Wednesday, August 7, 2013

शो-कार (Tso Kar) झील

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शाम चार बजे शो-कार के लिये चल पडा। पहले तो मामूली सी चढाई है, उसके बाद मामूली ढलान। 16 किलोमीटर तक यही ढलान पैडल नहीं मारने देता। सिंगल सडक है और कोई आवागमन नहीं।
झील काफी दूर से ही दिखने लगती है। लेकिन नजदीकी मानव बस्ती थुक्जे गोम्पा 16 किलोमीटर दूर है। यहां से भी करीब चार किलोमीटर और आगे चलकर झील के नजदीक तक पहुंचा जा सकता है।
जब मैं थुक्जे से करीब 7-8 किलोमीटर दूर था तो दूर सामने से चार मोटरसाइकिल वाले आ रहे थे। सडक पर मामूली ढलान अवश्य है लेकिन यह पहाडी सडक नहीं है। झील क्षेत्र काफी विशाल है। पानी एक कोने में ही है, बाकी क्षेत्र विशाल मैदान है। 7-8 किलोमीटर दूर से ही थुक्जे दिख रहा था।
तो मोटरसाइकिल वाले आ रहे थे, उनसे करीब 100 मीटर दूर सडक से हटकर चार-पांच जानवर भी बडी तेजी से दौड लगा रहे थे। काफी दूरी होने से जानवर पहचान में नहीं आ रहे थे। वे मोटरसाइकिलों के साथ साथ भाग रहे थे तो जाहिर है मेरी तरफ आ रहे थे। मुझे लगा कुत्ते हैं। लद्दाखी कुत्ते कुछ बडे होते हैं। पता नहीं मुझसे क्या खता हो गई कि वे मेरी तरफ आ रहे हैं। मैं बुरी तरह डर गया।
और पास आये तो देखा कि गधे थे। लद्दाखी जंगली गधे यानी क्यांग। असल में यह झील क्षेत्र काफी बडा मैदान है, घास पानी भी प्रचुर मात्रा में है तो यह इन गधों का निवास बन गई है। ये गधे मोटरसाइकिलों से डरे हुए थे। इनकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें सिवाय इसके कि चलती मोटरसाइकिलों के आगे-आगे ही भागा जाये।
सवा घण्टे में थुक्जे पहुंच गया। ऊपर पहाडी पर गोम्पा बना है। गांव बिल्कुल उजाड व गन्दा है। घरों की छतों पर भेड की खाल सूखने के लिये पडी रहती है। गांव पार करके दो बडे बडे तम्बू मिले। एक के सामने चार-पांच सम्भ्रान्त व्यक्ति बैठे थे। मैं भी यहीं रुक गया व चाय की फरमाइश कर दी।
मनाली-लेह सडक मात्र एक सडक नहीं है, बल्कि एक सीमा रेखा भी है। लद्दाख क्षेत्र में आप स्वेच्छा से इस सडक के पूर्व में नहीं जा सकते। इसमें से पूर्व की ओर कई रास्ते गये हैं- लेह में खारदूंग-ला की तरफ नुब्रा रोड, कारू में चांग-ला की तरफ पेंगोंग रोड, उप्शी में चांगथांग रोड व यह शो-कार वाली रोड; ये चार सडकें मुख्य हैं। इन चारों सडकों पर चलने के लिये लेह से परमिट लेना आवश्यक है। शो-कार वाली सडक का चेक-पोस्ट यहीं है। यानी इस सडक पर आप 16 किलोमीटर तक ही बिना परमिट के जा सकते हो। आगे यह सडक चांगथांग व शो-मोरीरी जाती है। लेकिन अगर आपको केवल शो-कार ही देखनी है तो तीन-चार किलोमीटर आगे तक भी बिना परमिट के जा सकते हैं। मुझे केवल यही झील देखनी थी, इसलिये आगे जाने दिया।
गांव से करीब चार किलोमीटर आगे निकल आया। झील छोटी सी है और खारे पानी की है। यह इसी से पता चलता है कि गांव से निकलते ही मिट्टी में रेह मिलने लगती है। झील के नजदीक जायें तो पूरी मिट्टी ही सफेद है यानी नमकयुक्त है। पहले इस नमक का बडा प्रयोग होता होगा, अब सडक मार्ग खुल जाने से सब बन्द। इसके अलावा कुछ पक्षी भी कलरव करते दिखाई दिये।
वैसे तो अब चांगथांग का बहुत बडा भू-भाग मेरे लिये खुला था, चेकपोस्ट पार कर ही चुका था। लेकिन बिना परमिट के जाना ठीक नहीं। चीन की सीमा यहां से ज्यादा दूर नहीं है, इसलिये परमिट लेना पडता है।
पन्द्रह बीस मिनट रुककर वापस चल पडा। वापसी उतनी आसान नहीं थी। आते समय जो मामूली ढलान था, वही अब मामूली चढाई बन गया। रास्ते में गधों का पूरा झुण्ड मिला लेकिन मेरे नजदीक आने पर दूर भाग गये।
आसमान में बादल थे, इसलिये अत्यधिक ठण्ड थी। साढे सात बजे जब ठिकाने पर पहुंचा तो ठण्ड से कांप रहा था। भोजन से निवृत्त होकर जब रजाई में घुसा, तब भी कांप रहा था। इस स्थान की ऊंचाई 4630 मीटर है। पहले इससे भी ऊंची जगहों पर सो चुका, वहां ठण्ड नहीं लगी थी। आज पता नहीं क्या बात है कि ठण्ड लग रही है।

शो कार की ओर जाती सडक


यह क्षेत्र एक विशाल चरागाह है। स्थान स्थान पर पानी की उपलब्धता भी है।


शो-कार एक छोटी सी झील है जो काफी दूर से दिखने लगती है।




लद्दाखी जंगली गधा यानी क्यांग




शो-कार के किनारे बसा गांव।





दूर ऊपर पहाडी पर दिखता गोम्पा और नीचे बसा गांव




रुकने और खाने के लिये स्थानीय लोगों द्वारा लगाया गया तम्बू


क्यांगों का झुण्ड




अगला भाग: लद्दाख साइकिल यात्रा- बारहवां दिन- शो-कार मोड से तंगलंगला

मनाली-लेह-श्रीनगर साइकिल यात्रा
1. साइकिल यात्रा का आगाज
2. लद्दाख साइकिल यात्रा- पहला दिन- दिल्ली से प्रस्थान
3. लद्दाख साइकिल यात्रा- दूसरा दिन- मनाली से गुलाबा
4. लद्दाख साइकिल यात्रा- तीसरा दिन- गुलाबा से मढी
5. लद्दाख साइकिल यात्रा- चौथा दिन- मढी से गोंदला
6. लद्दाख साइकिल यात्रा- पांचवां दिन- गोंदला से गेमूर
7. लद्दाख साइकिल यात्रा- छठा दिन- गेमूर से जिंगजिंगबार
8. लद्दाख साइकिल यात्रा- सातवां दिन- जिंगजिंगबार से सरचू
9. लद्दाख साइकिल यात्रा- आठवां दिन- सरचू से नकी-ला
10. लद्दाख साइकिल यात्रा- नौवां दिन- नकी-ला से व्हिस्की नाला
11. लद्दाख साइकिल यात्रा- दसवां दिन- व्हिस्की नाले से पांग
12. लद्दाख साइकिल यात्रा- ग्यारहवां दिन- पांग से शो-कार मोड
13. शो-कार (Tso Kar) झील
14. लद्दाख साइकिल यात्रा- बारहवां दिन- शो-कार मोड से तंगलंगला
15. लद्दाख साइकिल यात्रा- तेरहवां दिन- तंगलंगला से उप्शी
16. लद्दाख साइकिल यात्रा- चौदहवां दिन- उप्शी से लेह
17. लद्दाख साइकिल यात्रा- पन्द्रहवां दिन- लेह से ससपोल
18. लद्दाख साइकिल यात्रा- सोलहवां दिन- ससपोल से फोतूला
19. लद्दाख साइकिल यात्रा- सत्रहवां दिन- फोतूला से मुलबेक
20. लद्दाख साइकिल यात्रा- अठारहवां दिन- मुलबेक से शम्शा
21. लद्दाख साइकिल यात्रा- उन्नीसवां दिन- शम्शा से मटायन
22. लद्दाख साइकिल यात्रा- बीसवां दिन- मटायन से श्रीनगर
23. लद्दाख साइकिल यात्रा- इक्कीसवां दिन- श्रीनगर से दिल्ली
24. लद्दाख साइकिल यात्रा के तकनीकी पहलू

12 comments:

  1. उस झील में इतना खारापन पहुँचा कैसे, एक शोध का विषय हो सकता है। बहुत सुन्दर चित्र, आनन्दमयी यात्रा।

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  2. behtarin photos ke saath sundar vivran

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  3. ye sare क्यांग apne beech is dadhii wale prani ko dekh ker kitne chakit ho rahe...


    Ha! Ha! Ha!

    photos bahut badhiya..

    jheel tho lag raha sookhi padi hai??

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  4. 23 number wali photo tho gazab hai!!
    utha late Neeraj..

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  5. सारे फोटो अच्छे आये हैं, नीरज....
    शो-मोरीरी और लेह-मनाली रोड मैंने अगले ट्रिप के लिए छोड़ राखी है, कहते हैं अगर फ्लोमिंगो पक्षी देखने हैं. तो शो-मोरीरी जाओ...
    मेरी इस बार कि यात्रा में यह छूट गयी...

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  6. मनाली-लेह सडक मात्र एक सडक नहीं है, बल्कि एक
    सीमा रेखा भी है। लद्दाख क्षेत्र में आप स्वेच्छा से
    इस सडक के पूर्व में नहीं जा सकते। kyo bhai.....?

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  7. मनमोहक दृश्य .. कुदरत की जादूगिरी
    - Anilkv

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  8. भाई लद्दाखी गधों को देखने की कब से तमन्ना थी, वो आपने पूरी कर दी... लेकिन शो मोरीरी जाना तो बनता था....

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  9. नीरज जी फोटू तो घणे बढिया खिच राखे है। यात्रा का वर्णन भी बढिया है।

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  10. शानदार फोटोग्राफी, कोई मुकाबला नहीं !!

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  11. यहाँ के गधे भी खुबसूरत है ...

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  12. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ ( 6 अगस्त से 10 अगस्त, 2013 तक) में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

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