Posts

Showing posts from April, 2010

तीन धर्मों की त्रिवेणी – रिवालसर झील

Image
हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले में मण्डी से लगभग 25 किलोमीटर दूर एक झील है – रिवालसर झील। यह चारों ओर पहाडों से घिरी एक छोटी सी खूबसूरत झील है। इसकी हिन्दुओं, सिक्खों और बौद्धों के लिये बडी ही महिमा है। महिमा बाद में सुनायेंगे, पहले वहां पहुंचने का इन्तजाम कर लें। भारत की राजधानी है नई दिल्ली। यहां से लगभग 250 किलोमीटर दूर एक खूबसूरत शहर है – हरियाणा-पंजाब की राजधानी भी है यह – चण्डीगढ। इसे हिमाचल का प्रवेश द्वार भी कह सकते हैं। यहां से शिमला, कांगडा और मनाली की बसें तो जाते ही मिल जाती हैं। मनाली वाले रास्ते पर स्थित है प्रसिद्ध नगर मण्डी। मण्डी से कुछ पहले नेर चौक पडता है। मण्डी और नेर चौक दोनों जगहों से ही रिवालसर की बसें बडी आसानी से मिल जाती हैं। इसका एक नाम पद्मसम्भव भी है।

चण्डीगढ का गुलाब उद्यान

Image
छोटा सा चण्डीगढ और इतिहास भी कुछ खास नहीं; लेकिन देखने लायक-घूमने लायक इतना कुछ कि मन थकता नहीं है। यहां अपने कुछ घण्टों के प्रवास में हम रॉक गार्डन में घूम आये, सुखना झील देख ली, अब चलते हैं गुलाब उद्यान (ROSE GARDEN) की तरफ। इसका पूरा नाम है ज़ाकिर गुलाब उद्यान। यह पूर्व राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन के नाम पर 1967 में बनाया गया था। यह एशिया का सबसे बडा गुलाब उद्यान है। यह तीस एकड से भी ज्यादा इलाके में फैला हुआ है। इसमें 1600 से भी ज्यादा गुलाब की किस्में हैं। इनमें से कुछ किस्में तो बहुत ही दुर्लभ हैं। यह चण्डीगढ के सेक्टर 16 में स्थित है। एक बार फिर से अपनी बात सुनाता हूं। कल नाइट शिफ्ट की थी, फिर सीधा चण्डीगढ पहुंच गया, फिर रॉक गार्डन, उसके बाद बिना समय गंवाये सुखना झील। यहां तक मैं इतना थक चुका था कि मन कर रहा था कहीं पडकर सो जाऊं। पडकर सोने के लिये रेलवे स्टेशन व बस अड्डा सही जगह है। मुझे चूंकि आज रात को कहीं निकल जाना था, इसलिये मैने बस अड्डे को चुना। सुखना के पास ही एक चौराहे पर रिक्शावाले से पूछा कि भाई, यह सडक ‘सतारा’ ही जा रही है क्या? बोला कि हां, लेकिन पांच किलोमीटर है। आ