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Showing posts from January, 2018

एक हिमालयी गाँव रैथल की यात्रा

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इस यात्रा का विचार कहाँ से आया? पता नी। लेकिन मुझे बर्फ़ अच्छी तो लगती है, डर भी लगता है। यार लोग चादर ट्रैक, केदारकांठा ट्रैक इत्यादि के बर्फ़ीले फोटो शेयर करते तो आह-सी निकलती। फिर जल्द ही अपनी ‘कैपेसिटी’ भी पता पड़ जाती। “हमारे बस की ना है।” और इस प्रकार बर्फ़ीले ट्रैक बर्फ़ में ही दबे रह जाते। तो क्या करें? यह बर्फ़ तो मई में जाकर पिघलेगी। इन पाँच महीनों में क्या करें? और नींव पड़ी इस ग्रुप यात्रा की। दिसंबर में अक्सर इस तरह के आइडिये मन में आ ही जाते हैं। हैप्पी न्यू ईयर दिखता है, ‘छब्बी’ जनवरी दिखती है और मन करता है कि यार-दोस्तों के साथ एक आसान-सी यात्रा पर चलें। दो साल पहले नागटिब्बा गये थे। इन दो सालों में इतना अनुभव तो हो गया कि बर्फ़ में ट्रैकिंग ठीक ना है। तो आसान-सा कार्यक्रम बनाया - एक गाँव में चलते हैं, जहाँ से हिमालयी बर्फ़ीली चोटियाँ दिखती हों, एकदम शांत वातावरण हो और घर जैसा अनुभव हो। फिर थोड़ा-सा हिसाब-किताब लगाया और यार लोगों में घोषणा कर दी कि 5000 रुपये लगेंगे। दिल्ली से उत्तराखंड परिवहन की बस से सीधे उत्तरकाशी जायेंगे, फिर रैथल जायेंगे और तीसरे दिन उसी बस से दिल्ली लौट आय

नेलांग घाटी

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इस यात्रा-वृत्तांत को आरंभ से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें । 27 सितंबर 2017 नेलांग घाटी के इतिहास के बारे में पिछली पोस्ट में बताया जा चुका है। आज हम अपना यात्रा-वृत्तांत और कुछ फोटो दिखायेंगे। जब हम गरतांग गली देख चुके तो उत्सुकता थी नेलांग घाटी में जाने की। वैसे तो पिछले दो-तीन वर्षों से वहाँ यात्री जा रहे हैं, लेकिन आज पहला मौका होगा, जब कोई ‘सिविलियन’ दल नेलांग में रात रुकेगा। केवल इतना ही नहीं, कल हमें नेलांग से भी आगे जादुंग, उससे भी आगे नीलापानी और उससे भी आगे कहीं जाना है। 1962 के बाद कोई भी यात्री-दल नेलांग से आगे नहीं गया है। इसी बात की उत्सुकता थी - मुझे भी और बाकी सभी को भी। और यह सब इंतज़ाम करने के लिये तिलक सोनी ने किस लेवल तक मेहनत की है, आप समझ सकते हैं।

गरतांग गली: मनुष्य की अदभुत कारीगरी

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इस पूरी जानकारी का श्रेय जाता है तिलक सोनी जी को। तिलक जी उत्तरकाशी में रहते हैं और एक विशिष्ट कार्य कर रहे हैं। और वह कार्य है नेलांग घाटी को जनमानस के लिये सुगम बनाना। आप अगर कभी गंगोत्री गये होंगे तो आपने भैरोंघाटी का पुल अवश्य पार किया होगा और इस पुल पर खड़े होकर फोटो भी खींचे होंगे। यह पुल जाधगंगा नदी पर बना है। जाधगंगा नदी इस स्थान पर बहुत गहराई में बहती है और यहाँ केवल खड़े भर होना ही रोंगटे खड़े कर देता है। जाधगंगा नदी यहीं भागीरथी में मिल जाती है। और यहीं से नेलांग घाटी भी शुरू हो जाती है। जाधगंगा नेलांग घाटी की प्रमुख नदी है। असल में यह जाधगंगा घाटी ही है और इसमें एक प्रमुख स्थान है नेलांग। इसलिये इसका नाम नेलांग घाटी ज्यादा प्रचलित है।

नागपुर से इटारसी पैसेंजर ट्रेन यात्रा

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इस यात्रा-वृत्तांत को आरंभ से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें । 27 अगस्त 2017 नागपुर-इटारसी पैसेंजर 51829 इस मार्ग से मैं पता नहीं कितनी बार यात्रा कर चुका हूँ, लेकिन पहली यात्रा हमेशा याद रहेगी। उस समय मुझे हैदराबाद जाना था और मैंने दक्षिण एक्सप्रेस इसलिए चुनी थी क्योंकि इसके सबसे ज्यादा ठहराव थे। रात निज़ामुद्दीन से चलकर झाँसी तक सुबह हो गयी थी। फिर झाँसी से नागपुर तक मैंने कभी खिड़की पर, तो कभी दरवाजे पर ही यात्रा की व रास्ते मे आने वाले छोटे-बड़े सभी स्टेशन व उनकी ऊँचाई नोट कर ली थी। उस समय मेरे पास कैमरा नहीं हुआ करता था और मुझे रेलयात्राओं में यही सब नोट करने व उनका रिकार्ड रखने का शौक था। तो उसी दिन इटारसी से नागपुर का मार्ग भी देखा। तसल्ली से। सतपुड़ा के पहाड़ों को पार करना होता है और इन्हें देखकर आनंद आ गया था। तभी सोच लिया था कि इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेन से भी यात्रा करूँगा। आज वो मौका मिला। मौके तो पहले भी मिले थे, लेकिन मानसून की बात ही अलग है। आप किसी ऐसे मार्ग पर यात्रा कर रहे हों, तो मानसून तक इंतजार कर लेना ठीक रहता है।

2017 की यात्राओं का लेखा-जोखा

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साल 2017 के लिये हमने योजना बनायी थी कि इसमें चार लंबी छुट्टियाँ लूंगा और उन चार यात्राओं पर ही फोकस करूंगा। उनकी अच्छी तैयारी करूंगा और शानदार तरीके से उन्हें लिखूंगा। इसी सिलसिले में तय हुआ कि जनवरी में अंडमान यात्रा और अप्रैल में गोईचा-ला ट्रैक करेंगे। फिर जुलाई में कोई ट्रैक करेंगे और फिर सितंबर में। लेकिन सब तितर-बितर होता चला गया और बाकी सालों की तरह ही इस साल भी बेतरतीब तरीके से यात्राएँ हुईं। आइये, शुरू करते हैं इस साल की यात्राओं का संक्षिप्त परिचय:

भुसावल से नरखेड़ पैसेंजर ट्रेन यात्रा

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इस यात्रा-वृत्तांत को आरंभ से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें । 26 अगस्त 2017 पहले मैं रात की बात सुनाता हूँ। भुसावल में विश्रामालय प्लेटफार्म 1 और 3 के बीच मे है। समझिए कि दोनों ही प्लेटफार्मों पर है। ताला लगा था। ताला खुलवाया तो बड़ी अजीब-सी गंध आयी। अजीब-सी गंध आये तो समझ जाइये कि भूत निवास करते हैं। मैं भी समझ गया। और यह भी समझ गया कि पूरे विश्रामालय में आज रात मैं अकेला रहने वाला हूँ। इसमे एक खंड़ वातानुकूलित था, एक गैर-वातानुकूलित। वातानुकूलित में भी दो कमरे थे और एक डोरमेट्री हॉल। अर्थात काफी बड़ा विश्रामालय था। केयर-टेकर तो बिजली जलाकर चला गया। रह गया मैं अकेला। ए.सी. चालू कर लिया, हॉल में ठंडक बनने लगी। प्लेटफार्मों के बीच मे होने के बावजूद भी बाहर की आवाजें नहीं आ रही थीं। डर लगने लगा। लकड़ी और काले शीशे के पार्टीशन थे सभी बिस्तरों के बीच में। काले शीशे में अपनी ही परछाई दिखती तो काँप उठता। बायीं खिड़की का पर्दा दाहिने शीशे में हिलता दिखता तो काँप उठता। अब आप कहेंगे कि यह तो नैचुरल है, इसमें भूतों का कोई रोल नहीं और न ही भूतों की उपस्थिति सिद्ध होती। लेकिन भईया, मैं भूतों से डरता हू

रेलयात्रा सूची: 2018

2005-2007   |   2008   |   2009   |   2010   |   2011   |   2012   |   2013   |   2014   |   2015   |   2016   |   2017  | 2018  |   2019 दिनांक कहां से/कहां तक ट्रेन नं/नाम दूरी (कुल दूरी) श्रेणी (गेज) 13-03 नई दिल्ली - शाहजहाँपुर 14258 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस 328 (169229) शयनयान (ब्रॉड) 14-03 शाहजहाँपुर - पीलीभीत 52229 शाहजहाँपुर-पीलीभीत पैसेंजर 85 (169314) साधारण (मीटर) 14-03 पीलीभीत - टनकपुर 55373 पीलीभीत-टनकपुर पैसेंजर 63 (169377) साधारण (ब्रॉड) 14-03 पीलीभीत - मैलानी 52221 पीलीभीत-मैलानी पैसेंजर 68 (169445) साधारण (मीटर) 15-03 मैलानी - बहराइच 52254 मैलानी-बहराइच पैसेंजर 206 (169651) साधारण (मीटर) 15-03 लखनऊ - नई दिल्ली 12429 एसी सुपरफास्ट 493 (170144) थर्ड एसी (ब्रॉड) 26-09 मडगाँव - हजरत निजामुद्दीन 12283 दूरोंतो 2093 (172237) शयनयान (ब्रॉड) 07-12 नई दिल्ली - कानपुर सेंट्रल 22812 राजधानी 447 (172684) थर्ड एसी (ब्रॉड) 09-12 लखनऊ - अमरोहा 15909 अवध असम 356 (173040) शयनयान (ब्रॉड) नोट: दूरी दो-चार किलोमीटर ऊपर-नीचे हो सकती है। भूल चूक लेनी देनी कुछ और तथ्य: कुल यात