरा-क्वार की सांस्कृतिक यात्रा
अगस्त 1991। हाटकोटी, चांशल, डोडरा और क्वार।
4. पांगी घाटी की ओर
सितंबर 2007। पट्टन घाटी, त्रिलोकनाथ, उदयपुर, पांगी, मिंधल भगवती, सतरुंडी, साच पास, चुराह, चंबा।




5. नाको झील
जुलाई 1997। किन्नौर और नाको का विवरण।
6. कैलाश-परिक्रमा
सितंबर 2005। किन्नर-कैलाश की परिक्रमा और किन्नौर के सामाजिक जीवन का शानदार वर्णन है।
7. विस्मृत करती लाहुल घाटी
रोहतांग, कोकसर, राजा धेपड़ (घेपण), गोंदला का किला, तांदी, ड्रिलबू पर्वत, खंगसर किला, दारचा।
8. श्रीखंड महादेव की धार्मिक यात्रा
खनाग, शमशर महादेव, रामपुर, ढंक्खर महादेव, निरमंड और श्रीखंड़ महादेव की पैदल यात्रा का वर्णन।
9. ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में वन्य प्राणियों के बीच
मनु ऋषि धारादेहुरा शैंशर, रक्तीसर से निकलती सैंज खड्ड, हिमाचल का गुलमर्ग शांघड़, जैव विविधता से भरा पार्क।
10. नीलकंठ के सान्निध्य में
लाहौल में भी एक नीलकंठ है। थनका चित्रशैली, गद्दियों की खोज झील, स्त्रियों का जाना वर्जित, दुर्गम चढ़ाई, यहाँ लाया सामान वापस नहीं जाता।
11. खांडेधार का खेड़ा
यात्रा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के भीतर की है। गाँव का सांस्कृतिक केंद्र सौह, खांडेधार का खेड़ा, फांगचा जोत को पार करना।
12. शीत मरुस्थल में कुछ दिन
स्पीति की यात्रा का वर्णन है। पहला पड़ाव मढ़ी, मौत का घर रोहतांग, शीत मरुस्थल में प्रवेश, जमलू ने पड़ाव डाला था हंसा में, स्पीति का सबसे बड़ा गाँव रंगरीक, कीह गोंपा में सेमीनार, ल्हलुंग गोंपा, पुरानी राजधानी ढंखर, पिन घाटी, हिमालय का अजन्ता ताबो मठ।
13. लाहुल के शिखरों में रोमांचक सफर
यह एक ट्रैकिंग है बारालाचा-ला से चंद्रताल और हामटा जोत की।
14. बड़ा भंगाहल का दुर्गम सफर
मेहनती लोगों की घाटी, बलशाली ठकुराई, भुभूजोत की चढ़ाई, चौहार घाटी का खूबसूरत स्थान झटिंगरी, बरोट, सायर की उमंग, थमसर जोत की थका देने वाली चढ़ाई, कठिन जीवन का पर्याय, गहनों की शौकीन महिलाएँ, हवा में उड़ते मानव परिंदे, बिलिंग से अवलोकित कांगड़ा घाटी, बीड़ भंगाहल, कलाग्राम अंद्रेटा, धर्मशाला, भागसुनाग, महामहिम दलाई लामा का छोटा ल्हासा।




15. वशलेऊ से कमरूनाग
यह ट्रैकिंग एक विचित्र ही ट्रैकिंग है। जो लोग वशलेऊ जोत को जानते हैं, वे यह भी जानते होंगे कि वशलेऊ से कमरूनाग तक एक धार है। जलोडी जोत भी इसी धार पर स्थित है। इसी धार पर इन्होंने ट्रैकिंग की। घने जंगलों से होते हुए। ट्राउट मछली के लिये प्रसिद्ध तीर्थन घाटी, बंजर से आबाद हुआ बंजार, वशलेऊ की चढ़ाई, खूबसूरत पर्यटक स्थल सराहन, तेंदुए से साक्षात्कार, रास्ते का गुम होना, पर्यटकों को सकून देता तराला, नागों की जननी बूढ़ी नागिन का सरोवर, इनर और आउटर सराज को जोड़ता जलोड़ी दर्रा, ट्रैकरों का शिविर स्थल शोजा, सामरिक महत्व का किला रघुपुर गढ़, बैलों की लडाई का खेल होता है बालों में, छतरी महादेव, शिकारी माता के चरणों में, सोने-चांदी के गहनों से भरी कमरूनाग झील, पिकनिक के लिये उपयुक्त स्थान शाटाधार।
16. मणिमहेश
स्वास्थ्यवर्द्धक और सुंदर डलहौजी, मिनी स्विट्ज़रलैंड खजियार, प्रसिद्ध शक्तिपीठ छतराड़ी, चंबा की पुरानी राजधानी भरमौर, पुजारियों का गाँव हड़सर, मणिमहेश झील।
17. चूड़ की चांदनी - चूड़धार
चौपाल का मनोहारी दृश्य, सराहां में बिजट देवता द्वारा अज्ञासुर वध, चूड़ चांदनी के आगोश में, जंगल में भटकना।





पुस्तक: हिमाचल के शिखरों में रोमांचक सफर
लेखक: डॉ. सूरत ठाकुर
प्रकाशक: प्रकाशन संस्थान
आई.एस.बी.एन.: 978-93-82848-70-7
पृष्ठ: 324
अधिकतम मूल्य: 150 रुपये (पेपरबैक)




Comments

  1. Sir Apne 150 likha hai, site pe 620 ki show kar raha hai..

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    1. साइट की साइट वाले जाने... वैसे भी साइट पर हार्डकॉपी के दाम लिखे हैं...

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  2. फिर 150 में किधर मिलेगा नीरज भाई

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    1. सीधे प्रकाशक से खरीद सकते हो...

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    2. This comment has been removed by the author.

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बहुत दिनों से इच्छा थी एक लिस्ट बनाने की कि मैं हिमालय में कितनी ऊँचाई तक कितनी बार गया हूँ। वैसे तो इस लिस्ट को जितना चाहे उतना बढ़ा सकते हैं, एक-एक गाँव को एक-एक स्थान को इसमें जोड़ा जा सकता है, लेकिन मैंने इसमें केवल चुनिंदा स्थान ही जोड़े हैं; जैसे कि दर्रे, झील, मंदिर और कुछ अन्य प्रमुख स्थान। 

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इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें । हल्दीघाटी एक ऐसा नाम है जिसको सुनते ही इतिहास याद आ जाता है। हल्दीघाटी के बारे में हम तीसरी चौथी कक्षा से ही पढना शुरू कर देते हैं: रण बीच चौकडी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोडे से, पड गया हवा का पाला था। 18 अगस्त 2010 को जब मैं मेवाड (उदयपुर) गया तो मेरा पहला ठिकाना नाथद्वारा था। उसके बाद हल्दीघाटी। पता चला कि नाथद्वारा से कोई साधन नहीं मिलेगा सिवाय टम्पू के। एक टम्पू वाले से पूछा तो उसने बताया कि तीन सौ रुपये लूंगा आने-जाने के। हालांकि यहां से हल्दीघाटी लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर है इसलिये तीन सौ रुपये मुझे ज्यादा नहीं लगे। फिर भी मैंने कहा कि यार पच्चीस किलोमीटर ही तो है, तीन सौ तो बहुत ज्यादा हैं। बोला कि पच्चीस किलोमीटर दूर तो हल्दीघाटी का जीरो माइल है, पूरी घाटी तो और भी कम से कम पांच किलोमीटर आगे तक है। चलो, ढाई सौ दे देना। ढाई सौ में दोनों राजी।

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