Monday, October 19, 2015

भोजपुर, मध्य प्रदेश

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   अगस्त 2009 में मैं पहली बार मध्य प्रदेश घूमने गया था। सबसे पहले पहुंचा था भीमबेटका। उसी दिन इरादा बना भोजपुर जाने का। भीमबेटका के पास ही है। लेकिन कोई सार्वजनिक वाहन उपलब्ध न होने के कारण आधे रास्ते से वापस लौटना पडा। तब से कसक थी कि भोजपुर जाना है। आज जब बाइक साथ थी और हम उसी सडक पर थे जिससे थोडा सा हटकर भोजपुर है, तो हमारा भोजपुर जाना निश्चित था। भोपाल से थोडा सा आगे भैरोंपुर है। भैरोंपुर से अगर सीधे हाईवे से जायें तो औबेदुल्लागंज 22 किलोमीटर है। लेकिन अगर भोजपुर होते हुए जायें तो यही दूरी 30 किलोमीटर हो जाती है। यह कोई ज्यादा बडा फर्क नहीं है।
   सावन का महीना होने के कारण भोजपुर में थोडी चहल-पहल थी अन्यथा बाकी समय यहां सन्नाटा पसरा रहता होगा। बेतवा के किनारे है भोजपुर। राजा भोज के कारण यह नाम पडा। उन्होंने यहां बेतवा पर बांध बनवाये थे और इस शिव मन्दिर का निर्माण करवाया था। किन्हीं कारणों से निर्माण अधूरा रह गया। पूरा हो जाता तो यह बडा ही भव्य मन्दिर होता। इसकी भव्यता का अन्दाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि एक बडे ऊंचे चबूतरे पर मन्दिर बना है और मन्दिर में जो शिवलिंग है वो 5.5 मीटर ऊंचा व 2.3 मीटर परिधि का है। बिल्कुल विशालकाय शिवलिंग।
   यहां व्यावसायिकता हावी नहीं हुई है। एक इसी महीने में यहां थोडी चहल-पहल रहती है, अन्यथा यहां कौन आता होगा? पता नहीं इसका कोई नियमित पुजारी भी है या नहीं। हालांकि आज कोई पुजारी जैसा कुछ बैठा अवश्य था। उसका काम बस तिलक वगैरा लगा देने का था। सभी जमकर फोटो खींच रहे थे। शिवलिंग की परिक्रमा कर रहे थे। जब आप गर्भगृह में प्रवेश कर जाते हैं और शिवलिंग की परिक्रमा करते हैं तो एक तरफ विशालकाय शिवलिंग और दूसरी तरफ उससे भी विशालकाय दीवारों व खम्भों के बीच में आप स्वयं को नन्हा सा पाते हैं। बडा अच्छा अनुभव होता है यह। बाकी जगह तो नन्हा सा शिवलिंग होता है और हमें झुककर नमस्कार करना होता है। यहां सिर उठाकर नमस्कार करते हैं।
   इसके पीछे एक जैन मन्दिर भी है। यह भी अधूरा है और मन्दिर में भगवान शान्तिनाथ की एक विशालकाय प्रतिमा है। उनके अगल-बगल में भगवान पार्श्वनाथ और सुपार्श्वनाथ की प्रतिमाएं हैं। यहां तीनों भगवान ताले में बन्द हैं। हमें बाहर से ही दर्शन करने पडे। जैन मन्दिर तक सडक बनी है और बहुत बडी पार्किंग भी है। यहां जैन धर्मशाला भी है।
   वैसे तो आसपास भी बहुत कुछ देखने लायक स्थान हैं जैसे पार्वती गुफा, भोज महल के खण्डहर और बेतवा नदी। ऊंची-नीची जमीन है और मानसून में यहां कुदरती रौनक अलग ही कुछ होती है। हमें यहां दो घण्टे और लगते लेकिन आज ही पचमढी भी जाना था, इसलिये भोजपुर भ्रमण अधूरा छोडना पडा। यहां से औबेदुल्लागंज की तरफ 7 किलोमीटर चलने पर आशापुरी है। वहां भी कुछ प्राचीन मन्दिर वगैरह है। हम आशापुरी से होकर ही औबेदुल्लागंज गये थे लेकिन यहां रुके नहीं। और फिर भीमबेटका तो है ही। कुल मिलाकर यहां घूमने में पूरा दिन लग जायेगा।
   आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि एक बिहार में एक भोजपुर जिला भी है और उसका मुख्यालय आरा में है।


भोजपुर शिव मन्दिर


विशालकाय शिवलिंग










जैन मन्दिर के पास पुराने बेकार इंसुलेटरों को सजावट के काम में लाया गया है।

बीच में शान्तिनाथ और अगल-बगल में पार्श्वनाथ-सुपार्श्वनाथ।









अगले भाग में जारी...

1. भिण्ड-ग्वालियर-गुना पैसेंजर ट्रेन यात्रा
2. महेश्वर यात्रा
3. शीतला माता जलप्रपात, जानापाव पहाडी और पातालपानी
4. इन्दौर से पचमढी बाइक यात्रा और रोड स्टेटस
5. भोजपुर, मध्य प्रदेश
6. पचमढी: पाण्डव गुफा, रजत प्रपात और अप्सरा विहार
7. पचमढी: राजेन्द्रगिरी, धूपगढ और महादेव
8. पचमढी: चौरागढ यात्रा
9. पचमढ़ी से पातालकोट
10. पातालकोट भ्रमण और राजाखोह की खोज
11. पातालकोट से इंदौर वाया बैतूल

13 comments:

  1. वाह! सुंदर फोटो! हर बार एक एक नयी जगह आप हमें दिखाते हैं| धन्यवाद!

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    1. आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद निरंजन जी...

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  2. वाकई इतना बड़ा शिवलिंग आजतक नही देखा।

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    1. बिल्कुल भाई... साढे पांच मीटर बहुत होता है।

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  3. क्या ये दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग है ? नीरज जी, बेस से शिवलिंग के टॉप की उँचाई कितनी होगी ?

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    1. नहीं मुकेश जी, यह दुनिया का सबसे बडा शिवलिंग नहीं है। इसकी बेस से ऊंचाई तो नहीं पता लेकिन शिवलिंग ही साढे पांच मीटर ऊंचा है।

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  4. सावन का महीना होने के कारण भोजपुर में थोडी चहल-पहल थी अन्यथा बाकी समय यहां सन्नाटा पसरा रहता होगा .... ....
    नहीं ऐसी बात तो नहीं है.... सावन सोमवार को इतनी भीड़ रहती है कि पंक्ति में लगने की बाद करीब ३-४ घंटे लग जाते हैं. मुझे तो छुट्टी में भोजपुर जाना बहुत अच्छा लगता है. हमारे लिए यहाँ एक तरह के सबके अच्छी पिकनिक हो जाती है. भोपाल से २८ किलोमीटर है इसलिए ३-४ माह में भोजपुर आकर प्रकृति की गोद में तरोताजा होना मन को सुकून पहुँचाता है। .
    आपने हमारे भोपाल और भोजपुर की यात्रा की और आपको अच्छा लगा जानकार ख़ुशी हुयी।

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद कविता जी...

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  5. बहुत शानदार …

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    1. धन्यवाद अनुराग जी...

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  7. कभी सोचा नही कि भोपाल के आसपास भी इतनी खूबसूरत जगह मौजूद है देखने के लिए ! कई बार भोपाल आना जाना हुआ है लेकिन भारत भवन से आगे का जहां अछूता ही रह गया ! इस बार पक्का ! धन्यवाद नीरज , गुफाओं में से नयी नयी जगह निकालने के लिए !!

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    1. धन्यवाद सारस्वत जी...

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