Wednesday, January 31, 2018

एक हिमालयी गाँव रैथल की यात्रा

इस यात्रा का विचार कहाँ से आया?
पता नी। लेकिन मुझे बर्फ़ अच्छी तो लगती है, डर भी लगता है। यार लोग चादर ट्रैक, केदारकांठा ट्रैक इत्यादि के बर्फ़ीले फोटो शेयर करते तो आह-सी निकलती। फिर जल्द ही अपनी ‘कैपेसिटी’ भी पता पड़ जाती। “हमारे बस की ना है।” और इस प्रकार बर्फ़ीले ट्रैक बर्फ़ में ही दबे रह जाते।
तो क्या करें? यह बर्फ़ तो मई में जाकर पिघलेगी। इन पाँच महीनों में क्या करें? और नींव पड़ी इस ग्रुप यात्रा की। दिसंबर में अक्सर इस तरह के आइडिये मन में आ ही जाते हैं। हैप्पी न्यू ईयर दिखता है, ‘छब्बी’ जनवरी दिखती है और मन करता है कि यार-दोस्तों के साथ एक आसान-सी यात्रा पर चलें।
दो साल पहले नागटिब्बा गये थे। इन दो सालों में इतना अनुभव तो हो गया कि बर्फ़ में ट्रैकिंग ठीक ना है। तो आसान-सा कार्यक्रम बनाया - एक गाँव में चलते हैं, जहाँ से हिमालयी बर्फ़ीली चोटियाँ दिखती हों, एकदम शांत वातावरण हो और घर जैसा अनुभव हो। फिर थोड़ा-सा हिसाब-किताब लगाया और यार लोगों में घोषणा कर दी कि 5000 रुपये लगेंगे। दिल्ली से उत्तराखंड परिवहन की बस से सीधे उत्तरकाशी जायेंगे, फिर रैथल जायेंगे और तीसरे दिन उसी बस से दिल्ली लौट आयेंगे। रात की भी यात्रा होगी, इसके बावजूद भी कई मित्रों ने फटाक से रजिस्ट्रेशन कर दिया।

Monday, January 22, 2018

नेलांग घाटी

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27 सितंबर 2017
नेलांग घाटी के इतिहास के बारे में पिछली पोस्ट में बताया जा चुका है। आज हम अपना यात्रा-वृत्तांत और कुछ फोटो दिखायेंगे।
जब हम गरतांग गली देख चुके तो उत्सुकता थी नेलांग घाटी में जाने की। वैसे तो पिछले दो-तीन वर्षों से वहाँ यात्री जा रहे हैं, लेकिन आज पहला मौका होगा, जब कोई ‘सिविलियन’ दल नेलांग में रात रुकेगा। केवल इतना ही नहीं, कल हमें नेलांग से भी आगे जादुंग, उससे भी आगे नीलापानी और उससे भी आगे कहीं जाना है। 1962 के बाद कोई भी यात्री-दल नेलांग से आगे नहीं गया है। इसी बात की उत्सुकता थी - मुझे भी और बाकी सभी को भी।
और यह सब इंतज़ाम करने के लिये तिलक सोनी ने किस लेवल तक मेहनत की है, आप समझ सकते हैं।

Monday, January 15, 2018

गरतांग गली: मनुष्य की अदभुत कारीगरी

इस पूरी जानकारी का श्रेय जाता है तिलक सोनी जी को। तिलक जी उत्तरकाशी में रहते हैं और एक विशिष्ट कार्य कर रहे हैं। और वह कार्य है नेलांग घाटी को जनमानस के लिये सुगम बनाना। आप अगर कभी गंगोत्री गये होंगे तो आपने भैरोंघाटी का पुल अवश्य पार किया होगा और इस पुल पर खड़े होकर फोटो भी खींचे होंगे। यह पुल जाधगंगा नदी पर बना है। जाधगंगा नदी इस स्थान पर बहुत गहराई में बहती है और यहाँ केवल खड़े भर होना ही रोंगटे खड़े कर देता है। जाधगंगा नदी यहीं भागीरथी में मिल जाती है। और यहीं से नेलांग घाटी भी शुरू हो जाती है। जाधगंगा नेलांग घाटी की प्रमुख नदी है। असल में यह जाधगंगा घाटी ही है और इसमें एक प्रमुख स्थान है नेलांग। इसलिये इसका नाम नेलांग घाटी ज्यादा प्रचलित है।

Monday, January 8, 2018

नागपुर से इटारसी पैसेंजर ट्रेन यात्रा

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27 अगस्त 2017
नागपुर-इटारसी पैसेंजर 51829
इस मार्ग से मैं पता नहीं कितनी बार यात्रा कर चुका हूँ, लेकिन पहली यात्रा हमेशा याद रहेगी। उस समय मुझे हैदराबाद जाना था और मैंने दक्षिण एक्सप्रेस इसलिए चुनी थी क्योंकि इसके सबसे ज्यादा ठहराव थे। रात निज़ामुद्दीन से चलकर झाँसी तक सुबह हो गयी थी। फिर झाँसी से नागपुर तक मैंने कभी खिड़की पर, तो कभी दरवाजे पर ही यात्रा की व रास्ते मे आने वाले छोटे-बड़े सभी स्टेशन व उनकी ऊँचाई नोट कर ली थी। उस समय मेरे पास कैमरा नहीं हुआ करता था और मुझे रेलयात्राओं में यही सब नोट करने व उनका रिकार्ड रखने का शौक था। तो उसी दिन इटारसी से नागपुर का मार्ग भी देखा। तसल्ली से। सतपुड़ा के पहाड़ों को पार करना होता है और इन्हें देखकर आनंद आ गया था। तभी सोच लिया था कि इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेन से भी यात्रा करूँगा।
आज वो मौका मिला। मौके तो पहले भी मिले थे, लेकिन मानसून की बात ही अलग है। आप किसी ऐसे मार्ग पर यात्रा कर रहे हों, तो मानसून तक इंतजार कर लेना ठीक रहता है।

Thursday, January 4, 2018

2017 की यात्राओं का लेखा-जोखा

साल 2017 के लिये हमने योजना बनायी थी कि इसमें चार लंबी छुट्टियाँ लूंगा और उन चार यात्राओं पर ही फोकस करूंगा। उनकी अच्छी तैयारी करूंगा और शानदार तरीके से उन्हें लिखूंगा। इसी सिलसिले में तय हुआ कि जनवरी में अंडमान यात्रा और अप्रैल में गोईचा-ला ट्रैक करेंगे। फिर जुलाई में कोई ट्रैक करेंगे और फिर सितंबर में। लेकिन सब तितर-बितर होता चला गया और बाकी सालों की तरह ही इस साल भी बेतरतीब तरीके से यात्राएँ हुईं।
आइये, शुरू करते हैं इस साल की यात्राओं का संक्षिप्त परिचय:

Monday, January 1, 2018

भुसावल से नरखेड़ पैसेंजर ट्रेन यात्रा

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26 अगस्त 2017
पहले मैं रात की बात सुनाता हूँ। भुसावल में विश्रामालय प्लेटफार्म 1 और 3 के बीच मे है। समझिए कि दोनों ही प्लेटफार्मों पर है। ताला लगा था। ताला खुलवाया तो बड़ी अजीब-सी गंध आयी। अजीब-सी गंध आये तो समझ जाइये कि भूत निवास करते हैं। मैं भी समझ गया। और यह भी समझ गया कि पूरे विश्रामालय में आज रात मैं अकेला रहने वाला हूँ। इसमे एक खंड़ वातानुकूलित था, एक गैर-वातानुकूलित। वातानुकूलित में भी दो कमरे थे और एक डोरमेट्री हॉल। अर्थात काफी बड़ा विश्रामालय था। केयर-टेकर तो बिजली जलाकर चला गया। रह गया मैं अकेला। ए.सी. चालू कर लिया, हॉल में ठंडक बनने लगी। प्लेटफार्मों के बीच मे होने के बावजूद भी बाहर की आवाजें नहीं आ रही थीं। डर लगने लगा। लकड़ी और काले शीशे के पार्टीशन थे सभी बिस्तरों के बीच में। काले शीशे में अपनी ही परछाई दिखती तो काँप उठता। बायीं खिड़की का पर्दा दाहिने शीशे में हिलता दिखता तो काँप उठता। अब आप कहेंगे कि यह तो नैचुरल है, इसमें भूतों का कोई रोल नहीं और न ही भूतों की उपस्थिति सिद्ध होती। लेकिन भईया, मैं भूतों से डरता हूँ, खासकर तब जब ऐसी सन्नाटी जगह पर अकेला होऊँ। हनुमान चालीसा की कोशिश की, लेकिन एक शब्द भी जुबान पर नहीं आया। आखिरकार गजाननं भूतगणादि सेवितं से काम चलाना पड़ा। नहाने गया तो साबुन लगाते समय आँख बंद करनी पड़ी। ऐसा लगा कि भूत पीछे ही खड़ा है और कंधे पर हाथ रखने वाला है। बड़ी जल्दी करके साबुन धोयी और आँखें खोलीं। कोई ना था। सोने से पहले मैंने विनती की - “भाई देख, मराठी तो मुझे आती नहीं। लेकिन इतना कहे देता हूँ कि सुबह छह बजे चला जाऊँगा। यह हवेली तेरी है और तेरी ही रहेगी। इसलिए नींद में खलल मत डालना।”

रेलयात्रा सूची: 2018

2005-2007 | 2008 | 2009 | 2010 | 2011 | 2012 | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019




दिनांककहां से/कहां तकट्रेन नं/नामदूरी (कुल दूरी)श्रेणी (गेज)
13-03नई दिल्ली - शाहजहाँपुर14258 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस328 (169229)शयनयान (ब्रॉड)
14-03शाहजहाँपुर - पीलीभीत52229 शाहजहाँपुर-पीलीभीत पैसेंजर85 (169314)साधारण (मीटर)
14-03पीलीभीत - टनकपुर55373 पीलीभीत-टनकपुर पैसेंजर63 (169377)साधारण (ब्रॉड)
14-03पीलीभीत - मैलानी52221 पीलीभीत-मैलानी पैसेंजर68 (169445)साधारण (मीटर)
15-03मैलानी - बहराइच52254 मैलानी-बहराइच पैसेंजर206 (169651)साधारण (मीटर)
15-03लखनऊ - नई दिल्ली12429 एसी सुपरफास्ट493 (170144)थर्ड एसी (ब्रॉड)
26-09मडगाँव - हजरत निजामुद्दीन12283 दूरोंतो2093 (172237)शयनयान (ब्रॉड)
07-12नई दिल्ली - कानपुर सेंट्रल22812 राजधानी447 (172684)थर्ड एसी (ब्रॉड)
09-12लखनऊ - अमरोहा15909 अवध असम356 (173040)शयनयान (ब्रॉड)

नोट: दूरी दो-चार किलोमीटर ऊपर-नीचे हो सकती है।
भूल चूक लेनी देनी

कुछ और तथ्य:
कुल यात्राएं: 888 बार
कुल दूरी: 173040 किलोमीटर

पैसेंजर ट्रेनों में: 48064 किलोमीटर (495 बार)
मेल/एक्सप्रेस में: 50618 किलोमीटर (255 बार)
सुपरफास्ट में: 74358 किलोमीटर (137 बार)

ब्रॉड गेज से: 166554 किलोमीटर (823 बार)
मीटर गेज से: 4027 किलोमीटर (31 बार)
नैरो गेज से: 2459 किलोमीटर (34 बार)

बिना आरक्षण के: 73286 किलोमीटर (732 बार)
शयनयान (SL) में: 79612 किलोमीटर (124 बार)
सेकंड सीटिंग (2S) में: 2592 किलोमीटर (9 बार)
थर्ड एसी (3A) में: 13307 किलोमीटर (16 बार)
एसी चेयरकार (CC) में: 1361 किलोमीटर (5 बार)
सेकंड एसी (2A) में: 2882 किलोमीटर (2 बार)





4000 किलोमीटर से ज्यादा: 1 बार
1000 से 3999 किलोमीटर तक: 26 बार
500 से 999 किलोमीटर तक:  47 बार
100 से 499 किलोमीटर तक: 329 बार
50 से 99 किलोमीटर तक (अर्द्धशतक): 283 बार

किस महीने में कितनी यात्रा
महीनापैसेंजरमेल/एक्ससुपरफास्टकुल योग
जनवरी1769206959339771
फरवरी47904697490514392
मार्च700539301054221477
अप्रैल2002295444919447
मई3053142446829159
जून1393162545337551
जुलाई42124669481313694
अगस्त8061137741801139846
सितम्बर47393072683514646
अक्टूबर60684784575816610
नवम्बर3098247518127385
दिसम्बर1874514520439062