इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें । नग्गर का जिक्र हो और रोरिक आर्ट गैलरी का जिक्र न हो, असम्भव है। असल में रोरिक ने ही नग्गर को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दी है। निकोलस रोरिक एक रूसी चित्रकार था। उसकी जीवनी पढने से पता चलता है कि एक चित्रकार होने के साथ-साथ वह एक भयंकर घुमक्कड भी था। 1917 की रूसी क्रान्ति के समय उसने रूस छोड दिया और इधर-उधर घूमता हुआ अमेरिका चला गया। वहां से वह भारत आया लेकिन नग्गर तब भी उसकी लिस्ट में नहीं था। पंजाब से शुरू करके वह कश्मीर गया और फिर लद्दाख, कराकोरम, खोतान, काशगर होते हुए तिब्बत में प्रवेश किया। तिब्बत में उन दिनों विदेशियों के प्रवेश पर प्रतिबन्ध था। वहां किसी को मार डालना फूंक मारने के बराबर था। रोरिक भी मरते-मरते बचा और भयंकर परिस्थितियों का सामना करते हुए उसने सिक्किम के रास्ते भारत में पुनः प्रवेश किया और नग्गर जाकर बस गये। एक रूसी होने के नाते अंग्रेज सरकार निश्चित ही उससे बडी चौकस रहती होगी।
नीरज मुसाफिर का यात्रा ब्लॉग

Aise to AAP ek din pura rail network naap denge... charan kahan hain prabhu?
ReplyDeletemind blowing blog neeraj
ReplyDeleteab konsi rail line aap se bachi he = mavli barisadri ?
ReplyDeletekaise manage karte ho yaar
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ReplyDeleteनीरज जी !!!
ReplyDeleteबहुत ही शानदार ब्लॉग है आपका और उस से भी मस्त है आपकी घुम्मकड़ी.... यह ब्लॉग बनाने और अपनी यात्राओं के बारे में बताने के लिए साधुवाद...
कृपया यह बताये कि आपने यह नक्शा किस प्रकार बनाया? मेरा मतलब है कि कैसे आपने अपनी रेल-यात्राएं इस पर अंकित की?