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Showing posts from November, 2019

ग्राम आनंद: खेतों के बीच गाँव का वास्तविक आनंद

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कुछ दिन पहले मैं देहरादून के पास उदय झा जी के यहाँ बैठा था। उनका घर विकासनगर शहर से बाहर खेतों में है। चारों तरफ खेत हैं और बासमती की कटाई हो चुकी है। अब गेहूँ की बुवाई की जाएगी। अब चूँकि मैं आजीविका के लिए पूरी तरह पर्यटन के क्षेत्र में उतर चुका हूँ, इसलिए बातों-बातों में उदय जी ने पूछा - “पर्यटन के क्षेत्र में बहुत ज्यादा कंपटीशन है। कैसे सर्वाइव करोगे?” मैंने कहा - “कंपटीशन जरूर है, लेकिन यह क्षेत्र अनंत संभावनाओं वाला है। आप वहाँ खेत में दस खाटें बिछा दो और प्रचार कर दो। जल्दी ही वे ऑनलाइन बुक होने लगेंगी और ‘हाउसफुल’ हो जाएँगी और आपको पचास खाटें और खरीदनी पड़ जाएँगी।”

जिंदगी जिंदाबाद - एक नया सफर

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अभी मैं चिंतामणि जयपुरी की एक वीडियो देख रहा था, जिसमें उन्होंने बताया है कि उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी है। वैसे तो नौकरी छोड़ने का मेरा भी इरादा कई वर्षों का है, लेकिन वो एक लालच होता है हर महीने निर्बाध आती सैलरी का। वो जो चालीस-पचास हजार रुपये आते हैं और तमाम सुविधाएँ जो मिलती हैं, आजीवन मेडिकल आदि; उन्हें देखते हुए हिम्मत भी नहीं पड़ती। फिर इस नौकरी के लिए किया गया संघर्ष भी याद आता है। हमने दस साल पहले, बारह साल पहले कितना संघर्ष किया था इसके लिए! कितनी भागदौड़ की थी! कितने बलिदान किए थे! चिंतामणि ने बताया कि उनके विभाग में किसी ने उनकी शिकायत की थी, जिसके बाद उनके अधिकारी उनके पीछे पड़ गए और रिश्वत तक माँगने लगे थे। आज के समय में चिंतामणि अपनी सैलरी से भी ज्यादा यूट्यूब से कमा रहा है; फिर उन्होंने कोई बिजनेस भी शुरू किया है; तो उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए ऐसे ही एक झटके की आवश्यकता थी। अधिकारियों का पीछे पड़ना और रिश्वत माँगना ही वो झटका था और उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय ले लिया। अन्यथा वे भी पता नहीं कब से इस निर्णय को टालते आ रहे होंगे। खैर, एक झटका मुझे भी लगा थ