Monday, January 15, 2018

गरतांग गली: मनुष्य की अदभुत कारीगरी



इस पूरी जानकारी का श्रेय जाता है तिलक सोनी जी को। तिलक जी उत्तरकाशी में रहते हैं और एक विशिष्ट कार्य कर रहे हैं। और वह कार्य है नेलांग घाटी को जनमानस के लिये सुगम बनाना। आप अगर कभी गंगोत्री गये होंगे तो आपने भैरोंघाटी का पुल अवश्य पार किया होगा और इस पुल पर खड़े होकर फोटो भी खींचे होंगे। यह पुल जाधगंगा नदी पर बना है। जाधगंगा नदी इस स्थान पर बहुत गहराई में बहती है और यहाँ केवल खड़े भर होना ही रोंगटे खड़े कर देता है। जाधगंगा नदी यहीं भागीरथी में मिल जाती है। और यहीं से नेलांग घाटी भी शुरू हो जाती है। जाधगंगा नेलांग घाटी की प्रमुख नदी है। असल में यह जाधगंगा घाटी ही है और इसमें एक प्रमुख स्थान है नेलांग। इसलिये इसका नाम नेलांग घाटी ज्यादा प्रचलित है।

Monday, January 8, 2018

नागपुर से इटारसी पैसेंजर ट्रेन यात्रा


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27 अगस्त 2017
नागपुर-इटारसी पैसेंजर 51829
इस मार्ग से मैं पता नहीं कितनी बार यात्रा कर चुका हूँ, लेकिन पहली यात्रा हमेशा याद रहेगी। उस समय मुझे हैदराबाद जाना था और मैंने दक्षिण एक्सप्रेस इसलिए चुनी थी क्योंकि इसके सबसे ज्यादा ठहराव थे। रात निज़ामुद्दीन से चलकर झाँसी तक सुबह हो गयी थी। फिर झाँसी से नागपुर तक मैंने कभी खिड़की पर, तो कभी दरवाजे पर ही यात्रा की व रास्ते मे आने वाले छोटे-बड़े सभी स्टेशन व उनकी ऊँचाई नोट कर ली थी। उस समय मेरे पास कैमरा नहीं हुआ करता था और मुझे रेलयात्राओं में यही सब नोट करने व उनका रिकार्ड रखने का शौक था। तो उसी दिन इटारसी से नागपुर का मार्ग भी देखा। तसल्ली से। सतपुड़ा के पहाड़ों को पार करना होता है और इन्हें देखकर आनंद आ गया था। तभी सोच लिया था कि इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेन से भी यात्रा करूँगा।
आज वो मौका मिला। मौके तो पहले भी मिले थे, लेकिन मानसून की बात ही अलग है। आप किसी ऐसे मार्ग पर यात्रा कर रहे हों, तो मानसून तक इंतजार कर लेना ठीक रहता है।

Thursday, January 4, 2018

2017 की यात्राओं का लेखा-जोखा

साल 2017 के लिये हमने योजना बनायी थी कि इसमें चार लंबी छुट्टियाँ लूंगा और उन चार यात्राओं पर ही फोकस करूंगा। उनकी अच्छी तैयारी करूंगा और शानदार तरीके से उन्हें लिखूंगा। इसी सिलसिले में तय हुआ कि जनवरी में अंडमान यात्रा और अप्रैल में गोईचा-ला ट्रैक करेंगे। फिर जुलाई में कोई ट्रैक करेंगे और फिर सितंबर में। लेकिन सब तितर-बितर होता चला गया और बाकी सालों की तरह ही इस साल भी बेतरतीब तरीके से यात्राएँ हुईं।
आइये, शुरू करते हैं इस साल की यात्राओं का संक्षिप्त परिचय:

Monday, January 1, 2018

भुसावल से नरखेड़ पैसेंजर ट्रेन यात्रा



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26 अगस्त 2017
पहले मैं रात की बात सुनाता हूँ। भुसावल में विश्रामालय प्लेटफार्म 1 और 3 के बीच मे है। समझिए कि दोनों ही प्लेटफार्मों पर है। ताला लगा था। ताला खुलवाया तो बड़ी अजीब-सी गंध आयी। अजीब-सी गंध आये तो समझ जाइये कि भूत निवास करते हैं। मैं भी समझ गया। और यह भी समझ गया कि पूरे विश्रामालय में आज रात मैं अकेला रहने वाला हूँ। इसमे एक खंड़ वातानुकूलित था, एक गैर-वातानुकूलित। वातानुकूलित में भी दो कमरे थे और एक डोरमेट्री हॉल। अर्थात काफी बड़ा विश्रामालय था। केयर-टेकर तो बिजली जलाकर चला गया। रह गया मैं अकेला। ए.सी. चालू कर लिया, हॉल में ठंडक बनने लगी। प्लेटफार्मों के बीच मे होने के बावजूद भी बाहर की आवाजें नहीं आ रही थीं। डर लगने लगा। लकड़ी और काले शीशे के पार्टीशन थे सभी बिस्तरों के बीच में। काले शीशे में अपनी ही परछाई दिखती तो काँप उठता। बायीं खिड़की का पर्दा दाहिने शीशे में हिलता दिखता तो काँप उठता। अब आप कहेंगे कि यह तो नैचुरल है, इसमें भूतों का कोई रोल नहीं और न ही भूतों की उपस्थिति सिद्ध होती। लेकिन भईया, मैं भूतों से डरता हूँ, खासकर तब जब ऐसी सन्नाटी जगह पर अकेला होऊँ। हनुमान चालीसा की कोशिश की, लेकिन एक शब्द भी जुबान पर नहीं आया। आखिरकार गजाननं भूतगणादि सेवितं से काम चलाना पड़ा। नहाने गया तो साबुन लगाते समय आँख बंद करनी पड़ी। ऐसा लगा कि भूत पीछे ही खड़ा है और कंधे पर हाथ रखने वाला है। बड़ी जल्दी करके साबुन धोयी और आँखें खोलीं। कोई ना था। सोने से पहले मैंने विनती की - “भाई देख, मराठी तो मुझे आती नहीं। लेकिन इतना कहे देता हूँ कि सुबह छह बजे चला जाऊँगा। यह हवेली तेरी है और तेरी ही रहेगी। इसलिए नींद में खलल मत डालना।”

रेलयात्रा सूची: 2018

2005-2007 | 2008 | 2009 | 2010 | 2011 | 2012 | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018

क्रम संकहां सेकहां तकट्रेन नंट्रेन नामदूरी
(किमी)
कुल दूरीदिनांकश्रेणीगेज

नोट: दूरी दो-चार किलोमीटर ऊपर-नीचे हो सकती है।
भूल चूक लेनी देनी

कुछ और तथ्य:
कुल यात्राएं: 879 बार
कुल दूरी: 168901 किलोमीटर

पैसेंजर ट्रेनों में: 47642 किलोमीटर (491 बार)
मेल/एक्सप्रेस में: 49934 किलोमीटर (253 बार)
सुपरफास्ट में: 71325 किलोमीटर (134 बार)

ब्रॉड गेज से: 162774 किलोमीटर (817 बार)
मीटर गेज से: 3668 किलोमीटर (28 बार)
नैरो गेज से: 2459 किलोमीटर (34 बार)

बिना आरक्षण के: 72864 किलोमीटर (728 बार)
शयनयान (SL) में: 76835 किलोमीटर (121 बार)
सेकंड सीटिंग (2S) में: 2592 किलोमीटर (9 बार)
थर्ड एसी (3A) में: 12367 किलोमीटर (14 बार)
एसी चेयरकार (CC) में: 1361 किलोमीटर (5 बार)
सेकंड एसी (2A) में: 2882 किलोमीटर (2 बार)

4000 किलोमीटर से ज्यादा: 1 बार
1000 से 3999 किलोमीटर तक: 25 बार
500 से 999 किलोमीटर तक:  47 बार
100 से 499 किलोमीटर तक: 324 बार
50 से 99 किलोमीटर तक (अर्द्धशतक): 280 बार

किस महीने में कितनी यात्रा
महीनापैसेंजरमेल/एक्ससुपरफास्टकुल योग
जनवरी1769206959339771
फरवरी47904697490514392
मार्च658336021004920234
अप्रैल2002295444919447
मई3053142446829159
जून1393162545337551
जुलाई42124669481313694
अगस्त8061137741801139846
सितम्बर47393072474212553
अक्टूबर60684784575816610
नवम्बर3098247518127385
दिसम्बर1874478915968259

Monday, December 25, 2017

सूरत से भुसावल पैसेंजर ट्रेन यात्रा



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25 अगस्त 2017
कल बडनेरा से ट्रेन नंबर 18405 एक घंटा लेट चली थी। मैंने सोचा सूरत पहुँचने में कुछ तो लेट होगी ही, फिर भी साढ़े तीन का अलार्म लगा लिया। 03:37 का टाइम है सूरत पहुँचने का। 03:30 बजे अलार्म बजा तो ट्रेन उधना खड़ी थी, समझो कि सूरत के आउटर पर। मेरे मुँह से निकला, तुम्हारी ऐसी की तैसी मध्य रेल वालों।
फिर तीन घंटे जमकर सोया। पौने सात बजे उठा तो भगदड़ मचनी ही थी। सात बीस की ट्रेन थी और अभी नहाना भी था, टिकट भी लेना था और नाश्ता भी करना था। दिनभर की बारह घंटे की पैसेंजर ट्रेन में यात्रा आसान नहीं होती। कुछ ही देर में आलस आने लगता है और अगर बिना नहाये ही ट्रेन में चढ़ गये तो समझो कि सोते-सोते ही यात्रा पूरी होगी। इसलिये टिकट से भी ज्यादा प्राथमिकता होती है नहाने की। टिकट का क्या है, अगले स्टेशन से भी मिल जायेगा।
पश्चिम रेलवे वाले अच्छे होते हैं। पंद्रह मिनट में टिकट भी मिल गया और नहा भी लिया। इतने में राकेश शर्मा जी का फोन आ गया। वे स्टेशन पहुँच चुके थे। जिस प्लेटफार्म पर ट्रेन आने वाली थी, उसी प्लेटफार्म पर इत्मीनान से मिले। इत्मीनान से इसलिये क्योंकि पंद्रह मिनट की मुलाकात में हमने दो-दो समोसे भी निपटा दिये, चाय भी पी और बातें भी खत्म हो गयीं। घुमक्कड़ी, घर-परिवार, काम-धाम की सब बातें साझा करने के बाद हमारी कोई बात ही नहीं बची। राकेश जी बिहार से हैं और यहाँ हीरा कंपनी में काम करते हैं। समय मिलते ही घूमने निकल जाते हैं। इन्होंने बताया कि सापूतारा का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र में है और गुजराती लोग वहाँ हिल-स्टेशन की वजह से नहीं जाते, बल्कि दारू पीने जाते हैं।

Monday, December 18, 2017

शकुंतला रेलवे: मुर्तिजापुर से अचलपुर



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24 अगस्त 2017
आज की योजना थी मुर्तिजापुर से यवतमाल जाकर वापस मुर्तिजापुर आने की। इसलिये दो दिनों के लिये कमरा भी ले लिया था और एडवांस किराया भी दे दिया था। कल अर्थात 25 अगस्त को मुर्तिजापुर से अचलपुर जाना था।
लेकिन कल रात अचानक भावनगर से विमलेश जी का फोन आया - "नीरज, एक गड़बड़ हो गयी। मैंने अभी मुर्तिजापुर स्टेशन मास्टर से बात की। यवतमाल वाली ट्रेन 27 अगस्त तक बंद रहेगी।"
मैं तुरंत स्टेशन भागा। वाकई यवतमाल की ट्रेन बंद थी। लेकिन अचलपुर की चालू थी। अब ज्यादा सोचने-विचारने का समय नहीं था। यवतमाल तो अब जाना नहीं है, तो कल मैं अचलपुर जाऊंगा। यवतमाल के लिए फिर कभी आना होगा। अब एक दिन अतिरिक्त बचेगा, उसे भी कहीं न कहीं लगा देंगे। कहाँ लगायेंगे, यह अचलपुर की ट्रेन में बैठकर सोचूंगा।
टिकट लेकर नैरोगेज के प्लेटफार्म पहुँचा तो दो-चार यात्री इधर-उधर बैठे थे। ट्रेन अभी प्लेटफार्म पर नहीं लगी थी।