Sunday, March 15, 2009

रजाई गददे भी बन गए घुमक्कड़

आजकल अपने रजाई गद्दे राजस्थान की सैर पर निकल गए हैं। राजपूतों के देश में पहुंचकर वे अपने देश को भूल गए हैं। वापस आने का नाम ही नहीं ले रहे। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि अब वे आयेंगे भी नहीं।
पिछले दिनों जब अपना हरिद्वार से दिल्ली ट्रांसफर हुआ, तो रजाई गद्दे भी दिल्ली पहुँचने थे। मैंने दोनों को ऊपर नीचे रखकर रॉल बनाया, और इसे प्लास्टिक के एक कट्टे में डाल दिया। उसमे दो चादरें, खेस, पुराने घिसे जूते व थोडा बहुत सामान और भर दिया। एक हैण्ड बैग भी था, जिसमे रेलवे का टाइम टेबल, पहचान पत्र, आईकार्ड रखे थे।
शाम को छः बजे बहादराबाद से राजस्थान रोडवेज की बस पकडी। पीछे वाली सीट पर कट्टे को डाल दिया और ऊपर रैक पर बैग को रख दिया। गाजियाबाद का टिकट ले लिया।

Monday, March 9, 2009

उस बच्चे की होली

सबसे पहले तो सभी को होली की शुभकामनाएं। होली एक ऐसा त्यौहार है जिसके आते ही दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में जनसँख्या घनत्व कम हो जाता है। क्योंकि दूर दराज से रोजगार की तलाश में आने वाले लोग अपने अपने घरों को, गांवों को लौट जाते हैं-होली मनाने। स्कूलों की तो खैर छुट्टी रहती ही है, कम्पनियाँ भी बंद हो जाती हैं।
इस बार 10 व 11 मार्च को होली है। तो ज्यादातर जगहों पर 9 यानी सोमवार की भी छुट्टी कर दी गयी है। 8 का रविवार है। तो इस तरह चार दिन की छुट्टी हो गयी है। खैर, कुछ अपवाद भी होते हैं।

Friday, March 6, 2009

बिहार यात्रा और ट्रेन में जुरमाना

बात पिछले साल की है। नवम्बर में मैं गोरखपुर जा पहुंचा। 21 नवम्बर को रेलवे की परीक्षा थी। मैं पहुँच गया 19 को ही। कायदा तो ये था कि 20 तारीख को पूरे दिन पढना चाहिए था। लेकिन मन नहीं लगा। सुबह-सुबह गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पहुँच गया। सोचा कि चलो बिहार राज्य के दर्शन कर आयें। छपरा का टिकट लिया और जा बैठा मौर्या एक्सप्रेस (5028) में। यह गोरखपुर से ही चलती है।
यह रूट भारत के व्यस्त रूटों में से एक है। बिहार, पश्चिम बंगाल और असोम जाने वाली काफी सारी ट्रेनें इसी रूट से गुजरती हैं। लेकिन इस रूट की सबसे बड़ी कमी है कि लखनऊ से ही यह सिंगल लाइन वाला है, यानी कि अप व डाउन दोनों दिशाओं को जाने वाली ट्रेनें एक ही ट्रैक से गुजरती हैं। इसी कारण से अधिकाँश ट्रेनें लेट हो जाती हैं। चार-चार, पांच-पांच घंटे लेट होना तो साधारण सी बात है। तो जाहिर सी बात है कि सुपरफास्ट ट्रेनों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। और पैसेंजर ट्रेनों का तो सबसे बुरा हाल होता है। मेल/एक्सप्रेस को भी कहीं भी रोक लिया जाता किसी दूसरी ट्रेन को पास करने के लिए।