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Showing posts from February, 2011

सिटी पैलेस, जयपुर

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इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें । जयपुर में जंतर मंतर और सिटी पैलेस आमने सामने ही हैं। जंतर मंतर से निकलकर हम सिटी पैलेस की ओर बढे। पता चला कि प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क 75 रुपये है। और कैमरे का शुल्क भी 75 रुपये अलग से है। हमने अपना-अपना टिकट तो ले लिया, कैमरे का नहीं लिया। सोचा कि यह एक राजमहल ही तो है, विलासिता की चीजें ही रखी होंगी। ऐसी चीजों को देखने और समझने के लिये बंदे में पर्यटक बुद्धि होनी चाहिये, जबकि अपनी बुद्धि घुमक्कड वाली है। सिटी पैलेस आज भी राजघराने का निवास स्थान है। इसका निर्माण 1729 से 1732 के बीच में जयसिंह द्वितीय ने शुरू कराया। मुख्य प्रवेश द्वार से प्रवेश करते ही सामने मुबारक महल दिखाई देता है। पास ही चंद्र महल है। इनके अलावा पीतम निवास चौक, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, महारानी महल, बग्गी खाना और गोविन्द देव जी का मन्दिर भी दर्शनीय हैं।

जयपुर का जंतर मंतर

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इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें । जयपुर वाला जंतर मंतर हवामहल के पास ही है। हवामहल की ऊपरी मंजिल से यह दिखता भी है। जंतर मंतर महाराजा जयसिंह द्वितीय के काल में बनवाया गया था। शायद उन्होंने ही दिल्ली में भी बनवाया था। दिल्ली वाला अपना देखा हुआ नहीं है। बताते हैं कि जयपुर वाला जंतर मंतर ज्यादा विशाल है। यहां विदेशियों का आगमन बहुत ज्यादा होता है। और वे इसकी गणितीय गणनाओं में दिलचस्पी भी लेते हैं। इसलिये उन गणनाओं को समझाने के लिये यहां गाइडों की भरमार है। हमारे लिये तो जंतर मंतर की ‘इमारतें’ फोटू खींचने की जगहें हैं।

जयपुर की शान हवामहल

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इस यात्रा वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहां क्लिक करें । जयपुर यात्रा के दूसरे दिन का हमारा कार्यक्रम था- हवामहल और आसपास की जगहें देखना। लेकिन जब सुबह सोकर उठे तो दिन सिर के ऊपर आने को था। फटाफट नहाये, कपडे पहने और सीधे हवामहल की ओर निकल पडे।

जयपुर यात्रा- आमेर किला

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पिछले साल दिसम्बर के महीने में अचानक जयपुर का कार्यक्रम बना। यहां मैं अकेला नहीं गया बल्कि एक मित्र के साथ गया। सबसे पहले पहुंचे आमेर जो जयपुर से सात-आठ किलोमीटर पहले है। पहुंचते ही एक गाइड सिर हो गया कि मैं सरकारी गाइड हूं, सौ रुपये में आपको सबकुछ दिखा और घुमा दूंगा। मैं तो सहमत नहीं था लेकिन मित्र साहब नहीं माने। गाइड भी हमारे साथ ही हो लिया। आमेर किला इतनी प्रसिद्ध जगह है कि कोई भी पर्यटक अपना जयपुर भ्रमण यही से शुरू करता है। अगर सभी अपना-अपना यात्रा वृत्तान्त लिखने बैठे तो शुरूआत करेंगे कि इसका नाम भगवती अम्बा के नाम पर आम्बेर (Amber) पडा जो बाद में आमेर हो गया। अकबर के सेनापति और नवरत्नों में से एक मानसिंह का नाम भी लिया जायेगा। लेकिन आज इससे ज्यादा नहीं बताऊंगा। उस गाइड का नाम अब भूल गया हूं। लेकिन उसने मुझे बहुत प्रभावित किया। पहली बात तो ये कि बन्दा हमारे साथ पूरे किले में घूमता रहा। किले से बाहर निकले तो पास ही एक बाजार है, हाथ के बने सामान मिलते हैं। मित्र साहब घण्टे भर तक खरीदारी करते रहे। जयपुरी रजाई खरीदी। उनकी देखादेखी मैंने भी एक जयपुरी रजाई खरीद डाली, आज तक काम दे

मेरी मदमहेश्वर यात्रा का कुल खर्च

मैंने अपनी मदमहेश्वर यात्रा 15 नवम्बर 2010 को शुरू की थी और 20 नवम्बर को खत्म की। इन पांच दिनों में जो कुछ खर्च हुआ, ज्यों का त्यों सामने रख रहा हूं। 15 नवम्बर 2010 दिल्ली शाहदरा से मुजफ्फरनगर ट्रेन का जनरल टिकट 38 रुपये शाहदरा स्टेशन पर पूरी सब्जी 10 रुपये मुजफ्फरनगर से हरिद्वार (बस से) 58 रुपये हरिद्वार से ऋषिकेश (बस से) 20 रुपये ऋषिकेश से श्रीनगर (बस से) 100 रुपये देवप्रयाग में एक दर्जन केले 25 रुपये देवप्रयाग में दो समोसे 10 रुपये