Monday, November 29, 2010

हल्दीघाटी- जहां इतिहास जीवित है

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हल्दीघाटी एक ऐसा नाम है जिसको सुनते ही इतिहास याद आ जाता है। हल्दीघाटी के बारे में हम तीसरी चौथी कक्षा से ही पढना शुरू कर देते हैं: रण बीच चौकडी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोडे से, पड गया हवा का पाला था।
18 अगस्त 2010 को जब मैं मेवाड (उदयपुर) गया तो मेरा पहला ठिकाना नाथद्वारा था। उसके बाद हल्दीघाटी। पता चला कि नाथद्वारा से कोई साधन नहीं मिलेगा सिवाय टम्पू के। एक टम्पू वाले से पूछा तो उसने बताया कि तीन सौ रुपये लूंगा आने-जाने के। हालांकि यहां से हल्दीघाटी लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर है इसलिये तीन सौ रुपये मुझे ज्यादा नहीं लगे। फिर भी मैंने कहा कि यार पच्चीस किलोमीटर ही तो है, तीन सौ तो बहुत ज्यादा हैं। बोला कि पच्चीस किलोमीटर दूर तो हल्दीघाटी का जीरो माइल है, पूरी घाटी तो और भी कम से कम पांच किलोमीटर आगे तक है। चलो, ढाई सौ दे देना। ढाई सौ में दोनों राजी।
यह सारा इलाका पहाडी है। राजसमन्द जिले में पडता है। खमनोर गांव आते ही बोला कि उस समय यह गांव यहां नहीं था। यही से हल्दीघाटी का इलाका शुरू हो जाता है। यहां मिट्टी का रंग हल्दी जैसा पीला है। कहीं कहीं पर पीलापन और लालपन बहुत ज्यादा है।

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कहा जाता है कि हल्दीघाटी में जहां-जहां भी मुगलों और मेवाडियों की मुठभेड हुई, वहां इतना खून बहा कि मिट्टी ही लाल हो गयी।
हल्दीघाटी नाम का कोई गांव नहीं है। यह एक पहाडी घाटी है। इसी नाम का एक दर्रा भी है। यह काफी बडे भूभाग में फैली है। पूरी घाटी पार करने के बाद हल्दीघाटी संग्रहालय आता है। इसे एक किले की शक्ल में बनाया गया है।
haldighati

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यहां का मुख्य आकर्षण यह संग्रहालय ही है। तीस रुपये का टिकट लेना पडता है। कैमरे का चार्ज अलग से देना होता है। इसमें युद्ध का सजीव वर्णन है।

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मुगलों की सेना में हाथियों की संख्या ज्यादा थी और चेतक को हाथियों के बीच रहकर युद्ध करना पडता था। अतः हाथियों को भ्रमित करने के लिये चेतक के मुंह पर हाथी की सूंड की तरह दिखने वाला बनावटी मास्क लगाया गया। मुगल सेनापति एक राजपूत मानसिंह था। वह एक हाथी के हौदे में बैठकर युद्ध कर रहा था। एक मौके पर जैसे ही चेतक ने ऊंची छलांग लगाकर हाथी के सिर पर पैर रखे तो महाराणा प्रताप ने मानसिंह पर भाले से वार किया। मानसिंह हौदे में छुप गया और भाले से बच गया। लेकिन हाथी की सूंड में बंधी तलवार के चेतक का एक पैर बुरी तरह घायल हो गया।
अब झालामान की बारी थी। उसने महाराणा प्रताप को संकट में घिरा देखकर जबरदस्ती उनका मुकुट अपने सिर पर रख लिया और युद्ध करने लगा। मुगलों ने सोचा कि वो रहा प्रताप और पिल पडे झालामान पर। इतने में प्रताप सुरक्षित निकल गये। घायल चेतक ने अपने स्वामी को एक नाला पार कराते समय दम तोड दिया।
अब संग्रहालय की कुछ झलकियां:

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यह कुम्भलगढ किले का नमूना है।

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मेवाड में प्रसिद्ध मन्दिरों के मॉडल

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हल्दीघाटी में गुलाब की खेती जमकर होती है। यहां गुलाब उत्पाद उच्च कोटि के होते हैं।

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संग्रहालय से कुछ दूर चेतक स्मारक

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चेतक स्मारक

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प्रताप गुफा। इसी गुफा में बैठकर प्रताप युद्ध की रणनीति बनाया करते थे।

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हल्दीघाटी दर्रा। टम्पू वाले ने साथ जाने से मना कर दिया नहीं तो मैं जाकर देखता कि यह रास्ता जाता कहां है।

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हल्दी घाटी दर्रा।

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हल्दीघाटी के कुछ और चित्र।

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और यह है अपनी सवारी। वापस आते समय टम्पू वाले ने पूछा कि सवारियां बैठा लूं क्या। बैठा ले भाई, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। खमनोर से उसने सवारियां बैठा ली।

हल्दीघाटी का युद्ध अकबर के सेनापति मानसिंह और राणा प्रताप के बीच 18 जून 1576 को हुआ था। इसमें प्रताप की हार हुई थी। लेकिन आज भी मेवाडी इसे हार नहीं मानते। वे इसे बराबरी वाला युद्ध मानते हैं क्योंकि एक तो राणा प्रताप बच गये थे और दूसरे मेवाड फिर भी अकबर के अधीन नहीं हुआ।

अगला भाग: उदयपुर - मोती मगरी और सहेलियों की बाड़ी


उदयपुर यात्रा
1. नाथद्वारा
2. हल्दीघाटी- जहां इतिहास जीवित है
3. उदयपुर- मोती मगरी और सहेलियों की बाडी
4. उदयपुर- पिछौला झील

37 comments:

  1. हल्दी घाटी के बारे में सुंदर पाठ है।

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  2. हल्दी घाटी को आपने जीवंत कर दिया भाई !
    मैं जब गया था ,इतना नहीं देख पाया था ,संग्रहालय तो जा ही नहीं पाया !
    मुझे तो वह केवल उजाड़ सी घाटी लगी थी ...

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  3. हल्दीघाटी युद्ध का सजीव वर्णन। आनन्द आ गया।

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  4. बडे गज़ब की पोस्ट रही आज की। महाराणा प्रताप, और चेतक की प्रसिद्ध हल्दीघाटी को कौन भारतीय नहीं देखना चाहता। राज्य और केन्द्र सरकार और स्थानीय प्रशासन को हल्दीघाटी की यात्रा सुलभ कराने के प्रयास करने चाहिये। जानकारी और चित्रोंके लिये धन्यवाद!

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  5. सुन्दर वर्णन एवं फोटू. मुगलों ने भी राजपूत को ही राजपूत से लडवाया. वहां के लोगों में मानसिंह के बारे में क्या विचार हैं.

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  6. बहुत दिनों से इस पोस्‍ट की इंतजार थी। महाराणा प्रताप की हल्‍दी घाटी युद्ध में हार नहीं हुई थी, क्‍योंकि प्रताप को मुगल सैनिक पकड़ नही पाए थे। हल्‍दी घाटी युद्ध के बाद प्रताप ने वापस अपना सैन्‍यबल एकत्र किया और दिवेर युद्ध किया जिसमें अकबर द्वारा स्‍थापित 84 थानों को प्रताप ने जीता और उसके बाद चावण्‍ड को अपनी राजधानी बनाकर 10 वर्षों तक प्रताप ने राज किया।

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  7. पढ़ कर अच्छा लगा।

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  8. बहुत बढ़िया वर्णन किया है नीरज ! अगली यात्रा के लिए शुभकामनायें !

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  9. नीरज जी
    भारतीय इतिहास से जुड़े इस स्थल के बारे में आपकी यात्रा वाकई अविस्मर्णीय रही होगी......!!!!! तस्वीरों वाला ये यात्रा वृतांत हमें बहुत अच्छा-ज्ञानवर्धक लगा.आभार...

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  10. 25किमी के लिये 300 ज्यादा नहीं लगे, फिर कम क्यों करवाये जी?
    टैम्पो वाला साथ नहीं चला आपको भी कहीं जाने के लिये साथ की जरूरत होती है क्या
    दूसरी सवारियों को बैठाया था उस कमाई को 250में से कुछ कम करना चाहिये था

    प्रणाम

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  11. हल्दी घाटी के बारे में पहली बार इतनी तस्वीरें और जानकारी पायी है।
    हार्दिक धन्यवाद

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  12. भाई मैं तो रास्तों वाले फोटू पे ही अटका रह गया.... मजा आ गया भाई :)

    बहुत अच्छा से आपने वर्णन किया है हल्दीघाटी का :)

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  13. बहुत ही अच्छी पोस्ट .ऐतिहासिक स्थल देखने का बहुत चस्का है मुझे. पर हल्दीघाटी आजतक नहीं जा पाई .आपने बहुत ही कुशलता से दिखा दिया .आभार.

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  14. बहुत बढ़िया. ऐसा लगा जैसे संग्रहालय के भीतर के कुछ और चित्र होने चाहिए.

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  15. यार भटकती आत्मा, मैं इस घाटी से कम से कम आठ या नौ बार तो निकला ही हूं आज तक पर इतनी सुंदर नही लगी जितनी तेरे कैमरे से. इसके लिए घणा सारा धन्यवाद लेले.

    भारतीयों के लिये महाराणा प्रताप एक आदर्श और प्रेरक व्यक्तित्व है. तस्वीरे देखकर और आलेख पढकर तो ऐसा लगने लगा है कि अभी तलवार उठा कर दुश्मनों का काम तमाम कर दूं.

    रामराम.

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  16. यह हल्दी घाटी है,जिसके नाम से एक त्वरा उठती है,एक हुक बरबस ह्रदय को मसोस डालती है

    कालेज के दिनों में हल्दी घाटी देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था आज आपने जीवंत देखकर यादें ताजा करा दी |

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  17. हल्दी घाटी देखने की तमन्ना है. यह तीर्थ है .आपने मेरी उत्सुक्ता और बडा दी २०११ में जरूर जाउंगा .

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  18. कुंभलगढ़ को देखने के लिए इस घाटी के पन्द्रह किमी पहले ही दूसरे रास्ते की ओर मुड़ना पड़ा। बहुत बढ़िया जानकारी दी है आपने।

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  19. भाई नीरज, छा गये हो। हल्दीघाटी का नाम ही सुना था अब तक, देखने का क्रेज जरूर था लेकिन मौका नहीं लगा। आज तुमने उस पवित्र भूमि के दर्शन करवा दिये, आभारी हैं तुम्हारे।

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  20. सुन्दर चित्र ....
    शूरवीरों की धरती है हल्दी घाटी...!

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  21. हल्दी घाटी के सुन्दर वर्णन के लिये धन्यवाद। शुभकामनायें।

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  22. भाई गज़ब कर दिया इब की बार...राजस्थान घूम आये...जैपर, अजमेर, चित्तोड, उदैपुर, जोधपुर की सिर कब कराओगे?

    नीरज

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  23. नीरज जी ..क्या कहूँ आपकी इस पोस्ट के बारे में...आप खुद तो मुसाफिर हो ..और इस पोस्ट के माध्यम से मुझे भी घुमाकर मुसाफिर बना दिया ...कमाल कर दिया आपने ...बहुत बहुत आभार ...मुझे दर्शन करवाने के लिए ...शुक्रिया

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  24. इतने सजीव वर्णन के लिए धन्यवाद .
    बचपन से चेतक के बारे मं पढ़ा था ,यह जानकार अच्छा लगा कि चेतक के नाम का स्मारक भी है .

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  25. Nice to see Haldighati. I had visited Salarjung museum in Hyderabad few years back. It has one BHALA (lance) used by Maharana Pratap. The details of Bhala says "Weight: 100 kgs".

    And Maharana used to pick it up in one hand and throw at targets. Can anybody think about his physical strength? I can not at least.

    Vishal Dixit (Retired wanderer)

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  27. बहुत ही सुन्दर वृतान्त. फ़ोटो बहुत ही अच्छे हैं.

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  28. Thank For Detail Of This Great Palace .
    So. Nice,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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  29. हल्दी घटी हमने इतनी नहीं देखि जितनी आपने दिखाई, चेतक की समाधी और संग्रहालय देखने गए थे मगर गुफा नहीं देखि थी.

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  30. हल्दी घटी हमने इतनी नहीं देखि जितनी आपने दिखाई, चेतक की समाधी और संग्रहालय देखने गए थे मगर गुफा नहीं देखि थी.

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  31. हल्दी घटी हमने इतनी नहीं देखि जितनी आपने दिखाई, चेतक की समाधी और संग्रहालय देखने गए थे मगर गुफा नहीं देखि थी.

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