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Showing posts from May, 2019

गर्मी जा रही है, मानसून आ रहा है

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आज भारत के मौसम की स्टडी करते हैं... भारत का काफी हिस्सा उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में आता है... यानी सूरज सीधा सिर के ऊपर चमकता है... गर्मी खूब होती है... गर्मी होने से हवाओं की डेंसिटी कम हो जाती है... जबकि हिंद महासागर में भूमध्य रेखा के दक्षिण में सर्दी पड़ने के कारण हवाओं की डेंसिटी ज्यादा रहती है... हिंद महासागर के धुर दक्षिण में अंटार्कटिका है और धुर उत्तर में भारत... यानी हिंद महासागर के दक्षिण में ज्यादा डेंसिटी वाली हवाएँ होती हैं और उत्तर में कम डेंसिटी की हवाएँ... तो जाहिर-सी बात है कि हवा ज्यादा डेंसिटी से कम डेंसिटी की ओर चलना शुरू कर देंगी... अब होता ये है कि धरती के घूमने के कारण व अन्य कई कारणों से ये हवाएँ अफ्रीका को स्पर्श करती हुई उत्तर की ओर चलने लगती हैं... पूर्वी अफ्रीका में इन हवाओं की वजह से मार्च से ही बारिश होने लगती है... भूमध्य रेखा तक आते-आते ये ठंडी हवाएँ गर्म भी होने लगती हैं... चलते-चलते ये अरब सागर से होती हुई खाड़ी देशों से टकराती हैं और अपनी दिशा परिवर्तन करते हुए पूर्व की ओर बहने लगती हैं... ईरान, पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से से लगती हुए ये भारत

जलोड़ी जोत से लांभरी हिल का ट्रैक

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अभी हाल ही में तरुण गोयल साहब ने बशलेव पास का ट्रैक किया। यह ट्रैक तीर्थन वैली में स्थित गुशैनी से शुरू होता है। कुछ दूर बठाहड़ गाँव तक सड़क बनी है और कुल्लू से सीधी बसें भी चलती हैं। बशलेव पास लगभग 3300 मीटर की ऊँचाई पर है और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के एकदम बाहर है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस नेशनल पार्क के अंदर जितना घना जंगल है, उससे भी ज्यादा घना जंगल नेशनल पार्क के बाहर है। काले भालू और तेंदुए तो इतने हैं कि दिन में भी देखे जा सकते हैं। मैं भी आजकल इसी ‘आउटर’ जंगल में स्थित एक गाँव घियागी में रहता हूँ। हालाँकि मुझे कोई भी जानवर अभी तक दिखाई नहीं दिया है। एक बार रात को टहलते समय नदी के पार भालू के चीखने की आवाज सुनी थी, तो उसी समय से रात में टहलना बंद कर दिया था। और अभी दो-तीन दिन पहले ग्रामीणों ने बताया कि शाम के समय जीभी और घियागी के बीच में एक तेंदुआ सड़क पर आ गया था, जिसे बस की सभी सवारियों ने देखा। तो मैं बता रहा था कि गोयल साहब सपरिवार बशलेव पास का ट्रैक करके आए। और जिस दिन वे बशलेव पास पर थे, उस दिन मैं भी ट्रैक कर रहा था और उनसे 8 किलोमीटर ही दूर था। उन्होंने अपन

तीर्थन डायरी - 1 (7 मई 2019)

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आज की इस पोस्ट का नाम “होटल ढूँढो टूर” होना चाहिए था। असल में जब से हमारे दोस्तों को यह पता चला है कि हम कुछ महीने यहाँ तीर्थन वैली में बिताएँगे, तो बहुत सारों ने आगामी छुट्टियों में शिमला-मनाली जाना रद्द करके तीर्थन आने का इरादा बना लिया है। अब मेरे पास तमाम तरह की इंक्‍वायरी आती हैं। बहुत सारे दोस्त तो ऐसी बातें पूछ लेते हैं, जिनका एक महीना बिताने के बाद मुझे भी नहीं पता। फिर मैं पता करता हूँ, तो खुद पर हँसता हूँ। एक दोस्त ने 5-6 दिन यहाँ बिताने और अपने लिए एक यात्रा डिजाइन करने का ठेका मुझे दिया। अब मैं तो खाली बैठा हूँ। लग गया डिजाइन करने में। पहले दिन ये, दूसरे दिन वो... फिर ये, फिर वो। सबसे महँगे होटलों में उनके ठहरने का खर्चा भी जोड़ दिया और टैक्सी आदि का भी। फिर जब सारा टोटल किया, तो मेरे होश उड़ गए। करोड़ों रुपये का बिल बन गया। अबे इतना खर्चा थोड़े ही होता है... कम कर, कम कर... फिर सस्ते होटल की कैलकुलेशन करी। खर्चा कुछ कम तो हुआ, लेकिन था फिर भी करोड़ों में ही। और मैंने उन्हें कह दिया - “सर जी, आपकी फैमिली के लिए इतने करोड़ रुपये का बिल बना है।” जैसी उम्मीद थी, वैसा ही