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“घुमक्कड़ी जिंदाबाद-2” की तैयारी करते हैं


“घुमक्कड़ी जिंदाबाद” किताब जनवरी 2019 में लांच हुई थी। इसके लिए सोशल मीडिया पर अपने यात्रा-वृत्तांत लिख रहे मित्रों से यात्रा-लेख आमंत्रित किए गए थे। किताब इतनी सफल हुई थी कि इसे साल में दो बार प्रकाशित करने का मन बना लिया था।
तो जुलाई 2019 में “घुमक्कड़ी जिंदाबाद-2” प्रकाशित होने वाली है। फिर से आप सभी से लेख भेजने का आग्रह है। लेकिन कुछ शर्तें हैं, जो इस प्रकार हैं:

1. आपका लेख केवल साहसिक यात्राओं और कम प्रसिद्ध स्थानों की यात्राओं पर आधारित होना चाहिए... साहसिक यात्राओं में पर्वतारोहण, ट्रैकिंग, साइकिलिंग, ट्रेन यात्रा, दुर्गम स्थानों में मोटरसाइकिल यात्रा, कार यात्रा और नाव यात्रा आदि शामिल हैं... 
2. यदि आप यात्राओं से संबंधित किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, तो आप उस क्षेत्र से संबंधित जानकारी भी भेज सकते हैं... जैसे जंगल, जंगली जानवर, पुरातत्व, हाई माउंटेन सिकनेस, बर्ड वाचिंग, सुरक्षा आदि आदि...
3. लेख 2000 से 4000 शब्दों के बीच ही होना चाहिए... 2000 शब्दों से कम और 4000 शब्दों से बड़ा लेख स्वीकार नहीं किया जाएगा... 
4. किताब में सीमित पेजों के कारण सीमित लेख ही प्रकाशित होंगे... इसलिए आपके लेख में रोचकता भी आवश्यक है, ताकि इसके प्रकाशित होने की संभावना बढ़ जाए...

5. आपका मौलिक लेख होना चाहिए... इसकी घोषणा आपको ईमेल में करनी होगी... यदि बाद में कॉपीराइट का क्लेम होता है, तो इसके लिए आप ही जिम्मेदार होंगे...
6. आपका लेख पहले किसी भी किताब में प्रकाशित नहीं होना चाहिए... लेकिन समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और सोशल मीडिया में प्रकाशित लेख स्वीकार किए जाएँगे... “घुमक्कड़ी जिंदाबाद-2” में प्रकाशन के बाद आप इसे कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं...
7. सोशल मीडिया पर प्रकाशित करने और किताब में प्रकाशित करने में बहुत बड़ा अंतर होता है... अपने सोशल मीडिया एकाउंट से कॉपी-पेस्ट करते समय ध्यान रखें कि आप किताब में प्रकाशन के लिए भेज रहे हैं... इसलिए लेख में आवश्यक परिवर्तन करके ही भेजें...
8. अपना लेख केवल यूनीकोड में वर्ड फाइल में ही भेजें... पी.डी.एफ., स्कैन कॉपी या स्क्रीनशॉट न भेजें... आप लेख को अपने कंप्यूटर या मोबाइल से कॉपी करके सीधे ईमेल में भी पेस्ट कर सकते हैं... 
9. लेख केवल हिंदी में ही भेजें... यदि आपका लेख हिंदी में नहीं है, तो अनुवाद कराने की जिम्मेदारी और खर्च आपके होंगे... अनुवादक का नाम भी भेजना आवश्यक है... यदि आपने किसी अन्य लेखक के लेख का हिंदी अनुवाद किया है, तो आप उसे भी भेज सकते हैं, लेकिन मूल लेखक का स्वीकृति-पत्र भी भेजना आवश्यक है... 
10. संपादक के पास आपके लेख में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने का अधिकार रहेगा... फाइनल लेख आपको उपलब्ध कराया जाएगा और आपकी स्वीकृति के बाद ही प्रकाशित किया जाएगा... 
11. आप उस लेख से संबंधित अधिकतम 10 फोटो भी भेज सकते हैं... केवल मूल फोटो ही भेजें... फोटो पर किसी भी प्रकार का स्टैम्प न लगा हो... सेल्फी और ग्रुप फोटो को एवॉइड करें, तो अच्छा रहेगा... 
12. यह किताब कम्यूनिटी बेस्ड है... अर्थात्‌ सभी लेखक इसके प्रकाशित होने में अपना-अपना आर्थिक सहयोग देते हैं, मिलकर बिक्री करते हैं और मुनाफा भी कमाते हैं... सभी लेखकों को किताब लागत मूल्य पर उपलब्ध कराई जाएगी और आप इसकी बिक्री करने को स्वतंत्र हैं... आपके द्वारा की गई बिक्री से जो भी मुनाफा होगा, वह 100% आपका ही होगा... किताब का लागत मूल्य 100 से 150 रुपये होगा और इसकी एम.आर.पी. 200 से 250 रुपये होगी... 240 पेज होंगे...
13. लेख केवल musafirneeraj@gmail.com पर ही भेजें... अंतिम तिथि है 20 मई 2019...
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लेखों का चयन करने, उन्हें प्रकाशित करने या प्रकाशित न करने का निर्णय केवल मेरा ही होता है। मैं कभी भी लेखक का नाम देखकर निर्णय नहीं लेता हूँ, बल्कि लेख पढ़कर निर्णय लेता हूँ। यदि नाम देखकर निर्णय लेता, तो मेरे घनिष्ठ मित्र सुमित शर्मा का लेख जरूर छपता। 

चलिए, अब बात करते हैं कि हमने “घुमक्कड़ी जिंदाबाद-1” के लिए लेखों का चयन कैसे किया...

इस किताब के लिए लगभग 35 लेख आए थे। जब मैंने इन्हें पढ़ना शुरू किया तो तीन कैटेगरी बनाईं:

1. जो लेख एकदम पसंद आ गए... इनमें गोपाल की दुनिया, विक्रमशिला एक्सप्रेस, पीसफुली, सरनेम, अमेठी से अंडमान, जालसू जोत यात्रा, साढ़े तीन पराँठे, नरभक्षी बाघ, देऊर कोठार थे। 

“गोपाल की दुनिया” भावनात्मक लेख था, लेकिन लेखक अखिलेश प्रधान ने इसका प्रवाह बनाए रखा और यह लेख बोर नहीं करता। 
“विक्रमशिला एक्सप्रेस” एकदम आदर्श रोचक लेख था। लेखक अमित झा ने इसे केवल उतना ही लिखा, जितना जरूरी था। अगर इसे लंबा खींचते, तो यह बोर करने लगता। 
“पीसफुली” मेघालय में डबल डेकर रूट ब्रिज का यात्रा-वृत्तांत है। लेखिका कंचन सिंह गौर ने अपनी मेघालय यात्रा का समूचा वर्णन न करके केवल एक दिन का ही वर्णन किया है। इसमें उन्होंने एक थीम पकड़ ली - पीसफुली। यह पीसफुली कोई और नहीं बल्कि उनका बदसूरत गाइड था, जिसकी वे शायद शक्ल भी न देखना चाहतीं। लेकिन उन्होंने अपने लेख को न केवल रोचक बनाया, बल्कि लेख खत्म होने तक बदसूरत गाइड को खूबसूरत भी बना दिया।
कैलाश चंद बहुगुणा का लेख “सरनेम” यात्रा-वृत्तांत नहीं है और न ही इस किताब की थीम के लिए उपयुक्त था। जब इसे मैंने पढ़ना शुरू किया, तो इसमें यात्राएँ ढूँढ़ता रहा। लेख रोचकता से भरपूर था, इसलिए मैं पढ़ता चला गया, लेकिन साथ ही निर्णय भी लेता चला गया कि यह लेख किताब के लिए उपयुक्त नहीं है। लेकिन जैसे ही आखिरी लाइन पढ़ी, मुझे निर्णय लेने में कोई देर नहीं लगी। लेखक ने बड़ी कुशलता से पूरे लेख में वो आखिरी लाइन बचाकर रखी थी और केवल इसी के कारण यह प्रकाशित हुआ।
“अमेठी से अंडमान” में रोचकता हालाँकि कुछ कम है, लेकिन हमेशा रोचकता ही नहीं देखी जाती। लेखिका ममता सिंह जी रूढ़िवादी समाज से निकलकर अकेली अंडमान गईं, यह संघर्ष और उनके मन की उथल-पुथल ने हमें मजबूर कर दिया कि इसे जरूर प्रकाशित करेंगे।
“जालसू जोत यात्रा” असल में धौलाधार में ट्रैकिंग की कथा है। हम ऐसी ही साहसिक कथाओं को प्रकाशित करना चाहते हैं। अगर मयंक जरयाल इसे रोचक न बनाते, तब भी यह प्रकाशित होना ही था।
“साढ़े तीन पराँठे” एक बहुत लंबा लेख है। यह असल में यमुनोत्री के उद्‍गम सप्तऋषिकुंड की ट्रैकिंग का साहसिक वर्णन है। इसे भी प्रकाशित होना ही था, लेकिन विकास नारदा जी इसमें काँटछाँट करने को तैयार नहीं थे। बड़ी मान-मनौवल के बाद वे एकाध लाइन हटाने को तैयार हुए। अगर इस लेख में एकाध लाइन और जोड़ दी जाती, तो एक किताब ही बन जाती। और हाँ, साढ़े तीन पराँठों का रहस्य सबसे आखिर में खुलता है।
“नरभक्षी बाघ” सुंदर श्याम कुकरेती जी के बचपन के दिनों का वृत्तांत है। आजकल शिकार और नरभक्षी जैसे लेख तो जिम कार्बेट की किताबों में ही मिलते हैं। यह लेख शिकार से संबंधित तो नहीं था, लेकिन इसने कार्बेट साहब के लेखों की याद दिला दी।
“देऊर कोठार” मध्य प्रदेश में स्थित एक छोटा-सा गाँव है। सुमित गौतम जी ने इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने की कोशिश की है। लेख ज्यादा रोचक तो नहीं है, लेकिन एक बहुत ही अलग-थलग ऐसे स्थान की यात्रा पर आधारित है, जिसके बारे में हमें पता चलना ही चाहिए, इसलिए इसे भी शामिल कर लिया।

2. जो बिल्कुल भी पसंद नहीं आए - कुछ लेख ऐसे होते हैं, जो होते तो उत्कृष्ट हैं, लेकिन खास लोगों को ही पसंद आते हैं। दुर्भाग्य से मैं उन खास लोगों में से नहीं हूँ। कई बार ऐसा होता है जो आपके लिए रोचक हो, लेकिन मेरे लिए रोचक नहीं होता और कई बार इसका उल्टा भी होता है। सबकी अपनी-अपनी पसंद होती है। निःसंदेह वे लेख बड़ी मेहनत से लिखे गए थे, लेकिन उन्हें पढ़ते-पढ़ते मैं बोर हो गया और वे किताब में छपने से रह गए। वे लेख अगर कहीं और छपेंगे, तो खूब वाहवाही लूटेंगे।

3. जिन्हें आखिरी समय तक अधर में लटकाए रखा...
जिन्हें प्रकाशित करना है और जिन्हें प्रकाशित नहीं करना है, इसका चुनाव करने के बाद बाकी बचे सभी लेख अलग कैटेगरी में रख दिए गए। इन्हें पढ़ने के बाद रोचकता आदि के आधार पर कुछ नंबर दिए गए और एक मेरिट लिस्ट बना ली। इन सभी लेखों की एडिटिंग, प्रूफरीडिंग सब की गई और लेखकों का परिचय भी जोड़ा गया। ये सभी लेख किताब में छपने को तैयार थे। लेकिन किताब की लिमिट केवल 240 पेजों की ही थी, इसलिए इनमें से कुछ छप गए और कुछ अनछपे रह गए। 
सर्दियों में स्पीति यात्रा पर आधारित दो लेख आए... दोनों ही रोचक... इनमें से अमित त्यागी जी के “बर्फीले रेगिस्तान के बंजारे” को जगह मिली और दूसरे लेखक को सॉरी बोलना पड़ा। 
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तो ये कहानी थी लेखों के चुनाव की। 35 में से 18 लेखों को किताब में जगह मिली। अप्रकाशित लेखकों में से कई तो नाराज भी हो गए। ऐसा नहीं होना चाहिए। इस बार फिर से बहुत सारे लेख आएँगे, फिर से वही कहानी दोहराई जाएगी और फिर से कुछ लेखक नाराज हो जाएँगे। अगर आपको लगता है कि आप अच्छा लिखते हैं और किताब भी लिख सकते हैं, तो किताब जरूर लिखिए। लिखना ज्यादा जरूरी होता है, छपना तो चुटकियों का काम है। 
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तो लिख भेजिए “घुमक्कड़ी जिंदाबाद-2” के लिए अपना एक लेख। नियम और शर्तें आपने पढ़ ही लिए हैं। आखिरी तारीख है 20 मई 2019...



2 comments:

  1. hello Neeraj, the new layout is not user friendly.. there is lot of moving items and its hard to pick what to read.. the earlier version was simple and easy to navigate... i used to visit your page 3-4 times a week... now it reduced to once a month.. in hope that it will get better..

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर...
      वैसे तो कम से कम 20 लेआउट ट्राइ करने के बाद इसे लगाया है... और काफी सारी टेस्टिंग के बाद इसे यूजर फ्रेंडली भी बनाने की कोशिश की है... इस लेआउट को लगाने के बाद ब्लॉग पर ट्रैफिक भी काफी बढ़ा है और लोग अब यहाँ ज्यादा पेज पढ़ रहे हैं और ज्यादा समय भी व्यतीत कर रहे हैं...
      आपने चूँकि समस्या फेस की है, तो आपसे गुजारिश है कि इससे रिलेटिड कोई स्क्रीनशॉट 7042064959 पर व्हाट्सएप कर दीजिए... हम इसे ठीक करने की कोशिश करेंगे...

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