Friday, January 24, 2014

जैसलमेर में दो घण्टे

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
तीन बजे मैं जैसलमेर पहुंचा। संजय बेसब्री से मेरा इंतजार कर रहा था। वह नटवर का फेसबुक मित्र है। मुझसे पहचान तब हुई जब उसे पता चला कि नटवर और मैं साथ साथ यात्रा करेंगे। पिछले दिनों ही वह मेरा भी फेसबुक मित्र बना। उसने मेरा ब्लॉग नहीं पढा है, केवल फेसबुक पृष्ठ ही देखा है। मेरे हर फोटो को लाइक करता था। मैं कई दिनों तक बडा परेशान रहा जब जमकर लाइक के नॉटिफिकेशन आते रहे और सभी के लिये संजय ही जिम्मेदार था। मैं अक्सर लाइक को पसन्द नहीं करता हूं। ब्लॉग न पढने की वजह से उसे मेरे बारे में कुछ भी नहीं पता था। मेरा असली चरित्र मेरे ब्लॉग में है, फेसबुक पर नहीं।
सवा पांच बजे यानी लगभग दो घण्टे बाद मेरी ट्रेन है। इन दो घण्टों में मैं जैसलमेर न तो घूम सकता था और न ही घूमना चाहता था। मेरी इच्छा कुछ खा-पीकर स्टेशन जाकर आराम करने की थी। फिर साइकिल भी पार्सल में बुक करानी थी।

Wednesday, January 22, 2014

थार साइकिल यात्रा- लोंगेवाला से जैसलमेर

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
27 दिसम्बर 2013
सैनिकों की बैरक में भरपेट खा-पीकर दोपहर बाद दो बजे मैं रामगढ के लिये निकल पडा। रामगढ यहां से 43 किलोमीटर है। फौजियों ने बता दिया था कि इसमें से आधा रास्ता ऊंचे नीचे धोरों से भरा पडा है जबकि आखिरी आधा समतल है। अर्थात मुझे रामगढ पहुंचने में चार घण्टे लगेंगे।
यहां से निकलते ही एक गांव आता है- कालीभर। मुझे गुजरते देख कुछ लडके अपनी अपनी बकरियों को छोडकर स्टॉप स्टॉप चिल्लाते हुए दौडे लेकिन मैं नहीं रुका। रुककर करना भी क्या था? एक तो वे मुझे विदेशी समझ रहे थे। अपनी अंग्रेजी परखते। जल्दी ही उन्हें पता चल जाता कि हिन्दुस्तानी ही हूं तो वे साइकिल देखने लगते और चलाने की भी फरमाइश करते, पैसे पूछते, मुझे झूठ बोलना पडता। गांव पार हुआ तो चार पांच बुजुर्ग बैठे थे, उन्होंने हाथ उठाकर रुकने का इशारा किया, मैं रुक गया। औपचारिक पूछाताछी करने के बाद उन्होंने पूछा कि खाना खा लिया क्या? मैंने कहा कि हां, खा लिया। बोले कि कहां खाया? लोंगेवाला में। लोंगेवाला में तो खाना मिलता ही नहीं। फौजियों की बैरक में खा लिया था। कहने लगे कि अगर न खाया हो तो हमारे यहां खाकर चले जाओ। मेहमान भगवान होता है। मुझे मना करना पडा।

Monday, January 20, 2014

लोंगेवाला- एक गौरवशाली युद्धक्षेत्र

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
लोंगेवाला- एक निर्णायक और ऐतिहासिक युद्ध का गवाह।
1971 की दिसम्बर में जैसलमेर स्थित वायुसेना को सूचना मिली कि पाकिस्तान ने युद्ध छेड दिया है और उसकी सेनाएं टैंकों से लैस होकर भारतीय क्षेत्र में घुस चुकी हैं।
वह 3 और 4 दिसम्बर की दरम्यानी रात थी। पूर्व में बंगाल में अपनी जबरदस्त हार से खिन्न होकर पाकिस्तानियों ने सोचा कि अगर भारत के पश्चिमी क्षेत्र के कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया जाये तो वे भारत पर कुछ दबाव बना सकते हैं। चूंकि उनके देश का एक बडा हिस्सा उनके हाथ से फिसल रहा था, इसलिये वे कुछ भी कर सकते थे। उन्होंने जैसलमेर पर कब्जा करने की रणनीति बनाई। उस समय भारत का भी सारा ध्यान पूर्व में ही था, पश्चिम में नाममात्र की सेना थी।
जब पता चला कि पाकिस्तान ने आक्रमण कर दिया है तो कमान मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के हाथों में थी। उन्होंने ऊपर से सहायता मांगी। चूंकि यह रात का समय था, जवाब मिला कि या तो वहीं डटे रहकर दुश्मन को रोके रखो या रामगढ भाग आओ। चांदपुरी ने भागने की बजाय वही डटे रहने का निर्णय लिया। सहायता कम से कम छह घण्टे बाद मिलेगी अर्थात सुबह को।

Friday, January 17, 2014

थार साइकिल यात्रा- तनोट से लोंगेवाला

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
26 दिसम्बर 2012 की सुबह आराम से सोकर उठे। वैसे तो जल्दी ही उठ जाने की सोच रखी थी लेकिन ठण्ड ही इतनी थी कि जल्दी उठना असम्भव था। असली ठण्ड बाहर थी। यहां धर्मशाला में तो कुछ भी नहीं लग रही थी। तापमान अवश्य शून्य से नीचे रहा होगा। आज का लक्ष्य लोंगेवाला होते हुए असूतार पहुंच जाने का था जिसकी दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। ऐसा करने पर कल हम सम पहुंच सकते हैं।
दस बजे तक तो वैसे भी अच्छी धूप निकल जाती है। कोहरा भी नहीं था, फिर भी ठण्ड काफी थी। माता के दर्शन करके कैण्टीन में जमकर चाय पकौडी खाकर और कुछ अपने साथ बैग में रखकर हम चल पडे। आज हमें रास्ते भर कुछ भी खाने को नहीं मिलने वाला। जो भी अपने साथ होगा, उसी से पेट भरना होगा।
तनोट से लोंगेवाला वाली सडक पर निकलते ही सामना बडे ऊंचे धोरे से होता है। यह एक गंजा धोरा है, इस पर झाडियां भी नहीं हैं। हमें बताया गया कि कल के मुकाबले हमें आज ज्यादा ऊंचे धोरों का सामना करना पडेगा। इन सब बातों के मद्देनजर हमने चलने की स्पीड दस किलोमीटर प्रति घण्टा रखने का लक्ष्य रखा जिसे हमने पूरा भी किया क्योंकि धोरे पर चढने के बाद नीचे उतरना होता है जिससे समय की पूर्ति हो जाती है।

Wednesday, January 15, 2014

तनोट

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
अक्टूबर 1965 में एक युद्ध हुआ था- भारत और पाकिस्तान के मध्य। यह युद्ध देश की पश्चिमी सीमाओं पर भी लडा गया था। राजस्थान में जैसलमेर से लगभग सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी सेना भारतीय सीमा में घुसकर आक्रमण कर रही थी। उन्होंने सादेवाला और किशनगढ नामक सीमाक्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था और उनका अगला लक्ष्य तनोट नामक स्थान पर अधिकार करने का था। तनोट किशनगढ और सादेवाला के बीच में था जिसका अर्थ था कि इस स्थान पर दोनों तरफ से आक्रमण होगा।
जबरदस्त आक्रमण हुआ। पाकिस्तान की तरफ से 3000 से भी ज्यादा गोले दागे गये। साधारण परिस्थियों में यह छोटा सा स्थान तबाह हो जाना चाहिये था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिस्थितियां साधारण नहीं थीं, असाधारण थीं। कोई न कोई शक्ति थी, जो काम कर रही थी। ज्यादातर गोले फटे ही नहीं और जो फटे भी उन्होंने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। विश्वास किया जाता है कि तनोट माता के प्रताप से ऐसा हुआ। बाद में जब भारतीय सेना हावी हो गई, उन्होंने जवाबी आक्रमण किया जिससे पाकिस्तानी सेना को भयंकर नुकसान हुआ और वे पीछे लौट गये। 1971 में भी ऐसा ही हुआ।

Monday, January 13, 2014

थार साइकिल यात्रा- सानू से तनोट

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
25 दिसम्बर 2013, जब आधी दुनिया क्रिसमस मनाने की खुशी से सराबोर थी, हम पश्चिमी राजस्थान के एक छोटे से गांव में सडक किनारे एक छप्पर के नीचे सोये पडे थे। यहां से 45 किलोमीटर दूर जैसलमेर है और लगभग इतना ही सम है जहां लोग क्रिसमस और नये साल की छुट्टियां मनाने बडी संख्या में आते हैं। आज वहां उत्सव का माहौल बन रहा होगा और इधर हम भूखे प्यासे पडे हैं।
आठ बजे जब काफी सूरज निकल गया, तब हम उठे। दुकान वाला दुकान बन्द करके जा चुका था। ताला लटका था। हमने कल पांच कप चाय पी थी- कम से कम पच्चीस रुपये की थी। हमें टैंट उखाडते देख कुछ ग्रामीण आकर इकट्ठे हो गये। उन्होंने सूखी झाडियां एकत्र करके आग जला ली। उन्होंने बताया कि यह दुकान केवल रात को ही खुली रहती है, दिन में वह सोने घर चला जाता है। घर हालांकि इसी गांव में था, हम आसानी से जा सकते थे। जब हमने उसके घर का पता पूछा तो ग्रामीणों ने बताया कि वह ऐसा अक्सर करता रहता है। लोगों को फ्री में चाय पिला देता है। वैसे भी अब वह सो गया होगा, उठाना ठीक नहीं। ऐसा सुनकर हमने उसके घर जाने का विचार त्याग दिया।

Monday, January 6, 2014

थार साइकिल यात्रा: जैसलमेर से सानू

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
ट्रेन डेढ घण्टे की देरी से जैसलमेर पहुंची। पोखरण तक यह ठीक समय पर चल रही थी लेकिन उसके बाद हर स्टेशन पर बडी देर देर तक रुकी। एक बार जैसलमेर-जोधपुर पैसेंजर क्रॉस हुई, इसके बाद जैसलमेर-लालगढ एक्सप्रेस, फिर एक और, फिर एक भी नहीं, बस ऐसे ही खडी रही। नटवर का फोन आता रहा- कहां पहुंचा? पोखरण। कुछ देर बाद फिर पूछा। कहां पहुंचा? ओडानिया... लाठी... चांदण। और आखिरकार जब जैसलमेर की सूचना दी तो बोला कि जल्दी बाहर निकल, मैं स्टेशन के बाहर प्रतीक्षा कर रहा हूं।
पार्सल वालों ने साइकिल को पार्सल डिब्बे से बाहर निकाला। बेचारी लगभग खाली डिब्बे में गिरी पडी थी। दिल्ली से जोधपुर तक यह एक मोटरसाइकिल के ऊपर चढकर आई थी, अगल बगल में बडे बडे पैकेट थे, कहीं नहीं गिरी। एक हस्ताक्षर किया और साइकिल मेरे हवाले कर दी गई। उडती उडती निगाह डाली, कहीं कोई कमी नहीं दिखी। बाकी चलाने पर पता चलेगा।
बाहर निकला। दोनों तरह के नजारे थे- शान्त भी और हलचली भी। दोनों ही नजारे होटल वालों ने बना रखे थे। सस्ते होटल वाले यात्रियों को घेर-घेर कर पकड रहे थे। इधर से उधर धकिया रहे थे और महंगे होटल वाले इनसे कुछ दूर तख्ती लिये शालीनता से कतारबद्ध होकर खडे थे। तख्तियों पर होटलों के नाम लिखे थे- ये होटल, वो होटल।

Friday, January 3, 2014

थार साइकिल यात्रा का आरम्भ

जब लद्दाख गया था ना साइकिल लेकर, तो सोच लिया था कि यह आखिरी साइकिल यात्रा है। इसके बाद कोई साइकिल नहीं चलानी। हालांकि पहले भी ज्यादा साइकिल नहीं चलाई थी। फिर भी जब सपने पूरे होते हैं, तो उन्हें जीने में जो आनन्द है वो अगले सपने बुनने में नहीं है। बस, यही सोच रखा था कि एक सपना पूरा हुआ, इसी को जीते रहेंगे और आनन्दित होते रहेंगे।
लेकिन यह सपना जैसे जैसे पुराना पडता गया, आनन्द भी कम होता गया। फिर से नये सपने बुनने की आवश्यकता महसूस होने लगी ताकि उसे पूरा करने के बाद नया आनन्द मिले। थार साइकिल यात्रा की यही पृष्ठभूमि है। इसी कारण राजस्थान के धुर पश्चिम में रेत में साइकिल चलाने की इच्छा जगी। समय खूब था अपने पास। कोई यात्रा किये हुए अरसा बीत चुका था, उसका वृत्तान्त भी लिखकर और प्रकाशित करके समाप्त कर दिया था। बिल्कुल खाली, समय ही समय। तो इस यात्रा की अपनी तरफ से अच्छी तैयारी कर ली थी। गूगल अर्थ पर नजरें गडा-गडाकर देख लिया था रेत में जितने भी रास्ते हैं, उनमें अच्छी सडकें कितनी हैं। एक तो ऊंटगाडी वाला रास्ता होता है, कच्चा होता है, रेतीला होता है, साइकिल नहीं चल सकती। इसके लिये पक्की सडक चाहिये थी। गूगल ने सब दिखा दिया कि पक्की काली सडक कहां कहां है। कागज पर नक्शा बना लिया और दूरियां भी लिख ली।

Wednesday, January 1, 2014

रेलयात्रा सूची: 2014

2005-2007 | 2008 | 2009 | 2010 | 2011 | 2012 | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017

क्रम संकहां सेकहां तकट्रेन नंट्रेन नामदूरी
(किमी)
कुल दूरीदिनांकश्रेणीगेज
1नई दिल्लीलुधियाना12497शान-ए-पंजाब एक्स31210655806/01/2014सेकण्ड सीटिंगब्रॉड
2लुधियानालोहियां खास74969लुधियाना- लोहियां खास डीएमयू7710663506/01/2014साधारणब्रॉड
3लोहियां खासमल्लांवाला खास74937जालंधर- फिरोजपुर डीएमयू4210667706/01/2014साधारणब्रॉड
4मल्लांवाला खासजम्मू तवी19225भटिंडा- जम्मू तवी एक्स37810705506/01/2014शयनयानब्रॉड
5जम्मू तवीऊधमपुर12445उत्तर सम्पर्क क्रान्ति एक्स5310710807/01/2014साधारणब्रॉड
6बनिहालश्रीनगर74629बनिहाल- बारामूला डीएमयू8010718807/01/2014साधारणब्रॉड
7श्रीनगरबारामूला74625बनिहाल- बारामूला डीएमयू5810724608/01/2014साधारणब्रॉड
8बारामूलाबनिहाल74628बारामूला- बनिहाल डीएमयू13810738408/01/2014साधारणब्रॉड
9जम्मू तवीदिल्ली आजादपुर09022जम्मू तवी- बान्द्रा स्पेशल56910795308/01/2014साधारणब्रॉड
10दिल्ली शाहदरामेरठ छावनी74001दिल्ली- सहारनपुर डीएमयू6610801913/01/2014साधारणब्रॉड
11नई दिल्लीलामडिंग12236राजधानी एक्स212711014621/01/2014थर्ड एसीब्रॉड
12लामडिंगसिल्चर15693बराक वैली एक्स21511036123/01/2014शयनयानमीटर
13गुवाहाटीन्यू बंगाईगांव55804गुवाहाटी- न्यू बंगाईगांव पैसेंजर20711056831/01/2014साधारणब्रॉड
14न्यू बंगाईगांवगुवाहाटी15610अवध असम एक्स15711072531/01/2014साधारणब्रॉड
15गुवाहाटीआजरा55804गुवाहाटी- न्यू बंगाईगांव पैसेंजर1611074102/02/2014साधारणब्रॉड
16दिल्ली सराय रोहिल्लावीरमगाम19264दिल्ली सराय रोहिल्ला-पोरबन्दर एक्स99411173517/02/2014शयनयानब्रॉड
17वीरमगामसूरत59050वीरमगाम-वलसाड पैसेंजर29411202918/02/2014साधारणब्रॉड
18सूरतवसई रोड59440अहमदाबाद-बोरीवली पैसेंजर21511224419/02/2014साधारणब्रॉड
19वसई रोडदिवा71083वसई रोड-दिवा डीएमयू4511228919/02/2014साधारणब्रॉड
20दिवाडोम्बिवलीलोकल711229619/02/2014साधारणब्रॉड
21डोम्बिवलीपरेललोकल4211233819/02/2014साधारणब्रॉड
22एलफिंस्टन रोडमुम्बई सेंट्रललोकल511234319/02/2014साधारणब्रॉड
23मुम्बई सेंट्रलवडोदरा12927मुम्बई-वडोदरा एक्स39211273519/02/2014शयनयानब्रॉड
24वडोदराशामगढ59831वडोदरा-कोटा पैसेंजर39411312920/02/2014साधारणब्रॉड
25शामगढकोटा12415इण्टरसिटी एक्स13411326320/02/2014साधारणब्रॉड
26कोटाहजरत निजामुद्दीन12964मेवाड एक्स45711372020/02/2014शयनयानब्रॉड
27आनन्द विहार टर्मि.हल्द्वानी12040शताब्दी एक्स26411398423/03/2014एसी चेयर कारब्रॉड
28आनन्द विहार टर्मि.हल्द्वानी12040शताब्दी एक्स26411424805/05/2014एसी चेयर कारब्रॉड
29काठगोदामकानपुर सेंट्रल12210गरीब रथ45911470705/05/2014थर्ड एसीब्रॉड
30कानपुर सेंट्रलझांसी54158कानपुर-झांसी पैसेंजर22011492706/05/2014साधारणब्रॉड
31झांसीचण्डीगढ12687मदुरई- चण्डीगढ लिंक एक्स74311567006/05/2014साधारणब्रॉड
32चण्डीगढकालका14888बाडमेर- कालका एक्स3811570807/05/2014साधारणब्रॉड
33जोगिन्दर नगरज्वालामुखी रोड52472जोगिन्दर नगर- पठानकोट पैसेंजर12111582914/05/2014साधारणनैरो
34चण्डीगढसब्जी मण्डी12312कालका- हावडा मेल26211609115/05/2014शयनयानब्रॉड
35हजरत निजामुद्दीनरायपुर12808समता एक्स138311747414/07/2014शयनयानब्रॉड
36रायपुरविशाखापटनम18517कोरबा- विशाखापटनम एक्स52811800215/07/2014शयनयानब्रॉड
37विशाखापटनमअरकू58501विशाखापटनम- किरन्दुल पैसेंजर13111813317/07/2014सेकण्ड सीटिंगब्रॉड
38अरकूजगदलपुर58501विशाखापटनम- किरन्दुल पैसेंजर19111832418/07/2014सेकण्ड सीटिंगब्रॉड
39किरन्दुलजगदलपुर58502किरन्दुल- विशाखापटनम पैसेंजर15011847420/07/2014साधारणब्रॉड
40भाटापारादिल्ली सफदरजंग12549दुर्ग- जम्मू तवी एक्स118511965922/07/2014शयनयानब्रॉड
41हजरत निजामुद्दीनमथुरा12280ताज एक्स13411979304/08/2014सेकण्ड सीटिंगब्रॉड
42मथुराअलवर51971मथुरा-अलवर पैसेंजर12111991404/08/2014साधारणब्रॉड
43अलवरजयपुर14808अलवर- जयपुर एक्स15112006504/08/2014साधारणब्रॉड
44जयपुरसवाई माधोपुर59805जयपुर- बयाना पैसेंजर13112019605/08/2014साधारणब्रॉड
45सवाई माधोपुरआगरा किला59813कोटा- यमुना ब्रिज पैसेंजर22512042105/08/2014साधारणब्रॉड
46आगरा छावनीहजरत निजामुद्दीन12687मदुरै- देहरादून एक्स18712060805/08/2014साधारणब्रॉड
47नई दिल्लीमुगलसराय22812राजधानी एक्स78712139501/09/2014थर्ड एसीब्रॉड
48मुगलसरायगोमो53522वाराणसी- आसनसोल पैसेंजर32212171702/09/2014साधारणब्रॉड
49गोमोआसनसोल63542गोमो- आसनसोल मेमू8812180502/09/2014साधारणब्रॉड
50आसनसोलबर्द्धमान63516आसनसोल- बर्द्धमान मेमू10512191002/09/2014साधारणब्रॉड
51बर्द्धमानहावडा37840बर्द्धमान- हावडा लोकल10712201702/09/2014साधारणब्रॉड
52हावडापटना13005हावडा- अमृतसर एक्स53212254902/09/2014शयनयानब्रॉड
53पटनाबक्सर63227पटना- बक्सर मेमू11812266703/09/2014शयनयानब्रॉड
54बक्सरवाराणसी13239पटना- कोटा एक्स11112277803/09/2014साधारणब्रॉड
55वाराणसीआनन्द विहार टर्मिनल22407गरीब रथ एक्स78112355903/09/2014थर्ड एसीब्रॉड
56नई दिल्लीगोमो12816नन्दन कानन एक्स115912471808/09/2014शयनयानब्रॉड
57गोमोखडगपुर58604गोमो- खडगपुर पैसेंजर24612496409/09/2014साधारणब्रॉड
58खडगपुरटाटानगर68005खडगपुर- टाटानगर मेमू13412509809/09/2014साधारणब्रॉड
59टाटानगरगोंदिया58111टाटानगर- इतवारी पैसेंजर75212585010/09/2014शयनयानब्रॉड
60गोंदियारायपुर68724गोंदिया- रायपुर मेमू17112602111/09/2014साधारणब्रॉड
61रायपुरगेवरा रोड68746रायपुर- गेवरा रोड मेमू20812622911/09/2014साधारणब्रॉड
62गेवरा रोडबिलासपुर68731गेवरा रोड- बिलासपुर मेमू9012631911/09/2014साधारणब्रॉड
63बिलासपुरकटनी68747बिलासपुर- कटनी पैसेंजर31812663712/09/2014साधारणब्रॉड
64कटनीहजरत निजामुद्दीन22181जबलपुर- निजामुद्दीन एक्स81812745512/09/2014शयनयानब्रॉड
65नई दिल्लीलुधियाना12497शाने पंजाब एक्स31212776727/10/2014वातानुकूलित कुर्सीयानब्रॉड
66लुधियानाफिरोजपुर छावनी74963लुधियाना- फिरोजपुर डीएमयू12412789127/10/2014साधारणब्रॉड
67फिरोजपुर छावनीकोटकपूरा54562फिरोजपुर-बठिण्डा पैसेंजर4412793528/10/2014साधारणब्रॉड
68कोटकपूरामुक्तसर74985बठिण्डा- फाजिल्का डीएमयू3312796828/10/2014साधारणब्रॉड
69मुक्तसरहिसार54783फाजिल्का-रेवाडी पैसेंजर24912821728/10/2014साधारणब्रॉड
70हिसारदिल्ली किशनगंज12556गोरखधाम एक्स17712839428/10/2014शयनयानब्रॉड
71दिल्ली सराय रोहिल्लारतनगढ14705दिल्ली सराय रोहिल्ला- सुजानगढ एक्स32012871401/12/2014साधारणब्रॉड
72रतनगढबीकानेर54830चुरू- बीकानेर पैसेंजर13812885201/12/2014साधारणब्रॉड
73लालगढफलोदी14704लालगढ-जैसलमेर एक्स15812901002/12/2014साधारणब्रॉड
74फलोदीलालगढ14703जैसलमेर- लालगढ एक्स15812916802/12/2014साधारणब्रॉड
75बीकानेरदिल्ली सराय रोहिल्ला12458बीकानेर- दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्स45812962602/12/2014शयनयानब्रॉड

नोट: दूरी दो-चार किलोमीटर ऊपर-नीचे हो सकती है।
भूल चूक लेनी देनी

कुछ और तथ्य:
कुल यात्राएं: 697 बार
कुल दूरी: 129626 किलोमीटर

पैसेंजर ट्रेनों में: 37160 किलोमीटर (373 बार)
मेल/एक्सप्रेस में: 42984 किलोमीटर (225 बार)
सुपरफास्ट में: 49482 किलोमीटर (99 बार)

ब्रॉड गेज से: 125844 किलोमीटर (665 बार)
मीटर गेज से: 2657 किलोमीटर (19 बार)
नैरो गेज से: 1125 किलोमीटर (13 बार)

बिना आरक्षण के: 60372 किलोमीटर (589 बार)
शयनयान (SL) में: 61110 किलोमीटर (91 बार)
सेकंड सीटिंग (2S) में: 2095 किलोमीटर (7 बार)
थर्ड एसी (3A) में: 4906 किलोमीटर (6 बार)
एसी चेयरकार (CC) में: 1143 किलोमीटर (4 बार)

4000 किलोमीटर से ज्यादा: 1 बार
1000 से 3999 किलोमीटर तक: 17 बार
500 से 999 किलोमीटर तक:  35 बार
100 से 499 किलोमीटर तक: 256 बार
50 से 99 किलोमीटर तक (अर्द्धशतक): 237 बार

किस महीने में कितनी यात्रा
महीनापैसेंजरमेल/एक्ससुपरफास्टकुल योग
जनवरी1769206925246362
फरवरी47904697490514392
मार्च3036188740658988
अप्रैल1819295412276000
मई2964131423136591
जून1393162545297547
जुलाई2294360139629857
अगस्त6199127111453833448
सितम्बर3831186237449437
अक्टूबर51593935505914153
नवम्बर2032154010204592
दिसम्बर1874478915968259

डायरी के पन्ने- 19

चेतावनी: ‘डायरी के पन्ने’ मेरे निजी और अन्तरंग विचार हैं। कृपया इन्हें न पढें। इन्हें पढने से आपकी धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
18 दिसम्बर 2013, सोमवार
1. साहिबाबाद दीदी के यहां चला गया। मेरे ठिकाने से उनका घर बारह किलोमीटर है, साइकिल से गया, पौन घण्टा लगा। इनके यहां एक विचित्र रिवाज देखा- मच्छरों को न आने देने का रिवाज। मुख्य प्रवेश द्वार पर दो दरवाजे हैं- एक जालीदार और दूसरा ठोस। दोनों दरवाजों पर हमेशा कुण्डी लगी रहती है। जब भी किसी को अन्दर आना होता है या बाहर जाना होता है तो दिन में तो मच्छरों के आने का कोई खतरा नहीं है लेकिन रात को यह आना-जाना जोखिम भरा होता है। दरवाजा खुले तो मच्छरों के आ जाने का डर रहता है। इसलिये कुण्डी खोलने से पहले सबसे पहले घर की लाइटें बन्द की जाती हैं, फिर कुण्डी खोलकर झट से बन्द कर दी जाती है। लाइटें इसलिये बन्द की जाती हैं ताकि अन्धेरे में मच्छरों को रास्ता न दिखे। यही बात बडी विचित्र है क्योंकि मच्छर सामान्यतः एक रात्रिचर कीट है जिसे अन्धेरा पसन्द होता है। फिर भी अगर कोई मच्छर अन्दर आ जाता है तो उसका काम तमाम होते देर नहीं लगती। घर से सभी सदस्य अखबार लेकर मच्छर के पीछे पड जाते हैं। कोई बिस्तर पर चढकर छत तक धावा बोलता है तो कोई कुर्सी पर चढकर। मच्छर के मर जाने पर उसकी लाश को ढूंढने की जल्दी मचती है ताकि पक्का हो जाये कि वो मर गया है।
वैसे दिनभर में दो-चार बार मच्छर का काट लेना लाभदायक ही होता है। इससे मच्छर दंश के प्रति शरीर की प्रतिरोधकता बढती है।