Tuesday, September 22, 2015

भिण्ड-ग्वालियर-गुना पैसेंजर ट्रेन यात्रा

   18 अगस्त 2015
   आज है 20 सितम्बर यानी यात्रा किये हुए एक महीना हो चुका है। अमूमन मैं इतना समय वृत्तान्त लिखने में नहीं लगाता हूं। मैं यथाशीघ्र लिखने की कोशिश करता हूं ताकि लेखन में ताजगी बनी रहे। वृत्तान्त जितनी देर से लिखेंगे, उतना ही यह ‘समाचार’ होने लगता है। इसका कारण था कि वापस आते ही अण्डमान की तैयारियां करने लगा। फिर लद्दाख वृत्तान्त भी बचा हुआ था। अण्डमान तो नहीं जा पाये लेकिन फिर कुछ समय वहां न जाने का गम मनाने में निकल गया। अभी परसों ही चम्बा की तरफ निकलना है, उसमें ध्यान लगा हुआ है। न लिखने के कारण ब्लॉग पर ट्रैफिक कम होने लगा है। बडी अजीब स्थिति है- जब चार दिन वृत्तान्त न लिखूं और मित्रगण कहें कि बहुत दिन हो गये लिखे हुए तो मित्रों को गरियाता हूं कि पता है कितना समय लगता है लिखने में। तुमने तो चार सेकण्ड लगाये और शिकायत कर दी। इस बार किसी मित्र ने शिकायत नहीं की तो भी गरियाने का मन कर रहा है- भाईयों, भूल तो नहीं गये मुझे?

Friday, September 11, 2015

लद्दाख बाइक यात्रा का कुल खर्च

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   हम कोठारी साहब के साथ यात्रा पर निकले थे। खर्च हमने सम्मिलित रूप से शुरू किया था, बाद में दिल्ली आकर हिसाब लगा लेते। लेकिन कोठारी साहब श्रीनगर में बिछड गये। इन तीन-चार दिनों का हमने कोई हिसाब नहीं किया। जो खर्च कोठारी साहब ने किया, वो उनका था और जो हमने किया, वो हमारा था। 

दिनांक: 6 जून 2015, शनिवार
स्थानदूरीसमयखर्च
दिल्ली017:50800 पेट्रोल (12 लीटर)
बहलगढ4719:20
पानीपत पार10320:15-20:4570 कोल्ड ड्रिंक (कोठारी जी)
पीपली17022:05-22:15
अम्बाला छावनी21123:00-23:20
बनूड24223:59
कुल दूरी:242
मेरा कुल खर्च: 800

Monday, September 7, 2015

लद्दाख बाइक यात्रा- 21 (केलांग-मनाली-ऊना-दिल्ली)

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23 जून 2015
हम किसी भी जल्दी में नहीं थे। हमें परसों दोपहर तक दिल्ली पहुंचना था और केलांग से हम आराम से दो दिन में दिल्ली पहुंच सकते हैं। इसी वजह से रोज की तरह आज भी देर तक सोये। उठे तो मनदीप का फोन आया। वो आज सपरिवार मनाली आ रहा है और अभी बिलासपुर के आसपास था। यानी दोपहर तक वह मनाली पहुंच जायेगा। उसके पास अपनी गाडी है। हमने भी इरादा बना लिया कि आज हम मनदीप के साथ ही रुकेंगे और शाम को शानदार डिनर करेंगे।
दस बजे केलांग से चले। जल्दी ही टांडी पहुंच गये। यहां बारालाचा-ला से निकलकर दो अलग-अलग दिशाओं में बही चन्द्रा और भागा नदियों का संगम होता है। आलू के परांठे खाये और बाइक की टंकी फुल करा ली। हिमाचल में रोहतांग पार पूरे लाहौल में एकमात्र पेट्रोल पम्प टांडी में ही है। टांडी से आगे अगला पेट्रोल पम्प लगभग साढे तीन सौ किलोमीटर दूर लेह के पास कारू में है। बाइक की टंकी लगभग खाली हो चुकी थी, इसमें 11.83 लीटर पेट्रोल आया। कम्पनी के अनुसार टंकी की क्षमता 10 लीटर है। मैंने गुजरात से लेकर हिमाचल और जम्मू-कश्मीर तक हर जगह टंकी फुल कराई है, इसमें हमेशा 10 लीटर से ज्यादा ही तेल आता है। अब या तो कम्पनी गलत बता रही है कि टंकी दस लीटर की है। पेट्रोल पम्पों पर धांधलियां होती हैं लेकिन हर पेट्रोल पम्प ऐसा नहीं होता। खैर।